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इंग्लिश क्लास

EC29 : 400 साल पहले इस J ने बदल दिया ईसा का नाम

आज हम एक ही क्लास में तीन लेटर्ज़ जो Jammu, Kashmir और Ladakh के आरंभ में हैं, उनकी बात करेंगे। ये तीनों वैसे तो बहुत सामान्य लगते हैं लेकिन तीनों की अलग-अलग विशेषताएँ हैं। J को हम आज ‘ज’ की ध्वनि के लिए इस्तेमाल करते हैं लेकिन शुरू में इसका उच्चारण ‘य’ होता था। उधर K और L का उच्चारण हमेशा से ‘क’ और ‘ल’ रहा है लेकिन K शब्द के शुरू में और L शब्द के बीच में हो तो कई बार साइलंट हो जाता है। कब और क्यों होता है ऐसा, जानने के लिए आगे पढ़ें।

J इंग्लिश का बहुत ही कम इस्तेमाल होनेवाला लेटर है और इसका कारण यह है कि जिस रोमन वर्णमाला पर अंग्रेज़ी आधारित है, उस वर्णमाला के मूल 23 ध्वनिचिह्नों में J था ही नहीं। यह i की तीन ध्वनियों (इ, ई और य) को प्रदर्शित करने का ही एक और तरीक़ा था और इसका इस्तेमाल रोमन अंक लिखने में अंतिम i की जगह होता था।मसलन 3 को रोमन में लिखते थे – iij, 12 को लिखते थे xij।

आगे चलकर j को i से अलग पहचान मिली और अलग-अलग भाषाओं में इसका अलग-अलग ध्वनियाँ दर्शाने के लिए इस्तेमाल होने लगा। मसलन जर्मन, स्वीडिश और डच में यह ‘य’ के लिए तो फ़्रेंच में यह ‘श्ज़’ के लिए इस्तेमाल होता है। मेक्सिकन में इसका उच्चारण कुछ-कुछ ‘ह़’ जैसा है।

जहाँ तक अंग्रेज़ी में मौजूद J का मामला है, यहाँ इसका उच्चारण होता है ज और यह तो आप क्लास 22 में जान ही चुके हैं कि जब यह D के साथ आता है तो D को चुप करा देता है और अपनी ही चलाता है (Ad.just=अजस्ट)।

अब प्रश्न यह है कि यदि किसी अंग्रेज़ी शब्द में J हो तो उसका क्या उच्चारण करें? इसका जवाब यह कि अगर वह शब्द अंग्रेज़ी का ही है मसलन Judge या Jug तो उसका उच्चारण जज और जग ही होगा। लेकिन अगर वह किसी दूसरी भाषा से आया है तो उसका वही उच्चारण करना चाहिए जो उस भाषा में है। जैसे Bjorn Borg टेनिस के नामी खिलाड़ी रहे हैं। उनके नाम का उच्चारण होगा ब्यर्न बॉर्ग। इसी तरह पीत्सा (Pizza का सही उच्चारण) में डाले जाने वाले Jalapeño को हैल्अपेन्यो कहेंगे।

अंग्रेज़ी में I से अलग होकर J ने कैसे नामों का उच्चारण बदला, इसका क्लासिक उदाहरण है ईसा मसीह का नाम जिसे हिंदी में यीशु भी कहते हैं।

ईसा को हीब्रू में येहोशुआ कहते थे। ग्रीक में इसकी स्पेलिंग बदलकर हो गई Ie.sous और लैटिन में हुई Ie.sus (दोनों का उच्चारण येज़ूस)। जब यह शब्द अंग्रेज़ी में आया तो समय के साथ इसका उच्चारण भी बदला और स्पेलिंग भी। 1683 में I की जगह J ने ले ली और हीब्रू का येहोशुआ अंग्रेज़ी में हो गया Je.sus (जीज़स)। जीज़स की ही तरह अंग्रेज़ी में ऐसे कई नाम हैं जो J से शुरू होते हैं लेकिन हीब्रू या अरबी में ‘य’ का उच्चारण है। जैसे Ja.cob और याक़ोब/याक़ूब, Jo.seph और योसेफ़/यूसुफ़।

येहोशुआ का जीज़स कैसे बना, इसके बारे में और विस्तार से जानने की रुचि हो तो नीचे व़िडियो देख सकते हैं।

N से पहले चुप हो जाता है K

अब चलते हैं K की ओर। K के साथ भी कोई ख़ास दिक्कत नहीं हैं। इसका उच्चारण ‘क’ है। हाँ, कहीं-कहीं यह ख़ामोश हो जाता है। जैसे N से पहले। कुछ उदाहरण देखिए :

शब्दउच्चारणअर्थ
Knowनोजानना
Kneeनीघुटना
Knifeनाइफ़चाकू
Knockनॉकखटखटाना
Knotनॉटगाँठ
Knobनॉबमूठ

आप सोचते होंगे, जब K का उच्चारण होना ही नहीं है तो फिर इन शब्दों में K लगाया ही क्यों जाता है। आपका सवाल सही है और जवाब यह है कि दरअसल 17वीं शताब्दी से पहले ऐसे शब्दों में ‘क’ का उच्चारण होता था यानी Knee को क्नी बोला जाता था। लेकिन K और N को एकसाथ (क्न) बोलने में दिक़्क़त आने के कारण अंग्रेज़ी में यह गायब हो गया। जर्मन भाषा में अभी भी घुटनों के लिए जो शब्द इस्तेमाल होता है, वह है Knie और इसका उच्चारण वे क्नी करते हैं, न कि नी। वैसे कोई पूछ सकता है कि जब जर्मनों को क्न बोलने में समस्या नहीं है तो अंग्रेज़ों को क्यों है? हम भारतीय भी आसानी से क्नी बोल सकते हैं। नहीं क्या?

