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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

22. जनसंख्या में ‘बढ़ोत्तरी’ हो रही है या ‘बढ़ोतरी’?

वृद्धि के लिए हिंदी में एक और शब्द चलता है। वह बढ़ोतरी है या बढ़ोत्तरी? यही सवाल जब मैंने फ़ेसबुक पर पूछा तो पोल पर 600 से ज़्यादा वोट पड़े और क़रीब दो-तिहाई (66%) ने बढ़ोत्तरी को सही बताया यानी जिसमें त की ध्वनि दो बार थी। बढ़ोतरी के समर्थक केवल 34% थे। सही क्या है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

सही है बढ़ोतरी। मैंने जितने भी शब्दकोश देखे, सभी में बढ़ोतरी ही है। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि हिंदी शब्दसागर जो कि सबसे प्रामाणिक शब्दकोश माना जाता है, उसमें बढ़ोतरी की व्युत्पत्ति ‘बाढ़’ और ‘उत्तर’ से बताई गई है (देखें चित्र)।

अब जब बाढ़ से उत्तर जुड़ा तो बाढ़ोत्तर>बाढ़ोत्तरी>बढ़ोत्तरी ही बनना चाहिए। फिर बढ़ोतरी सही कैसा हुआ? मुझे लगता है कि शुरू में बढ़ोत्तरी ही रहा होगा जो घिसकर बढ़ोतरी हो गया होगा। किसी व्यंजन के एकसाथ आने पर (यानी द्वित्व होने पर) एक व्यंजन के लुप्त होने के हिंदी में कई उदाहरण हैं। संस्कृत का पुत्तलक हिंदी में पुतला हो गया, बच्चा का बचवा हो गया, चक्कर से चकरी हो गया। इसी तरह बढ़ोत्तरी से बढ़ोतरी हो गया होगा, यह मेरा अनुमान है।

लेकिन जितने लोग ‘बढ़ोतरी’ की जगह ‘बढ़ोत्तरी’ बोलते हैं, वे क्या जानते हैं कि इस शब्द के मूल में ‘उत्तर’ है? मेरे ख़्याल से नहीं। तो फिर बढ़ोत्तरी इतना लोकप्रिय कैसे हो गया कि आज की तारीख़ में दो-तिहाई लोगों को वह सही लगता है? बढ़ोत्तरी को लोकप्रिय करने में और किसी का योगदान हो या न हो, अख़बारों-वेबसाइटों का ज़रूर है। अख़बारों/वेबसाइटों में जो छपता है, लोग उसे सही मान लेते हैं और उसी को अपना लेते हैं। नए पत्रकार भी उन्ही अख़बारों/वेबसाइटों को पढ़कर बड़े हुए होते हैं और वे भी वही ग़लत शब्द दोहराते हैं। इस तरह ग़लत शब्द खोटे सिक्के की तरह बड़े पैमाने पर चलन में आ जाता है। इतना कि नए शिक्षक भी ग़लत शब्द को ही सही समझते हुए छात्रों को ग़लत शब्द सिखाने लगते हैं।

नीचे दैनिक जागरण और भास्कर में छपी ख़बरें देखिए। दोनों में बढ़ोत्तरी जा रहा है। रोचक बात यह है कि भास्कर की हेडिंग में बढ़ोतरी है, मैटर में बढ़ोत्तरी।

स्कूल में जो हिंदी सीखी जाती है, वह नंबरों के लिए सीखी जाती है। अख़बार या वेबसाइट दिलचस्पी के कारण पढ़े जाते हैं। इसी कारण मैं पत्रकारों की भूमिका को शिक्षकों से भी ज़्यादा बड़ी मानता हूँ। यदि पत्रकार सही लिखना शुरू कर देंगे तो लोग भी सही लिखना और बोलना शुरू कर देंगे। लेकिन पत्रकारों को सिखाएगा कौन?

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