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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

96. नए साल पर शुभकामनाएँ दी जाती हैं या शुभकामनायें?

किसी उत्सव या ख़ुशी के मौक़े पर शुभकामना संदेश भेजते समय क्या आपको यह दुविधा होती है कि सही शब्द ‘शुभकामनाएँ’ है या ‘शुभकामनायें’? यदि होती है तो यह क्लास आपके लिए फ़ायदेमंद हो सकती है। दोनों में से कौनसा प्रयोग सही है और क्यों सही है, यह जानने के लिए आगे पढ़ें।

सही शब्द शुभकामनाएँ है या शुभकामनायें, इसका जवाब किसी शब्दकोश में नहीं मिल सकता क्योंकि शब्दकोश बहुवचन के रूप नहीं बताते। इसका जवाब हमें व्याकरण की किताबों में मिल सकता है। परंतु व्याकरण की सबसे प्रतिष्ठित ग्रंथ कामताप्रसाद गुरु का ‘हिंदी व्याकरण’ इसके बारे में कोई रोशनी नहीं डालता।

कामताप्रसाद गुरु अपनी किताब ‘हिंदी व्याकरण’ में बहुवचन बनाने के नियम बताते समय लिखते हैं कि इ-ईकारांत और इया से अंत होने वाले स्त्रीलिंग शब्दों के अलावा बाक़ी सभी स्त्रीलिंग शब्दों का बहुवचन बनाते समय शब्द के बाद ‘एँ’ लगाया जाता है। इस हिसाब से शुभकामना जो स्त्रीलिंग है मगर इ-ईकारांत नहीं है, न ही उसके अंत में इया है, उसके भी अंत में ‘एँ’ लगना चाहिए (देखें चित्र)।

शुभकामना भी ऊपर के चित्र में दिए गए उदाहरणों लता, कथा और माता की तरह आकारांत है और स्त्रीलिंग भी है, इसलिए उसका भी बहुवचन बनाते समय अंत में ‘एँ’ जुड़ना चाहिए। इस हिसाब से शुभकामनाएँ ही सही है।

लेकिन नहीं। गुरुजी इसके साथ में वे यह भी लिखते हैं कि कुछ लोग विकल्प से इन शब्दों के साथ ‘यें’ भी लिखते हैं और वे इसे ग़लत नहीं बताते (देखें चित्र)।

अब इसका क्या यह मतलब हुआ कि शुभकामनाएँ और शुभकामनायें दोनों का प्रयोग सही है? मेरे हिसाब से नहीं। कारण यह कि गुरुजी ने तब के प्रचलन के हिसाब से दोनों को सही बताया है लेकिन यदि व्याकरण और उच्चारण दोनों की दृष्टि से देखा जाए तो शुभकामनाएँ ही सही होगा। क्यों, यह हम नीचे जानते हैं।

सबसे पहले हमें वह सिद्धांत समझना होगा जो किसी संज्ञा शब्द का बहुवचन बनाते समय अपनाया जाता है। वह सिद्धांत या नियम समझ में आ गया तो हम तय कर पाएँगे कि शुभकामना के बाद ‘एँ’ लगना चाहिए या ‘यें’।

हिंदी में बहुवचन बनाने के लिए पाँच तरह के प्रत्यय लगते हैं – ए, एँ, आँ, ओं और ओ। आख़िर के दो का इस क्लास से ज़्यादा लेना-देना नहीं है, सो उनको छोड़ते हैं और शुरुआती तीन की बात करते हैं।

1. ‘ए’ प्रत्यय आकारांत पुल्लिंग शब्दों में लगता है। जैसे लड़का का लड़के, रास्ता का रास्ते आदि। दोनों में अंतिम स्वर ‘आ’ की जगह ‘ए’ हो गया है।

