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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

46. ‘इन्कार’ की जगह ‘मना’ लिखना सख़्त मना है

बच्ची ने दूध पीने से ‘मना’ कर दिया, यह वाक्य सही है या ग़लत है? ‘मना’ को मैंने उद्धरण चिह्नों के भीतर दिया है ताकि आपको पता चल जाए कि ध्यान किस शब्द पर देना है। अगर आपको लगता है कि यह ग़लत है तो आगे पढ़ने की ज़रूरत नहीं है। अगर आपको लगता है कि यह वाक्य सही है तो आगे पढ़ें।

जब मैंने फ़ेसबुक पर यही सवाल पूछा तो 60% ने कहा कि यह वाक्य सही है, 40% ने कहा कि ग़लत है। उससे एक साल पहले इसी शब्द पर एक और मंच पर किए गए पोल में क़रीब-क़रीब यही परिणाम आया था। उसमें 59% लोगों ने ‘ना’ कहने के अर्थ में मना के इस्तेमाल को सही बताया था और 41% ने ग़लत।

यह वाक्य ग़लत है। ग़लत इसलिए है कि इसमें ‘मना’ शब्द का अशुद्ध इस्तेमाल हुआ है। मना करने का अर्थ होता है ‘किसी और को कोई काम करने से रोकना’। ख़ुद जब दूसरों के निर्देशानुसार कोई काम नहीं करते हैं तो उसके लिए शब्द है ‘इन्कार करना’। सही वाक्य यह होता – बच्चे ने दूध पीने से ‘इन्कार’ कर दिया। नीचे चित्र में देखें दोनों शब्दों के अर्थ।

आपने बग़ीचों में यह साइनबोर्ड लगा देखा होगा – बग़ीचे में फूल तोड़ना मना है, कुत्ता घुमाना मना है, फ़ुटबॉल खेलना मना है। इसी तरह देखा होगा – गेट के सामने गाड़ी पार्क करना मना है या रेलवे स्टेशनों पर लिखा देखा होगा – यहाँ सिगरेट पीना मना है। इन सभी वाक्यों में मना किसको किया जा रहा है? बग़ीचे में आने वालों को, गाड़ी पार्क करने वालों, सिगरेट पीने वालों को यानी ‘दूसरों’ को।

दो पंक्तियों में इस अंतर को यूँ समझ सकते हैं –

  • मना का अर्थ है किसी को कोई काम करने से रोकना।
  • इन्कार का अर्थ है किसी के कहे अनुसार काम न करना।

मना और इन्कार के एक ही वाक्य में प्रयोग से इनका अर्थ और स्पष्ट हो जाएगा –

  1. पुलिस ने आधी रात को तेज़ म्यूज़िक बजाने से मना किया लेकिन नशे में धुत्त बरातियों ने पुलिस का आदेश मानने से इन्कार कर दिया।
  2. फ़ैक्ट्री के 100 मीटर के दायरे में मीटिंग करना मना था लेकिन हड़ताली मज़दूरों ने आदेश मानने से इन्कार करते हुए फ़ैक्ट्री के गेट पर नारे लगाए।

मना का विकल्प वर्जित; इन्कार का विकल्प?

मना (मन्अ) और इन्कार, ये दोनों अरबी के हैं और फ़ारसी>उर्दू के मार्फ़त हिंदी में आए हैं। मैं सोचता हूँ कि यदि हिंदी ने ये दोनों विदेशज शब्द नहीं अपनाए होते तो इन भावों के लिए हम क्या शब्द इस्तेमाल करते!

मना के लिए तो मुझे संस्कृत का शब्द मिल गया ‘वर्जना’ जो मना से बने मनाही का ही अर्थ देता है।

इसके लिए संस्कृत में कुछ और शब्द हैं जैसे ‘निषेध’ और ‘वारण’। निषेध और निषिद्ध से तो हम परिचित हैं परंतु वारण से शायद नहीं। बांग्ला में यह शब्द चलता है – वहाँ यह बारन बोला जाता है।

इन्कार वाले भाव के लिए संस्कृत से आयातित या हिंदी का स्वनिर्मित क्या शब्द है, यह मुझे याद नहीं आया। मैंने सोचा तो पाया कि यदि इन्कार शब्द से बचते हुए हमें ऐसे भाव व्यक्त करने हों तो हमें पूरा वाक्य ही बदल देना होगा।

मसलन हमारे पास कोई निमंत्रण आया हो और हम उसे स्वीकार नहीं कर पा रहे तो हमें लिखना होगा – मैंने उनका निमंत्रण स्वीकार करने में ‘असमर्थता’ जताई। इसी तरह अगर कोई हीरो किसी फ़िल्म का प्रस्ताव स्वीकार न करे तो कहना होगा – हीरो ने प्रस्ताव ठुकरा दिया। लेकिन ठीक-ठीक इन्कार के पर्याय के रूप में कोई शब्द नहीं दिखा, एक ‘ना करना’ के सिवाय। जैसे ऊपर के दो वाक्यों को हम ऐसे भी लिख सकते हैं – मैंने निमंत्रण को ‘ना’ कर दिया या हीरो ने फ़िल्म के ऑफ़र को ‘ना’ कर दिया।

इस ‘ना’ कर दिया के विकल्प के रूप में ही अधिकतर लोग इन्कार के बजाय ‘मना’ कर दिया का इस्तेमाल करते हैं। मना शब्द वैसे भी ना से बहुत ज़्यादा मिलता-जुलता है – ना करना की जगह मना करना।

मना और इन्कार में जो अंतर है, वह अंग्रेज़ी में भी दिखता है। वहाँ दूसरों को किसी काम करने से रोकने यानी मना करने के लिए FORBID शब्द है – Parking in front of the gate is FORBIDDEN। ख़ुद कोई काम न करने यानी इन्कार करने के लिए वहाँ REFUSE या DECLINE शब्द हैं। He REFUSED to pay the huge bill या She DECLINED the offer of a meager compensation.

