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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

28. सौ साल की अवधि – शताब्दी या शताब्दि?

सौ साल की अवधि को हिंदी में क्या कहते हैं? जी हाँ, यह शब्द शत से शुरू होता है लेकिन अंत किससे होता है – ब्दी से या ब्दि से? यही सवाल जब मैंने एक फ़ेसबुक पोल में किया तो 85%  ने शताब्दी के पक्ष में वोट किया। क्या वे सही हैं, जानने के लिए आगे पढ़ें।

सही शब्द है शताब्दी,  जैसा कि बहुमत का मानना है। ‘शत’ का अर्थ है सौ और ‘अब्द’ का अर्थ है वर्ष या साल। ‘शत’ और ‘अब्द’ में दीर्घ स्वर संधि (अ+अ=आ) होने से बना शताब्द जिसका वही मतलब है जो शताब्दी का है। यानी शताब्द कहें या शताब्दी,  दोनों का एक ही अर्थ है। कौन किससे बना या दोनों स्वतंत्र रूप से बने, यह मैं नहीं जानता।

वैसे शताब्दी शब्द भले ही शत और अब्द से बना हो जो संस्कृत से आए हैं लेकिन शताब्द या शताब्द संस्कृत के शब्द नहीं है। इस बारे में मेरे मित्र और भाषाविज्ञानी योगेंद्रनाथ मिश्र  ने थोड़ी खोजबीन करके जो जानकारी दी, वह नीचे पेश है।

योगेंद्रजी लिखते हैं –

आलिमजी का यह पोस्ट पढ़ने के बाद मैंने थोड़ी खोजबीन शूरू की। मैंने फ़िलहाल दो शब्दकोश देखे –

  • सर मॉनियर विलियम्ज़ की संस्कृत-इंग्लिश डिक्शनरी (1872)। इस कोश की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें शब्दों के प्रयोग के संदर्भ भी दिए गए हैं। यानी वेद से लेकर लौकिक संस्कृत के ग्रंथों में कोई शब्द कहाँ-कहाँ प्रयुक्त हुआ है।
  • आप्टे का संस्कृत-हिंदी कोश।

दोनों कोशों में शताब्दी शब्द नहीं दिया है। हाँ, अब्दशतम् ज़रूर दिया है (देखें चित्र)। 

यानी तकनीकी रूप से कहें तो शताब्दी संस्कृत का शब्द नहीं है।

यह शब्द अंग्रेजी के सेंचुरी का अनुवाद है। ऐसे शब्दों को हम भाषाविज्ञान में लोन ट्रांसलेशन कहते हैं। हिंदी में ऐसे शब्दों की एक लंबी सूची है।

अंग्रेजी शिक्षा के साथ भारत में आने वाली नयी-नयी अवधारणाओं को व्यक्त करने के क्रम में ऐसे शब्द भारतेंदु युग में बनने शुरू हो गए थे। द्विवेदी युग तथा छायावाद युग में ऐसे शब्द बड़ी संख्या में बने। पंतजी ने ऐसे बहुत शब्द बनाए।

सामान्यतः लोग ऐसे शब्दों को संस्कृत का मानते हैं, क्योंकि ये संस्कृत के ही भाषिक तत्त्वों से बने हैं। पंतजी का बनाया एक शब्द याद आ रहा है – स्वर्णिम। अंग्रेजी गोल्डन का अनुवाद।

कहने का अर्थ यह कि शत और अब्द दोनों संस्कृत के शब्द हैं लेकिन शताब्दी शब्द संस्कृत में नहीं है। यह हिंदी के लोगों द्वारा संस्कृत शब्दों को मिलाकर बनाया गया है।

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