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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

23. हज़ार के लिए संस्कृत का शब्द सहस्र है या सहस्त्र?

हज़ार के लिए संस्कृत का जो शब्द है, उसे कैसे बोलते या लिखते हैं – सहस्र या सहस्त्र? शब्द के अंत्र में त्र (त्+र) है या स्र (स्+र)? जब मैंने यही सवाल फ़ेसबुक पर पूछा तो 55% ने कहा सहस्त्र यानी अंत में त्र है। 45% ने कहा, अंत में स्र है। सही क्या है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

सही शब्द है सहस्र जिसमें अंत में स् और र (यानी स्र) है, स्त्री वाला स्त्र नहीं जिसमें स् और त्र है। इसका मतलब यह कि अगर पोलिंग के नतीजे के आधार पर हम कोई निष्कर्ष निकालें तो आधे से भी ज़्यादा लोग इस उच्चारण के मामले में ग़लत जानते हैं। यह भी संभव है कि जो सहस्त्र को सही समझते हैं, वे स्रोत का भी स्त्रोत लिखते और बोलते हों। और स्राव को वे स्त्राव लिखते हों।

यह ग़लती मेरे विचार से इसलिए होती है कि सहस्र और सहस्त्र देखने में एक जैसे लगते हैं। बहुत ध्यान से देखने पर ही पता चलता है कि शब्द में स्त्र (स्+त्+र) नहीं, स्र (स्+र) है। लेकिन चिंता न करें। स्र और स्त्र वाले शब्द बहुत कम हैं। एक बार उन गिने-चुने शब्दों की सही स्पेलिंग समझ लेंगे तो आगे कभी दिक़्क़त नहीं होगी।

स्त्र (स्+त्+र) वाले शब्द हैं

  • अस्त्र
  • शस्त्र
  • वस्त्र
  • मिस्त्री
  • शास्त्र और उससे बने शास्त्री और शास्त्रीय।

स्र वाले शब्द भी ज़्यादा नहीं हैं।

  • सहस्र
  • स्रोत
  • स्राव
  • मिस्र (EGYPT का हिंदी नाम)
  • इस्राइल (इसे इसराईल भी लिखते हैं)।

इन शब्दों की स्पेलिंग और उच्चारण को दिमाग़ में बिठा लें तो आप भविष्य में स्र और स्त्र को लेकर कभी भ्रमित नहीं होंगे।

एक और शब्द है स्तोत्र जिसको लोग स्रोत से कन्फ़्यूज़ कर जाते हैं।

  • स्रोत (स्+रो+त) का अर्थ है सॉर्स (SOURCE), उद्गम स्थल – वह स्थान या वस्तु जहाँ से कुछ निकलता है या प्राप्त होता है।
  • स्तोत्र (स्+तो+त्र) का अर्थ है किसी की स्तुति या प्रशंसा में लिखा गया श्लोक या ग्रंथ।

जाते-जाते एक बात बताना चाहूँगा। मैंने कहा कि सहस्र सही है लेकिन यदि आप हिंदी शब्दसागर का ऑनलाइन संस्करण देखेंगे तो वहाँ सहस्र नहीं, सहस्त्र मिलेगा। पूरे शब्दकोश में अलग-अलग स्थानों पर 42 जगह सहस्त्र टाइप हुआ है और 22 जगहों पर सहस्र।

यह कैसे हुआ, इसका अंदाज़ा आराम से लगाया जा सकता है। जिन बंदों ने डिक्शनरी के लिए कंपोज़िंग की होगी, उनमें से एक या ज़्यादा बंदे सहस्र को सहस्त्र ही लिखते-बोलते होंगे। और किसी भाई ने उसकी प्रूफ़ रीडिंग करने की ज़रूरत नहीं समझी। यूनिवर्सिटी ऑफ़ शिकागो या फ़ंडिंग एजंसी से जो पैसा मिला, वह किसी तोताराम ने हड़प लिया और प्रूफ़ रीडिंग के लिए किसी को नहीं रखा। यही हाल शब्दकोश.कॉम का है जिसमें पब्लिक से एंट्री करवाई गई और कोई देखनेवाला नहीं है कि क्या सही है और क्या ग़लत है।

सोचिए, कोई व्यक्ति अपनी जानकारी बढ़ाने के लिए किसी डिक्शनरी की शरण में जाए और वहाँ दिए गए भ्रष्ट उच्चारण, स्पेलिंग या अर्थ को सही समझकर इस्तेमाल करे तो उसका क्या होगा! यह तो वैसे ही हुआ कि आप किसी नए शहर में जाएँ, किसी से रास्ता पूछें और वह ग़लत रास्ता बताकर आपको और भटका दे। कितना बड़ा अपराध है किसी को ग़लत जानकारी देना!

इसलिए हिंदी के शब्दों की सही जानकारी के लिए मैं हिंदी के ऑनलाइन शब्दकोशों की सिफ़ारिश करने से कतराता हूँ हालाँकि DSAL की साइट पर संस्कृत का कोश काफ़ी सही तैयार किया गया है। बेहतर है कि आप विश्वसनीय शब्दकोशों का प्रिंट संस्करण ही लें। हालाँकि उर्दू-हिंदी शब्दकोश के मामलों में मैंने जितने भी प्रिंट संस्करण देखे, उनमें नुक़्तों के मामले में भयंकर भूलें हैं। इसलिए उर्दू-हिंदी के मामले में तो रेख़्ता की साइट ही बेहतर है।

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One reply on “23. हज़ार के लिए संस्कृत का शब्द सहस्र है या सहस्त्र?”

स्राव,स्रोत तथा सहस्र में ‘त्‘ जोड़ना आवश्यक नहीं है । शस्त्र,शास्त्र आदि समउच्चारी शब्दों का उपयोग अधिक मात्रा में होने के कारण ‘स्र’ का ‘स्त्र’ के रूप में गलत उच्चारण होता रहता है । उच्चारण की सावधानी से लेखन-शुद्धि होगी ।

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