माफ़िक़ से पहले L ख़ामोश

अब हम आते हैं L पर। L का भी एक ही उच्चारण है ‘ल’ और यह भी कुछ मौक़ों पर ख़ामोश हो जाता है, ख़ासकर F, K और M (याद रखें – माफ़िक़) तथा कभी-कभी D से पहले। लेकिन हमेशा नहीं। पहले वैसे कुछ उदाहरण देखिए जहाँ यह ख़ामोश हो जाता है, फिर उन शब्दों का ज़िक्र जहाँ यह अपनी आवाज़ पा लेता है :

शब्दउच्चारणअर्थ
Calfकाऽफ़बछड़ा
Halfहाऽफ़आधा
Chalkचॉऽकखड़िया मिट्टी
Walkवॉऽकचलना
Talkटॉऽकबात करना
Folkफ़ोकलोक
Palmपाऽमहथेली
Calmकाऽमशांत
CouldकुडCan का p.t.
WouldवुडWill का p.t.

जैसा कि ऊपर कहा, M, F और K से पहले L हमेशा चुप नहीं रहता। मसलन Wolf (वूल्फ़), Gulf (गल्फ़), Film (फ़िल्म) Helm (हेल्म), Bulk (बल्क), Silk (सिल्क) जैसे बीसियों शब्द हैं जहाँ L का बाक़ायदा उच्चारण होता है।

कुछ भाषाओं में ‘ल’ की ध्वनि है ही नहीं जैसे जापानी में। अब उनको कोई ऐसा शब्द बोलना होता है जिसमें ‘ल’ हो तो बड़ी मुश्किल होती है। दूसरे जापानी में हर व्यंजन के बाद स्वर होना ज़रूरी है। इस कारण McDonald’s का जापानी उच्चारण हुआ — मैकुदोनारूदो!

अगर McDonalds के इस जापानी उच्चारण पर आपके होंठों पर मुस्कान आ रही है तो उसे रोक दीजिए। हम हिंदीवाले  भी कई ध्वनियों को नहीं बोल पाते। मराठी का ळ बोलकर दिखाइए। बाळासाहब ठाकरे और लोकमान्य तिळक में जो ळ है, उसमें हम सुविधा के लिए ‘ल’ बोल देते हैं लेकिन मराठी का ‘ळ’ हिंदी के ‘ल’ से बहुत अलग है। इसी तरह DMK या AIADMK के नामों में जो आख़िरी शब्द है, उसे हम कषगम, कड़गम, कझगम —  न जाने क्या-क्या नहीं लिखते लेकिन सही उच्चारण न लिख पाते हैं, न ही बोल पाते हैं।

कहने का मतलब यह कि किसी भी भाषा में सारी ध्वनियाँ नहीं हैं। हिंदी में भी नहीं है और अंग्रेज़ी में भी नहीं। हमारी कोशिश बस यही होनी चाहिए कि हम हर शब्द की निकटतम ध्वनि तक पहुँच सकें। इस क्लास और इस क्लास पर बनी किताब ‘आलिम सर की इंग्लिश क्लास’ का भी यही मक़सद है।

इस क्लास का सबक़

J, K और L के उच्चारणों में कोई जटिलता नहीं है। J का ‘ज’, K का ‘क’ और L का ‘ल’ उच्चारण होता है। J को पहले ‘य’ के उच्चारण के लिए इस्तेमाल किया जाता था। कई भाषाओं में आज भी इसका उच्चारण ‘य’ है। K और L कई शब्दों में साइलंट होते हैं। K साइलंट होता है N से पहले जबकि L कुछ शब्दो में F, M और K से पहले साइलंट होता है। D से पहले भी L कभी-कभार साइलंट हो जाता है जैसे Could, Would आदि में लेकिन अधिकतर शब्दों में उसका उच्चारण होता है जैसे Cold (कोल्ड), Shield (शील्ड), Sol.dier (सोल्ज) आदि।

अभ्यास

अंग्रेज़ी के साइलंट अक्षरों के सम्मान में इस क्लास में आप भी साइलंट हो जाएँ यानी कोई अभ्यास न करें और अगली क्लास की ओर बढ़ जाएँ।

चलते-चलते

Lieu.ten.ant (लेफ़्टेनंट) एक बहुत ही परेशान करनेवाला शब्द है क्योंकि इसकी स्पेलिंग कुछ कहती है, इसका उच्चारण कुछ और है। यह शब्द Lieu से आया है जिसका मतलब है किसी के बदले में और Lieu.ten.ant का मतलब हुआ वह व्यक्ति जो किसी और के बदले काम करता हो। दूसरे शब्दों में किसी सीनियर का सब्स्टिट्यूट। जैसे Lieu.ten.ant Gen.er.al का मतलब है Gen.er.al से एक पद नीचे। अब इसका उच्चारण लेफ़्टेनंट क्यों है, इसके बारे में एक्सपर्ट्स की एक राय नहीं है। वैसे अमेरिकी इसे लूटेनंट ही बोलते हैं।

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