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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

135. चित्त, चित् और चित में किसका मतलब मन है?

चित्त, चित् और चित। ये तीनों मिलते-जुलते शब्द हैं और कई बार भ्रम हो जाता है कि किसका क्या अर्थ है। हिंदी में इनका प्रयोग दो तरह के अर्थों के लिए किया जाता है। एक, मन और दूसरा कुश्ती में पीठ के बल लेटना या लिटाना। तो फिर तीसरे शब्द का अर्थ क्या है?आज की यह क्लास इन्हीं तीन शब्दों के बारे में है।

जब मैंने इन तीनों शब्दों पर फ़ेसबुक पोल किया और पूछा कि इसमें से कौनसा शब्द है जिसका अर्थ है मन था तो मुझे अंदाज़ा नहीं था कि 80% साथी सही जवाब देंगे। यानी हर पाँच में से चार लोगों ने चित्त के पक्ष में वोट दिया हालाँकि कुछ ने कहा भी कि कहीं-कहीं उन्होंने ‘चित’ भी लिखा देखा है जैसे बासु चटर्जी की मूवी ‘चितचोर’ में जिसका अर्थ मन का चोर है मगर वहाँ ‘चित्तचोर’ नहीं, ‘चितचोर’ है।

इस भ्रम के बावजूद चित के पक्ष में सबसे कम वोट पड़े – 7%। उससे ज़्यादा वोट चित् के पक्ष में पड़े।

चलिए, यही शब्द का फ़ैसला तो हो गया मगर आप पूछ सकते हैं कि फिर ‘चित्’ और ‘चित’ का अर्थ क्या है और वे कैसे ‘चित्त’ से अलग हैं।

1. चित् संस्कृत का शब्द है और हिंदी में अलग से इस्तेमाल नहीं होता। इसका अर्थ है चेतना या ज्ञान। इसी से बने हैं सच्चिदानंद (सत्+चित्+आनंद), चिन्मय (चित्+मय) आदि। 

2. चित हिंदी का शब्द है और उसका अर्थ है पीठ के बल पर लेटा हुआ। इसका इस्तेमाल कुश्ती में होता है – किसी को चित कर देना। चित का उलटा है पट। सिक्का उछालने में भी इस शब्द का इस्तेमाल होता है – चित या पट! 

मगर यह चित अब चित्त के अर्थ में भी प्रयुक्त होने लगा है, ख़ासकर जब वह किसी और शब्द का हिस्सा हो जाता है जैसे ‘चितचोर’। हिंदी शब्दसागर में ‘चित्तचोर’ और ‘चितचोर’ दोनों हैं (देखें चित्र)।

यह तो स्पष्ट है कि ‘चित्तचोर’ ही आगे जाकर ‘चितचोर’ बना होगा जिस तरह ‘चित्तरंजन’ बोलने में ‘चितरंजन’ हो जाता है। अगर हम अगर चित्तचोर/चितचोर और चित्तरंजन/चितरंजन में तुलना करें तो चितचोर और चितरंजन बोलना आसान है।

ऐसा केवल चित्त के मामले में नहीं है। लट्ठ, गप्प आदि में भी हम देखते हैं कि वे अन्य शब्दों का हिस्सा बनते ही अंतिम वर्ण से पहले की ध्वनि खो बैठते हैं। मसलन लठैत या गपोड़ी। लट्ठ से लठ हुआ और लठ से लठैत। इसी तरह गप्प से गप हुआ और गप से गपोड़ी। रद्द और हद्द भी रद और हद में बदल चुके हैं।

आज ज़्यादा कुछ लिखने को है नहीं। हाँ, कुछ समय पहले मैंने प्रायश्चित्त और प्रायश्चित की चर्चा की थी कि इनमें कौनसा शब्द सही है। अगर आपने वह चर्चा नहीं पढ़ी हो तो इस लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं।

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