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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

183 : संग्रह से संग्रहित, संगृहित, संग्रहीत या संगृहीत?

संकलन से संकलित और एकत्र से एकत्रित तो संग्रह से क्या होगा? अधिकतर लोग झट से कहेंगे – संग्रहित। कुछ लोग जिन्होंने यह शब्द कहीं देखा-पढ़ा होगा, कह सकते हैं कि नहीं, यहाँ ‘ग्र’ का ‘गृ’ हो जाता है यानी संग्रहित नहीं, संगृहित होगा। कुछ और लोगों की राय में ‘ग्र’ का ‘गृ’ नहीं, बल्कि ‘हि’ का ‘ही’ हो जाता है यानी शब्द बनेगा संग्रहीत। और कुछ लोग ‘ग्र’ को ‘गृ’ और ‘हि’ को ‘ही’ में बदलकर कहेंगे – संगृहीत। लेकिन इन चारों में सही क्या है और क्यों है? जानने के लिए आगे पढ़ें।

प्रश्न यह है कि जिस तरह संकलन से संकलित और एकत्र से एकत्रित होता है, उस तरह संग्रह से क्या होगा। चार विकल्प हैं – 1. संग्रहित, 2. संगृहित, 3. संग्रहीत और 4. संगृहीत। जब मैंने फ़ेसबुक पर इस विषय में पोल किया तो जैसी कि उम्मीद थी, आधे से भी ज़्यादा वोट (क़रीब 56%) संग्रहित के पक्ष में पड़े। दूसरे नंबर पर संग्रहीत रहा 31% वोटों के साथ। यानी 87% लोगों की नज़र में ‘ग्र’ वाले विकल्प ही सही था।

शेष बचे 13% लोग। इनमें से 2% ने दूसरे विकल्प संगृहित और 11% ने आख़िरी विकल्प संगृहीत को सही बताया।

सही है संगृहीत यानी चौथा विकल्प जिसके पक्ष में केवल 11% वोट पड़े। सभी प्रामाणिक शब्दकोशों में संगृहीत ही है (देखें चित्र)।

यानी हर 10 लोगों में से 9 लोगों को ग़लत जानकारी है। शब्दकोशों में संग्रहीता (संग्रहीतृ) शब्द भी है मगर उसका अर्थ कुछ और है। उसपर बात अंत में।

आप जानते हैं कि हमारी चर्चा केवल यह जानने तक सीमित नहीं रहती कि सही क्या है। हम अक्सर इसपर भी बात करते हैं कि जो सही है, वह सही किस आधार पर है। आज भी हम यह जानने की कोशिश करेंगे कि संगृहीत क्यों सही है और बाक़ी क्यों नहीं। परंतु मुझे शक है कि मेरे जैसे लोग जिनको संस्कृत व्याकरण की जानकारी नहीं के बराबर है, वे नीचे दी गई व्याख्या को पढ़कर भी समझ नहीं पाएँगे आख़िर संगृहीत क्यों सही है। मगर इसे पढ़कर उन्हें कम-से-कम तसल्ली तो हो जाएगी कि संगृहीत को सही ठहराने का आधार क्या है।

आगे जो है, वह मेरे भाषामित्र योगेंद्रनाथ मिश्र के सौजन्य से है। यह टिप्पणी उन्होंने अतीत में मेरे इसी सवाल का जवाब देते हुए लिखी थी। इसमें मैंने हलका-सा संपादन कर दिया है ताकि यह जवाब के बदले स्वतंत्र टिप्पणी लगे। योगेंद्र जी ने इसमें ‘संगृहीत’ के साथ-साथ ‘अनुगृहीत’ पर भी बात की है।

योगेंद्र जी की टिप्पणी शुरू।

संग्रहीत सही है या संगृहीत? अनुग्रहीत सही है या अनुगृहीत?

शब्दकोश के हवाले से कहा जा सकता है कि संगृहीत तथा अनुगृहीत सही हैं। लेकिन समस्या यह है कि संग्रह से संग्रहित तथा अनुग्रह से अनुग्रहित बनना चाहिए। संगृहीत तथा अनुगृहीत कैसे बना?

जवाब : 

पहली बात तो यह कि संग्रह से संगृहीत तथा अनुग्रह से अनुगृहीत नहीं बने हैं। 

हाँ, यह ज़रूर है कि दोनों युग्म (संग्रह/अनुग्रह तथा संगृहीत/अनुगृहीत) ‘ग्रह्’ धातु से बने हैं। इसी ग्रह् धातु में ‘क्त’ प्रत्यय जुड़ रहा है।

  • सम्+ग्रह्+क्त=संगृहीत
  • अनु+ग्रह्+क्त=अनुगृहीत

कैसे?

‘ग्रहिज्या’ सूत्र से ग्रह् का संप्रसारण ‘गृह्’ हो जाता है –

सम्+गृह्+क्त तथा अनु+गृह्+क्त

फिर हलंत धातु होने की वजह से ‘क्त’ के स्थान पर ‘इत’ होता है –

संगृहित तथा संगृहित।

फिर एक अन्य सूत्र ‘ग्रहोऽलिटि’ के प्रभाव से ‘इ’ का ‘ई’ हो जाता है। यानी ‘इत’ का ‘ईत’ होता है और इस तरह 

संगृहीत तथा अनुगृहीत शब्द बनते हैं।

योगेंद्र जी की टिप्पणी समाप्त।

समझ में आया? आया तो बढ़िया, नहीं भी आया तो इतना तो पता चल गया होगा कि संस्कृत के कुछ नियमों के कारण संगृहीत और अनुगृहीत शब्द बने हैं। इन दोनों में ‘ग्रह्’ धातु का योगदान है। इसका एक मतलब यह है कि जिन शब्दों में यह ‘ग्रह्’ धातु होगा, वहाँ इसी तरह ‘गृहीत’ बनेगा। जैसे पाणिग्रहण से पाणिगृहीता।

ऊपर मैंने लिखा था कि संग्रहीता (संग्रहीतृ) भी एक शब्द है। इसका अर्थ है संग्रह करने वाला। जैसे नेता (नेतृ) का अर्थ नेतृत्व करने वाला होता है, वैसे ही संग्रहीता (संग्रहीतृ) का अर्थ हुआ संग्रह करने वाला। संग्रहीता का एक और अर्थ भी है – रथ चलाने वाला यानी सारथी (देखें चित्र)।

रथ से याद आया। एक शब्द है महारथ जो योग्यता या कौशल के अर्थ में इस्तेमाल किया जाता है। क्या यह सही है? जानने के लिए इस लिंक पर जाएँ –

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