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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

184. ऊपर कही गई बात = उपर्युक्त या उपरोक्त?

अगर आप ‘ऊपर या पहले कही गई किसी बात’ का बाद में हवाला देना चाहते हैं तो आप क्या लिखते हैं – उपर्युक्त या उपरोक्त? हिंदी में फ़िलहाल ये दोनों शब्द चल रहे हैं। कुछ लोग कहते हैं, उपर्युक्त सही है तो कुछ और लोग उपरोक्त को सही मानते हैं। हो सकता है, आप भी इस समस्या से कभी दो-चार हुए हों कि इन दोनों में से क्या सही है। आज की चर्चा इसी विषय पर है।

हिंदी समाज में ‘उपर्युक्त’ और ‘उपरोक्त’ – इन दोनों का इस्तेमाल होता है। लेकिन कितने लोग ‘उपर्युक्त’ का और कितने ‘उपरोक्त’ का प्रयोग करते हैं, यह जानने के लिए मैंने फ़ेसबुक पर एक पोल किया। पोल के परिणाम से पता चला कि 50% लोग ‘उपर्युक्त’ को, 40% ‘उपरोक्त’ को और शेष 10% दोनों को सही मानते हैं।

‘उपर्युक्त’ सही है, इसके बारे में कोई विवाद नहीं है क्योंकि यह संस्कृत का शब्द है और स्वर संधि के एक नियम के तरह बना है।

इस शब्द के दो हिस्से हैं – उपरि (जिसका अर्थ है ऊपर) और उक्त (यानी कथन)। स्वर संधि का एक नियम है जिसके अनुसार जब ‘इ’ के बाद कोई और विजातीय स्वर जैसे ‘अ’, ‘उ’, ‘ए’ आता है तो ‘इ’ का ‘य्’ हो जाता है। यहाँ भी उपरि के अंत में ‘इ’ है और उक्त के आरंभ में ‘उ’ है। इसलिए जब ये दोनों शब्द जुड़ते हैं तो उस जुड़ाव के फलस्वरूप कुछ इस तरह का परिवर्तन होता है – उपरि+उक्त=उपर्+(इ)+उक्त=उपर्+(य्)+उक्त=उपर्+युक्त=उपर्युक्त।

यह तो हुआ ‘उपर्युक्त’ का मामला जिसे 50% सही मानते हैं। मगर जिस ‘उपरोक्त’ को शेष 50% लोगों का आंशिक या पूर्ण समर्थन प्राप्त है, क्या वह भी सही है? अगर है तो कैसे?

आगे बढ़ने से पहले यह स्पष्ट कर देना ज़रूरी है कि ‘उपर्युक्त’ जहाँ व्याकरण की दृष्टि से बिल्कुल सही है, वहीं ‘उपरोक्त’ व्याकरण की दृष्टि से सही नहीं है। कारण, ‘उपरोक्त’ शब्द तभी बन सकता है जब ‘उपर’ और ‘उक्त’ की संधि हो और मेरी जानकारी में ‘उपर’ जैसा कोई शब्द न हिंदी में है, न संस्कृत में। कुछ कविताओं में भले ही ऊपर की जगह ‘उपर’ का इस्तेमाल किया गया हो लेकिन बोलने या लिखने में ऊपर का ही प्रयोग होता है। इसलिए अगर हिंदी में ‘ऊपर कही गई बात’ का अर्थ देने वाला कोई शब्द बनाना होगा तो वह ऊपर+उक्त=ऊपरोक्त होगा, न कि उपरोक्त। मगर ऊपरोक्त तो लिखा नहीं जाता।

इसलिए व्याकरण की दृष्टि से परखने के बजाय प्रचलन के नज़रिए से जाँचने पर ही ‘उपरोक्त’ को सही ठहराया जा सकता है।

उपरोक्त प्रचलन में है, इसके बारे में कोई विवाद नहीं है। अगर 1914 का हिंदी शब्दसागर देखें तो वहाँ भी हमें ‘उपरोक्त’ मिलता है (देखें चित्र)। इसका मतलब यह हुआ कि सौ साल से अधिक समय से हिंदी जगत का एक बड़ा हिस्सा ‘उपरोक्त’ का प्रयोग कर रहा है।