2. ‘एँ’ प्रत्यय इ, ई और इया से अंत होने वाले स्त्रीलिंग शब्दों के अलावा बाक़ी सभी स्त्रीलिंग शब्दों में लगता है जैसे बहन का बहनें, रेखा का रेखाएँ, वस्तु का वस्तुएँ, गौ का गौएँ आदि (देखें चित्र)। शुभकामना भी इसी समूह में आता है (आकारांत स्त्रीलिंग)। इस हिसाब से शुभकामना का बहुवचन शुभकामनाएँ ही होना चाहिए।

लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुँचने से पहले हमें अगला पॉइंट भी देख लेना चाहिए जहाँ अंत में ‘आँ’ की जगह ‘याँ’ आ रहा है।

3. ‘आँ’ प्रत्यय इ, ई और इया से अंत होने वाले स्त्रीलिंग शब्दों में लगता है। जैसे छवि से छवियाँ, लड़की से लड़कियाँ, गुड़िया से गुड़ियाँ आदि।

आप सोच रहे होंगे कि ऊपर पॉइंट नंबर 3 में मैं बात तो ‘आँ’ प्रत्यय की हो रही है लेकिन उदाहरणों में ‘याँ’ प्रत्यय दिखा रहा हूँ जैसे छवि का छवियाँ, लड़की का लड़कियाँ। अगर लड़की का बहुवचन बनाते समय ‘आँ’ प्रत्यय लग रहा है तो उसका बहुवचन लड़किआँ होना चाहिए, न कि लड़कियाँ जैसा कि दुनिया लिखती है और मैंने भी लिखा है। इसी से जुड़ा अगला सवाल यह कि जब लड़की के मामले में ‘आँ’ प्रत्यय ‘याँ’ में बदल सकता है तो शुभकामना के मामले में भी ‘एँ’ प्रत्यय ‘यें’ में क्यों नहीं बदल सकता।

बात में दम है।

चलिए, नीचे समझते हैं कि क्यों लड़किआँ का लड़कियाँ हो जाता है लेकिन शुभकामनाएँ का शुभकामनायें नहीं हो सकता।

दरअसल जब छवि या लड़की का बहुवचन बनाया जाता है तो उसके बाद नियमानुसार ‘आँ’ प्रत्यय ही लगता है। यानी तकनीकी तौर पर छवि का बहुवचन होगा छविआँ और लड़की का लड़किआँ।

परंतु ‘इ’ या ‘ई’ की मात्रा के बाद ‘आँ’ का उच्चारण मुश्किल होता है और जो ध्वनि मुँह से निकलती है, वह ‘आँ’ न होकर ‘याँ’ हो जाती है। इसे व्याकरण की भाषा में ‘श्रुति य’ कहते हैं। यानी ‘य’ की वह ध्वनि जो न शब्द में है, न ही प्रत्यय में लेकिन बोलते समय सुनाई देती है। चूँकि सुनाई देती है, इसलिए इसका नाम पड़ गया ‘श्रुति य’।

इ और ई के मामले में यह प्रवृत्ति हम स्वर संधि के दौरान भी देखते हैं जब ‘इ’ या ‘ई’ की मात्रा से अंत होने वाले शब्द के बाद ‘इ-ई’ के अलावा कोई अन्य स्वर जैसे ‘अ’, ‘आ’ आदि आता है तो ‘इ’ की मात्रा ‘य’ में बदल जाती है। उदाहरण – 

  • अति+अंत=अत्यंत।
  • अति+अधिक=अत्यधिक।
  • अति+आचार=अत्याचार।
  • अभि+उदय=अभ्युदय।

दोनों मामले एक समान नहीं हैं क्योंकि छवियाँ या लड़कियाँ के मामलों में कोई संधि नहीं हो रही परंतु, जैसा कि ऊपर कहा, प्रवृत्ति एक जैसी है। दोनों मामलों में इ-ई के बाद अन्य स्वर आने पर ‘य’ की ध्वनि निकल रही है।

