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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

18. पति-पत्नी के लिए सही क्या – दंपति, दंपती या दंपत्ति?

दंपति, दंपती या दंपत्ति? जब इसके बारे में फ़ेसबुक पर पोल किया गया तो 73% ने कहा, दंपति सही है जबकि 27% ने दंपती पर मुहर लगाई। कुछ ने कहा – दोनों ग़लत हैं, सही है दंपत्ति। आइए, जानते हैं – सही क्या है और क्यों है।

सबसे पहले तो आपत्ति का निपटारा। दंपत्ति ग़लत है, 100% ग़लत है। लेकिन दंपति और दंपती में कौनसा सही है, इसका जवाब मुझे देना है और मैं बहुत मुश्किल में हूँ कि किसे सही बताऊँ क्योंकि शब्दकोशों में कोई दंपति को सही बताता है, कोई दंपती को और कोई दोनों को (देखें चित्र)।

लेकिन मेरा ख़्याल है कि दोनों को सही मानने से बात बनेगी नहीं। हमें इस शब्द की गहराई में जाना होगा और तब शायद कोई निष्कर्ष निकलेगा।

दंपति/दंपती एक ऐसा शब्द है जिसने मुझे पत्रकारिता में आने के साथ ही परेशान करना शुरू कर दिया था। ख़बरों में दंपति/दंपती शब्द आता और हमारे सीनियर हमें बता नहीं पाते कि क्या सही है क्योंकि शब्दकोश में दोनों शब्द दिए रहते। फिर किसी ने बताया कि संस्कृत में दंपती है। तब से मैंने दंपती को ही अपनाना शुरू कर दिया यह सोचकर कि जिस संस्कृत से यह शब्द आया है, अगर वहीं दंपती है तो हिंदी में भी दंपती ही होना चाहिए।

लेकिन कुछ साल पहले विद्वानों से संपर्क हुआ और उनसे चर्चा करके जो ज्ञान मिला, उसके आधार पर हम कह सकते हैं कि हिंदी में दंपती नहीं, दंपति होना चाहिए। ऐसा क्यों, यह मैं नीचे डिस्कस करूँगा लेकिन उससे पहले यह जानना लाभदायक होगा कि यह दंपति/दंपती शब्द बना कैसे और यहाँ दम् का क्या मतलब है। मैंने अपने भाषामित्र योगेंद्रनाथ मिश्र से पिछले साल इसके बारे में पूछा था और उन्होंने एक पोस्ट के माध्यम से जो जवाब दिया, वह नीचे बहुत मामूली से संपादन के साथ पेश कर रहा हूँ।

आलिमजी ने दम्पति/दम्पती शब्द की विस्तार से व्याख्या करने के लिए कहा है।

इसमें अपनी बुद्धि लगाने या यों कहें कि अपनी होशियारी दिखाने का कोई अवकाश नहीं है।

सर मॉनियर विलियम्ज़ की संस्कृत-इंग्लिश-डिक्शनरी में जो कुछ दिया है, उसे अपने ढंग से प्रस्तुत करने की कोशिश कर रहा हूँ –

  1. दम् का प्रयोग ऋग्वेद से होता आ रहा हे।
  2. ‘दम्’ धातु (क्रिया) भी है और संज्ञा भी।
  3. ‘दम्’ का मूल अर्थ है ‘घर’। मूल अर्थ पत्नी या स्त्री नहीं है। स्त्री तो बिल्कुल नहीं। ‘दम्’ का स्वतंत्र प्रयोग नहीं मिलता।
  4. ‘दम्’ के साथ पति द्वंद्व समास के रूप में जुड़ता है। मज़े की बात यह कि वह आगे-पीछे दोनों तरफ जुड़ता है – दम्पति तथा पतिदम्। ये दोनों रूप कोश में दिए गए हैं।
  5. दम्पति का मूल अर्थ है – घर का स्वामी। दम् यानी घर। पति यानी स्वामी।
  6. चूँकि घर के स्वामी पति तथा पत्नी दोनों होते हैं (या उस जमाने में होते रहे होंगे)। इसलिए आगे चलकर दम्पति का अर्थ हो गया पत्नी-पति (पति-पत्नी)। ‘दम्’ यानी पत्नी।
  7. और आगे चलकर पाणिनि काल में दम्पति का समास-विग्रह किया गया – जाया च पतिश्च दम्पतिः।
  8. फिर सवाल यह हो सकता है कि विग्रह में दम् क्यों नहीं आया? जाया क्यों आया?

