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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

24. मुक़दमा का बहुवचन मुक़दमे होगा या मुक़दमें?

मुक़दमा एकवचन है। अगर इसे बहुवचन में लिखा जाए तो मुक़दमे होगा या मुक़दमें? यह सवाल जब मैंने फ़ेसबुक पर पूछा तो 69% ने कहा – मुक़दमे होगा यानी ‘मे’ पर बिंदी नहीं लगेगी। 31% ने कहा, मुक़दमें होगा यानी बिंदी लगेगी। सही क्या है और क्यों है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

सही उत्तर है मुक़दमे यानी मुक़दमे के अंतिम वर्ण ‘मे’ पर बिंदी नहीं लगेगी। लेकिन ‘लगेगी’ कहने वालों की संख्या भी अच्छी-ख़ासी है इसलिए यह बताना ज़रूरी है कि मुक़दमे में बिंदी क्यों नहीं लगेगी। और यह भी कि क्या उसका कोई नियम है।

नियम है और बहुत आसान है।

मुक़दमे में बिंदी इसलिए नहीं लगेगी कि मुक़दमा पुल्लिंग है और उसके अंत में ‘आ’ की मात्रा है। हिंदी के ऐसे सारे शब्द जो पुल्लिंग हैं और उनके अंत में ‘आ’ की मात्रा है, जब हम उनका एकारांत रूप बनाते हैं तो उनमें बिंदी नहीं लगती।

समझने के लिए हम कुछ ऐसे शब्द लेते हैं जो पुल्लिंग हैं और आकारांत भी जैसे गधा, घोड़ा, रास्ता, लड़का।

अब हम इनका एकारांत रूप बनाते हैं – गधे, घोड़े, रास्ते और लड़के। क्या इनमें से किसी शब्द के अंत में बिंदी है? क्या आप कभी गधें, घोड़ें, रास्तें या लड़कें लिखते हैं। नहीं लिखते। न लिखते होंगे, न बोलते होंगे।

गधा, घोड़ा, रास्ता और लड़का की तरह मुक़दमा भी पुल्लिंग है (मुक़दमा शुरू हो गया है न कि मुक़दमा शुरू हो गई है), इसलिए इसके भी एकारांत रूप में बिंदी नहीं लेगी और वह भी गधे, घोड़े, रास्ते और लड़के की तरह मुक़दमे ही लिखा जाएगा।

निष्कर्ष यह कि किसी भी आकारांत शब्द के एकारांत रूप में बिंदी लगेगी या नहीं लगेगी, यह समझने के लिए केवल इतना पता लगाना है कि वह पुल्लिंग है या स्त्रीलिंग। पुल्लिंग होगा तो उसमें कभी भी बिंदी नहीं लगेगी (गधे, घोड़े, लड़के, बच्चे, मुक़दमे, शामियाने) और स्त्रीलिंग होगा तो…

स्त्रीलिंग आकारांत शब्दों में क्या होगा?

स्त्रीलिंग शब्दों के लिए एक और नियम है। अगर किसी आकारांत स्त्रीलिंग शब्द का एकारांत रूप बनाते हैं तो वहाँ हमें एक अतिरिक्त ए जोड़ना पड़ता है और उसमें बिंदी (चंद्रबिंदु) लगती है। जैसे हवा का हवाएँ, लता का लताएँ, कविता का कविताएँ आदि।

आपने देखा कि बहुवचन में मुक़दमा (पुल्लिंग) का तो मुक़दमे हो गया, लेकिन हवा (स्त्रीलिंग) के हवे नहीं हुआ, हवाएँ हुआ, लता (स्त्रीलिंग) का लते नहीं हुआ, लताएँ हुआ। आख़िर हवा का हवे क्यों नहीं होता, या सत्ता (स्त्रीलिंग) का सत्ते क्यों नहीं होता, यह जानने के लिए यह क्लास पढ़ें – सत्ते के नशे में बीजेपी, यह बात ‘आजतक’ सुनी नहीं।

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