ऐसा क्यों है, इसका ठीक-ठीक जवाब योगेंद्रनाथ मिश्र जैसे भाषा-वैज्ञानिक ही दे सकते हैं। जहाँ तक मेरी समझ है, मुझे ‘इ-ई’ तथा ‘य’ के बीच केवल एक रिश्ता नज़र आ रहा है और वह यह कि दोनों तालव्य हैं यानी दोनों का उच्चारण जीभ के तालु को छूने से होता है। सो हो सकता है, जब जीभ छवि और लड़की के अंत में मौजूद ‘इ और ई’ बोलने के लिए तालु के पास जाती हो और उसके बाद ‘आँ’ बोलने का प्रयास करती हो तो अपने-आप ‘य’ की ध्वनि उत्पन्न हो जाती हो क्योंकि ‘य’ भी ‘इ-ई’ की तरह तालव्य है। इस कारण जो ध्वनि मुँह से निकलती है और सुनाई पड़ती है, वह ‘आँ’ की जगह हो जाती है ‘याँ’। फलतः लड़किआँ हो जाता है लड़कियाँ।

अब अगला और अंतिम प्रश्न यह कि जिस तरह लड़किआँ लड़कियाँ हो जाता है, क्या वैसे ही शुभकामनाएँ भी शुभकामनायें में बदल सकता है। बिल्कुल बदल सकता है बशर्ते शुभकामना जैसे आकारांत स्त्रीलिंग शब्दों में भी हम वैसी ही प्रवृत्ति देखें जैसी लड़की के मामले में देखी अर्थात् बोलना चाहते हैं ‘आँ’, मुँह से निकल रहा है ‘याँ’, बोलना चाहते हैं ‘एँ’, मुँह से निकल रहा है ‘यें’।

क्या वाक़ई ऐसा होता है, इस बात की परीक्षा आप स्वयं कर सकते हैं। आप लड़किआँ बोलकर देखिए। आपके मुँह से लड़कियाँ का उच्चारण निकलेगा। आप लड़किओँ बोलकर देखिए, आपके मुँह से लड़कियों निकलेगा।

अब आप शुभकामनाएँ बोलकर देखिए। क्या यहाँ भी ‘एँ’ की जगह ‘यें’ की आवाज़ निकल रही है? मेरे ख़्याल से नहीं। आप साफ़-साफ शुभकामनाएँ बोल पा रहे होंगे। यानी यहाँ ‘य’ जैसी कोई ध्वनि पैदा नहीं हो रही। आप यह प्रयोग अन्य आकारांत शब्दों जैसे रेखाएँ, दिशाएँ, विपदाएँ आदि के साथ भी कर सकते हैं। 

अब आप एक विपरीत प्रयोग करें और शुभकामनायें बोलने का प्रयास करें। आप महसूस करेंगे कि शुभकामनाएँ के मुक़ाबले शुभकामनायें बोलने में अधिक परिश्रम है, परेशानी है, जीभ का ज़्यादा तकलीफ़ है।

निष्कर्ष यह कि छविआँ और लड़किआँ की जगह छवियाँ और लड़कियाँ हम इसलिए बोलते और लिखते हैं कि छविआँ और लड़किआँ बोलने के प्रयास में हमारे मुँह से अनजाने में ही ‘य’ की ध्वनि निकलती है लेकिन शुभकामनाएँ या ऐसे ही अन्य आकारांत स्त्रीलिंग शब्द (जैसे रचनाएँ, दिशाएँ, महिलाएँ आदि) बोलते समय कोई ‘य’ की ध्वनि नहीं निकलती; हम आसानी से और बिना परेशानी के ‘एँ’ का उच्चारण कर पाते हैं।

इसलिए शुभकामनायें ग़ैरज़रूरी और ग़लत है।

ऊपर मैंने जिस ‘श्रुति य’ की बात की है, वह खाया, पिया आदि शब्दों में भी सुनाई देता है। इन दोनों शब्दों में मूल प्रत्यय ‘आ’ है। इसलिए होना चाहिए खाआ (खा+आ) और पिआ (पी+आ) लेकिन हो जाता है खाया और पिया। इसके बारे में मैंने क्लास 48 में विस्तृत चर्चा की है। रुचि हो तो पढ़ सकते हैं। लिंक नीचे दिया हुआ है –

 

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