इनकार लिखें या इन्कार… या इंकार?

ऊपर चित्र में आपने देखा होगा कि शब्दकोश में इनकार लिखा हुआ है यानी ‘न’ पूरा है जबकि मैंने इस पोस्ट में इन्कार लिखा है। इससे आपके मन में सवाल उठ सकता है कि सही वर्तनी क्या है – इनकार या इन्कार?

पहले मैं भी इनकार ही लिखता था। मैं समझता था कि उर्दू में सारे अक्षर पूरे ही होते हैं, आधा अक्षर होता ही नहीं सिवाय उस स्थिति में जब एक ही व्यंजन दो बार आया हो जैसे अब्बा या इज़्ज़त। लेकिन हाल ही में मुझे पता चला कि उर्दू में भी साकिन नामक चिह्न होता है जिसका वही अर्थ होता है जो हिंदी में हल् चिह्न का है। जैसे खड्ग से हमें पता चलता है कि ड के साथ स्वर नहीं है, वैसे ही उर्दू में भी किसी व्यंजन के ऊपर साकिन नामक चिह्न लगाने से यही अर्थ निकलता है कि इस ध्वनि के साथ स्वर नहीं है। अरबी में भी यह चिह्न है जिसे सकून कहते हैं।

लेकिन मुश्किल यह है कि उर्दू (और शायद अरबी-फ़ारसी में भी) यह चिह्न अमूमन लगाया नहीं जाता जिससे उर्दू नहीं जानने वालों को भ्रम हो सकता है कि इस शब्द के साथ स्वर है या नहीं। मैंने रेख़्ता के ऑनलाइन शब्दकोश से उर्दू में लिखा यह शब्द सुबह – صبح – कॉपी-पेस्ट किया है। इसमें ब यानी बे (ب) पर साकिन नहीं लगा हुआ है जिससे हम इसे सुब्ह की जगह सुबह भी पढ़ सकते हैं। और तो और, इसमें उ की (कॉमा जैसी दिखने वाली) मात्रा जिसे पेश कहा जाता है, वह भी नहीं है। सो जो यह शब्द नहीं जानता हो, वह इसे सबह भी पढ़ सकता है।

यह सही है कि इन्कार/इनकार (انکار) का मामला सुब्ह/सुबह जैसे शब्दों से अलग है क्योंकि न यानी नून (ن) के ऊपर साकिन (हल्) का चिह्न लगाने या नहीं लगाने से इसके उच्चारण में कोई अंतर नहीं पड़ता। लेकिन इससे एक ही शब्द के दो लिखित रूप चल निकलने का ख़तरा बना रहता है। हिंदी में वही हुआ है। इनकार भी चल रहा है और इन्कार भी। कुछ लोग इंकार भी लिखते हैं जो कि बिल्कुल ही ग़लत है क्योंकि पंचमाक्षर के नियम के अनुसार ‘इ’ पर लगे अनुस्वार के बाद ‘क’ की ध्वनि होने से इसका उच्चारण इङ्कार (इंक्+आर) हो जाएगा जो कि इन्+कार के इसके मूल उच्चारण से बिल्कुल ही अलग है।

(किसी अनुस्वार की ध्वनि के बारे में पंचमाक्षर का नियम क्या है, यह जानने के लिए मेरा यह क्लास पढ़ सकते हैं।

मैंने मद्दाह के शब्दकोश में इन्कार ही देखा है (देखें चित्र) जिसका अर्थ यह है कि इसमें न के साथ हल् (साकिन) है। इसीलिए पोस्ट में इन्कार लिखा है।

इस विषय में उर्दू-फ़ारसी-अरबी का कोई जानकार हमारी समझ को बढ़ा सके तो स्वागत है। संस्कृत का जानकार इन्कार का कोई पर्याय बताए तो भी हमारा ज्ञान बढ़ेगा।

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2 replies on “46. ‘इन्कार’ की जगह ‘मना’ लिखना सख़्त मना है”

“Inkaar” ya “naa karna” ka paryayvaachi kya “aswikaar” karna nahin hoga sir? Jaise maine unkaa nimantran aswikaar kar diya ? Jaanna chaahta hoon kyunki aapne likha hai oopar ki hindi mein aisa koi shabd yaad nahin aata. Kripaa kar samjhaayein.

नमस्ते। आपने सही कहा कि इसके लिए अस्वीकार शब्द का इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन ‘अस्वीकार’ अपने-आपमें कोई स्वतंत्र शब्द नहीं है। वह स्वीकार में ‘अ’ उपसर्ग लगाकर बनाया गया है। मैं इनकार की तरह का एक स्वतंत्र शब्द खोज रहा था जो अभी तक नहीं मिला है।

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