इसका जवाब मेरी अल्पमति से यह हो सकता है कि चूँकि ‘दम्’ शब्द का स्वतंत्र प्रयोग नहीं होता और विग्रह में स्वतंत्र शब्द चाहिए, इसलिए ‘दम्’ के पर्याय जाया (पत्नी) का प्रयोग ‘दम्’ के स्थान पर हुआ होगा।

सर मॉनियर विलियम्ज़ के कोशग्रंथ के सहारे अपनी अल्पमति से मैंने यह व्याख्या की है।

यानी योगेंद्र जी के पोस्ट से यह स्पष्ट हो गया कि दंपति/दंपती में जो दम् शब्द है, उसका अर्थ पत्नी है और बाद का शब्द तो पति है ही। अगर ऐसा है तो दोनों को मिलाकर जो नया शब्द बना, उसके अंत में भी पति ही होना चाहिए, वह पती किस तरह से हो सकता है? मसलन राष्ट्र और कवि से मिलकर कोई शब्द बने तो वह राष्ट्रकवि ही होगा, राष्ट्रकवी तो नहीं हो जाएगा! लेकिन यहाँ दम् (पत्नी) और पति से मिलकर जो शब्द बन रहा है, वह (कम-से-कम संस्कृत में) दंपति नहीं, दंपती हो रहा है। आख़िर क्यों?

इसके लिए संस्कृत का व्याकरण समझना होगा। हिंदी में दो वचन होते हैं – एकवचन और बहुवचन। संस्कृत में तीन वचन होते हैं, एकवचन, द्विवचन और बहुवचन। हिंदी में एक पति की बात होगी तो भी लिखेंगे पति (उसने अपने पति को फ़ोन किया) और दो या उससे अधिक पति होंगे तो भी लिखेंगे पति (द्रौपदी के पाँच पति थे)। पति, पति ही रहा। लेकिन संस्कृत में यदि दो पति होंगे तो लिखा जाएगा पती। एकवचन में पतिः, द्विवचन में पती। (नीचे तस्वीर देखें)।

अब आते हैं दंपति/दंपती पर। चूँकि दंपति/दंपती में पति-पत्नी दोनों हैं (यानी दो व्यक्ति हैं) सो संस्कृत में इसे द्विवचन माना गया और शब्द में पति की जगह पती कर दिया गया क्योंकि संस्कृत में द्विवचन में पतिः का पती हो जाता है। यानी संस्कृत में शब्द है दंपती। वहाँ दंपति है ही नहीं।

लेकिन हिंदी में तो एक पति हो तो भी पति और दो पति हों तो भी पति और पाँच पति हों तो भी पति, इसलिए हिंदी में क्या दंपति नहीं लिखा जाना चाहिए? यह दलील है उन लोगों की जो दंपति के पक्षधर हैं और मानते हैं कि हिंदी अपने शब्द चाहे जहाँ से ले, व्याकरण उसका अपना ही चलना चाहिए। उनकी दलील को समझने के लिए हमें संस्कृत का ही एक और शब्द लेना होगा – कवि जो हिंदी में भी इस्तेमाल होता है। संस्कृत में एकवचन में तो कविः होता है मगर दो कवि हों तो कवी हो जाता है। अब अगर हिंदी में आपको लिखना हो कि ‘वहाँ दो कवि बात कर रहे थे’ तो क्या आप ‘दो कवि बात कर रहे थे’ लिखेंगे या ‘दो कवी बात कर रहे थे’ लिखेंगे? निश्चित रूप से कवि।

लेकिन दूसरी और वे लोग हैं जो मानते हैं कि यह शब्द संस्कृत से आया है और जिस रूप में आया है, हमें उसे उसी (तत्सम) रूप में लिखना चाहिए – वहाँ दंपती है तो हम दंपती ही लिखेंगे

चूँकि इस विवाद का कोई हल अब तक नहीं निकला है, इसीलिए शब्दकोश भी दोनों को अपने पन्नों पर जगह दे रहे हैं। मैं हालाँकि अब दंपति के साथ हो गया हूँ लेकिन जो दंपती के पक्ष में हैं, उनकी बात में भी ‘दम’ नज़र आता है, पत्नी वाला दम् नहीं, ज़ोर वाला दम।

दम से याद आया। एक प्रयोग है दम भरना। उसे कुछ लोग दंभ भरना भी लिखते हैं जो कि ग़लत है। क्यों ग़लत है, यह जानने में रुचि हो तो नीचे दिए गए लिंक पर जाएँ।

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