लेकिन उपरोक्त प्रचलन में कैसे आया, यह एक ऐसा प्रश्न है जिसके बारे में केवल क़यास लगाए जा सकते हैं। हो सकता है, पहले ऊपरोक्त बना हो जो बाद में घिसकर या उपर्युक्त की देखादेखी उपरोक्त हो गया हो (देखें ऊपर का चित्र)। यह भी संभव है कि उपर्युक्त ही मुखसुख के चलते उपरोक्त हो गया हो। हमारे पास ऐसे कई उदाहरण हैं जहाँ संस्कृत के कठिन शब्द हिंदी में आने के क्रम में सरल शब्दों में रूपांतरित हो गए। जैसे ग्राम का गाँव हो गया, दुग्ध का दूध हो गया, गृह का घर हो गया। अब अगर कोई गाँव को व्याकरण की कसौटी पर जाँचने की कोशिश करे तो गाँव उस परीक्षा में कभी भी पास नहीं होगा, न ही घर को व्याकरणानुकूल साबित किया जा सकेगा।

इसलिए हम केवल यह कह सकते हैं कि जिस तरह ग्राम और गाँव दोनों सही हैं, जिस तरह दुग्ध और दूध दोनों सही हैं और जिस तरह गृह और घर दोनों सही हैं, उसी तरह उपर्युक्त और उपरोक्त भी सही हैं। दूसरे शब्दों में ग्राम, दुग्ध और गृह की तरह उपर्युक्त एक तत्सम शब्द है और गाँव, दूध और घर की तरह उपरोक्त एक तद्भव शब्द है जो उपर्युक्त से परिवर्तित होकर या उसकी देखादेखी बना है।

लेकिन यहाँ एक बहुत भारी समस्या आती है। समस्या यह कि कुछ शब्दों के कई-कई रूप समाज में चलते हैं। उनमें से किसे अपनाया जाए और किसे नहीं, किसे शुद्ध माना जाए और किसे नहीं? जैसे ‘बहुत’ शब्द संस्कृत से आया। अब कुछ लोग उसे ‘बहोत’ भी बोलते और लिखते हैं। इसी तरह फ़ारसी से आया ‘जाएगाह’ हिंदी-उर्दू में जगह बना। उसे कई लोग ‘जगा’ या ‘जगे’ भी कहते हैं (सुनें यह मशहूर गीत – ये क्या जगे है दोस्तो…)। ऐसे में क्या ‘बहोत’ और ‘जगा’/’जगे’ को भी सही मान लिया जाए?

मेरे सामने भी यह प्रश्न तब उपस्थित हुआ जब मैंने ‘अतिशयोक्ति’ और ‘अतिश्योक्ति’ पर पोल किया यह जानने के लिए कि लोगों में कौनसा शब्द ज़्यादा प्रचलित है। मुझे जानकर हैरानी हुई कि 53% ने उस विकल्प को चुना जो व्याकरण की दृष्टि से ग़लत है। शेष 47% ने सही विकल्प के पक्ष में राय दी थी। ऐसे में क्या हमें ‘अतिशयोक्ति’ और ‘अतिश्योक्ति’ दोनों को सही मान लेना चाहिए?

प्रश्न बड़ा विकट है और जैसा कि मेरे भाषामित्र योगेंद्रनाथ मिश्र का सुझाव है, ऐसे शब्दों का फ़ैसला समाज और भविष्य पर छोड़ देना चाहिए। उनके अनुसार समाज स्वयं तय कर लेगा कि उसे किस शब्द को अपने भंडार में जगह देनी है और किसे निकाल बाहर करना है। जब संस्कृत का ‘ग्राम’ अन्य भाषाओं में जगह बनाने के लिए निकला होगा तो ‘गाम’ (पाली) और ‘गावँ’ (प्राकृत) के रास्ते पर चलकर ही ‘गाँव’ (हिंदी) तक पहुँचा होगा। हो सकता है, तब भी कई लोगों ने ‘ग्राम’ के ‘गाम’ या ‘गावँ’ में बदलने पर हाहाकार मचाया हो।

ऊपर मैंने ‘अतिशयोक्ति’ और ‘अतिश्योक्ति’ का उल्लेख किया है। यदि आप जानना चाहते हों कि व्याकरण के अनुसार कौनसा सही और कौनसा ग़लत है, तो नीचे दिए गए लिंक पर जाएँ।

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