Allocation या Allotment के अर्थ में हिंदी में दो शब्द चलते हैं – ‘आवंटन’ और ‘आबंटन’। व्याकरण के हिसाब से देखें तो ‘आवंटन’ सही लगता है क्योंकि संस्कृत के ‘वंटन’ शब्द से यह बना है। लेकिन सरकारी कामकाज में ‘आबंटन’ शब्द इस्तेमाल होता है। ऐसे में किसे सही माना जाए, आज की चर्चा इसी पर है।
जब भी कोई शब्द दो-तीन तरह से लिखा जाता है तो उनमें से शुद्ध रूप कौनसा है, इसका निर्णय हम दो तरह से करते हैं। पहला तरीक़ा वह है जिसमें व्युत्पत्ति और व्याकरण के नियमों के आधार पर शब्द की परीक्षा की जाती है। दूसरा तरीक़े में हम यह जाँचते हैं कि अधिसंख्य जनता क्या बोलती-लिखती है। कई बार प्रचलन में जो शब्द होता है, वह भाषा और व्याकरण के नियमों के विरुद्ध होता है लेकिन उसे भी हमें महत्व देना होता है।
लेकिन ‘आवंटन’ और ‘आबंटन’ के मामले में स्थिति बहुत भिन्न है। व्याकरण के अनुसार ‘आवंटन’ शब्द सही है और वह प्रचलित भी है जैसा कि एक फ़ेसबुक पोल से पता चला। लेकिन सरकारी मशीनरी ने ‘आबंटन’ के रूप में एक नया शब्द लाद दिया है जिसे किसी भी हिसाब से सही नहीं ठहराया जा सकता।
शब्द दो तरह के होते हैं। एक वह जिनका निर्माण समाज करता है और दूसरा, जिसका निर्माण राज करता है। समाज के बनाए शब्द सरल होते हैं। राज के बनाए शब्द अपेक्षाकृत कठिन होते हैं। वे बनाए जाते हैं, राजकाज के लिए, क़ानून बनाने के लिए, विज्ञान, भूगोल आदि की पढ़ाई के लिए। इन दूसरे तरह के शब्दों को पारिभाषिक शब्द कहते हैं।
जैसे संविधान। यह शब्द संस्कृत में है लेकिन उसमें उसका वह अर्थ नहीं है जो हिंदी के संविधान का है। इसी तरह भूगोल शब्द है। Geography के लिए यह शब्द भू और गोल को मिलाकर बना दिया गया। इसी तरह का शब्द है आवंटन/आबंटन।
हिंदी में नए पारिभाषिक शब्द बनाने के लिए आम तौर पर संस्कृत का सहारा लिया जाता है। कारण 1. उसकी प्रचुर शब्द संपदा और 2. उपसर्गों और प्रत्ययों के योग से असीमित शब्दनिर्माण की क्षमता। इसी कारण जब Allocation या Allotment के लिए हिंदी में नया शब्द बनाने की नौबत आई होगी तो संस्कृत से उपयुक्त शब्द खोजा गया होगा। संस्कृत में Allocation के लिए कोई शब्द नहीं है। इससे मिलता-जुलता जो शब्द है – वंटनम् उसका अर्थ है बाँटना। सो इसी ‘वंटनम्‘ के आगे ‘आ’ लगाकर एक अलग शब्द बना दिया गया होगा – आवंटन।
लेकिन न जाने क्यों सरकारी शब्दावली में ‘आवंटन’ की जगह ‘आबंटन’ हो गया और आज तक वही चल रहा है (देखें चित्र)।


ऐसा क्यों हुआ होगा, इसका हम केवल अंदाज़ा लगा सकते हैं। हो सकता है, यह टाइपिंग की ग़लती के चलते हुआ हो – ‘व’ की जगह टंकक महोदय ने ‘ब’ टाइप कर दिया हो। यह भी संभव है कि जिन महाशय को यह ज़िम्मा दिया गया हो, उनको ‘बंटन’ ‘वंटन’ से बेहतर लगा हो क्योंकि यह हिंदी के ‘बाँटने’ के ज़्यादा क़रीब है।
लेकिन यह उचित नहीं है। यदि कोई नया शब्द रचने के लिए संस्कृत या किसी भी भाषा से कोई शब्द लिया जाता है तो उसके स्वरूप में कोई मौलिक परिवर्तन नहीं किया जाना चाहिए। मुझे ‘आबंटन’ के अतिरिक्त और कोई शब्द याद नहीं आता जिसमें संस्कृत या किसी और भाषा से लिए गए शब्द से जाने-अनजाने छेड़छाड़ की गई हो।
यह सही है कि संस्कृत के कई शब्द हैं जो ‘व’ और ‘ब’ दोनों ही रूपों में मान्य हैं जैसे वृहत् और बृहत्, वृहस्पति और बृहस्पति, वाह्य और बाह्य। इसलिए मैंने संस्कृत के जानकारों से पूछ लिया कि कहीं संस्कृत में ‘वंटनम्’ के साथ-साथ ‘बंटनम्’ भी मान्य तो नहीं है। मुझे बताया गया कि ऐसा नहीं है। संस्कृत शब्दकोश में भी मुझे ऐसा कोई शब्द नहीं मिला।
इसलिए मेरा तो मानना है कि भले ही सरकारी शब्दावली में ‘आबंटन’ हो, सही शब्द तो ‘आवंटन’ ही है और मुझे कहीं लिखना या बोलना होगा तो मैं ‘आवंटन’ ही बोलूँगा/लिखूँगा।
आवंटन/आबंटन की ही तरह एक और शब्द के बारे में भी भ्रम की स्थिति है। वह शब्द है आकलन/आँकलन। पढ़ें – इनमें से कौनसा सही है?
5 replies on “229. Allocation = आवंटन या आबंटन?”
आदरणीय महोदय,
सादर नमस्ते,
मेरी जानकारी में बहुत से ऐसे लोग सरकारी नौकरी का आनंद ले रहे हैं जिन्हें “ब” और “व” में ही अंतर का ज्ञान नहीं। ऐसे बहुत से लोगों को मैने स्वयं “बिंदु” को ” “विंदु” लिखते देखा है। संभवतः ऐसे ही किसी व्यक्ति ने आवंटन का आबंटन कर दिया होगा और नकल करने की विशेष कला में पारंगत लोगों ने उसे आगे भी आबंटन ही बना दिया।
नमस्ते। विंदु और बिंदु के मामले में स्थिति यह है कि संस्कृत में विंदु ही है। उसी से हिंदी का बिंदु और बूँद दोनों बने हैं। इसलिए कोई यदि हिंदी में विंदु लिखता है तो हम उसे ग़लत नहीं ठहरा सकते। आबंटन का मामला अलग है। यह शब्द केवल सरकारी कामकाज में चलता है और कुछ वेबसाइटें और अख़बार सरकारी विज्ञप्तियों को देखकर आबंटन लिखने लगे हैं।
एक प्रकाश लाडली या लाड़ली पर डालिए..
लाड़ली- https://ladlilaxmi.mp.gov.in/llyhome.aspx
लाडली- https://hindi.economictimes.com/wealth/personal-finance/do-you-know-about-ladli-scheme-of-delhi-govt/articleshow/65851397.cms
बिलकुल। अगले ही सप्ताह इसपर करता हूँ। धन्यवाद आपके सुझाव के लिए।
लाड़ली और लाडली पर चर्चा हो चुकी है। उम्मीद है, आपने देख ली होगी।