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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

97. क्या बेचता है झूठों का यह सरदार – गप या गप्प?

गप सही है या गप्प? यह सवाल बहुत सारे लोगों को परेशान करता है। कारण, यदि गप सही है तो गप हाँकने वाले को गप्पी क्यों कहा जाता है। उधर, अगर गप्प सही है तो गपशप क्यों होता है? आज की क्लास में इन्हीं सवालों का जवाब देने की कोशिश की है। गप और गप्प में कौनसा सही है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

जब मैंने गप्प और गप पर फ़ेसबुक पोल करने का निश्चय किया तो मुझे आभास था कि मुक़ाबला क़रीबी होगा। वही हुआ। 56% ने गप के पक्ष में वोट किया, 44% ने गप्प के हक़ में। मैं यह भी समझ रहा था कि कई वोटर अपने पसंदीदा विकल्प पर वोट करते हुए भी अपने चयन को लेकर पूरी तरह निश्चित नहीं होंगे क्योंकि गप्प और गप एक ही सिक्के के दो पहलुओं की तरह हैं – कहीं गप्प दिखता है, कहीं गप। मसलन गपोड़ और गप्पी का एक ही अर्थ है लेकिन गपोड़ में गप का इस्तेमाल हुआ है जबकि गप्पी में गप्प का। इन दोनों रूपों को लेकर भ्रम कितना अधिक है, यह हिंदी शब्दसागर में भी नज़र आता है जिसमें ‘गपोड़’ का अर्थ दिया है – ‘गप्प’ हाँकने वाला और ‘गप्पी’ का अर्थ दिया है – ‘गप’ मारने वाला (देखें चित्र)।

क्या हम इसका मतलब यह निकालें कि दोनों शब्द सही हैं? चलिए, मान लेते हैं क्योंकि दोनों ही प्रचलन में हैं, लेकिन फिर भी यह सवाल तो बना ही रहता है कि पहले कौनसा शब्द बना होगा। आइए, फिर से शब्दकोश का सहारा लेते हैं।

हिंदी शब्दसागर के अनुसार यह शब्द कल्पना (कल्पनम्) के कल्प से बना है या फिर जल्प (जल्पः) से (देखें चित्र)।

दोनों संस्कृत के शब्द हैं। कल्पना का अर्थ तो आप जानते ही हैं, बताने की ज़रूरत नहीं। उधर जल्प का अर्थ है – बातचीत, कथन, बकवास, झूठी बात आदि। अब इन दोनों ही स्रोतों से पहले क्या बना – गप्प या गप, यह हम नीचे समझते हैं।

  • कल्प>कप्प>गप्प।
  • जल्प>गल्प>गप्प।

यानी चाहे कल्प से बना हो या जल्प से, जो शब्द पहले बना था, वह था गप्प। यही गप्प आगे जाकर बोलने की सहूलियत के चलते बन गया गप। लेकिन गप्प भी साथ-साथ चलता रहा, बल्कि कुछ शब्दों में गप्प वाला रूप ही चल रहा है जैसे गप्पी।

  • गप से बने शब्द – गपोड़, गपोड़ा, गपशप, गपड़चौथ, गपबाज़।
  • गप्प से बने शब्द – गप्पी, गप्पाष्टक।

रोचक बात यह है कि आप ‘गप’ को सही मानते भी हों और वही बोलते भी हों लेकिन कुछ प्रयोगों में ‘गप्प’ ही चलेगा। जैसे वह दो घटों से ‘गप्पें’ मार रहा है। यहाँ ‘गपें’ मार रहा है, यह हो ही नहीं सकता। यह कुछ-कुछ वैसे ही है कि ‘चुप’ से ‘चुप्पी’ होता है, ‘चुपी’ नहीं। ऐसा क्यों है, यह भाषा-वैज्ञानिक ही बेहतर बता सकते हैं।

‘क’ और ‘ज’ की ध्वनियों का ‘ग’ में परिवर्तन

ऊपर आपने देखा कि कैसे कोशकार ने कल्प और जल्प से गप्प बनने की संभावना जताई है। कोई सोच सकता है कि आख़िर जल्प या कल्प कैसे गप्प में बदल गया होगा। कहीं यह भी तो कोई गप्प तो नहीं है! लेकिन नहीं, ऐसा नहीं है। कारण, ‘क’ या ‘ज’ का ‘ग’ में बदलना एक स्वाभाविक भाषाई प्रवृत्ति है जो हमें और भी शब्दों में दिखती है। नीचे कुछ उदाहरण देखें।

  • क के ग में बदलने के उदाहरण – भक्त का भत, युक्ति का जुत, शा का सा, शकुन का सगुन, मर का मर आदि।
  • ज के ग में बदलने के उदाहरण तो संस्कृत में ही इतने भरे पड़े हैं कि हिंदी में अलग से खोजने की ज़रूरत नहीं है। जैसे संस्कृत में त्याजन भी है और त्याग भी, विभाजन भी है और विभाग भी, भोजन भी है और भोग भी, काक भी है और काग भी।

इसके अलाना ‘ज’ के ‘ग’ में परिवर्तन का सबसे बड़ा उदाहरण तो ‘ज्ञ’ है जिसका संस्कृत में मूल उच्चारण ज्यँ (ज्+ञ) था जो हिंदी में ग्यँ हो गया है। यानी ज्ञान का उच्चारण संस्कृत में ज्याँन था लेकिन हिंदी में ग्याँन हो गया है जिसे आम तौर पर ग्यान बोला जाता है। इसके अलावा रंज भी रंग में बदल गया। ऐसे और भी उदाहरण हो सकते हैं।

अंग्रेज़ी में ‘क’, ‘ग’ और ‘ज’ का रिश्ता

‘क’, ‘ग’ और ‘ज’ के रिश्ते की मज़ेदार कहानी हमें अंग्रेज़ी में भी मिलती है। इसमें जो C लेटर है, लैटिन में पहले वह ‘क’ और ‘ग’ दोनों ध्वनियों के लिए इस्तेमाल होता था। बाद में ‘ग’ की ध्वनि के लिए G बनाया गया जो आप देख ही सकते हैं कि C से कितना मिलता-जुलता है। इसी G का उच्चारण आगे चलकर कुछ शब्दों में (ख़ासकर E, I और Y से पहले) ‘ज’ हो गया, बाक़ी (A, O, U) से पहले ‘ग’ रहा। इस तरह G के दो-दो उच्चारण हो गए – ‘ग’ और ‘ज’। ऐसे कई शब्द हैं जहाँ एक ही शब्द में आपको G की दोनों ध्वनियाँ मिल जाएँगी। जैसे GAN.GES (गैंजीज़) – A से पहले ग, E से पहले ज। इसी तरह GOR.GEOUS (गॉर्जस) – O से पहले ग, E से पहले ज।

इसके बारे में मैंने अपनी किताब ‘आलिम सर की इंग्लिश क्लास’ में अलग से चर्चा की है। उस किताब की 81 क्लासें अपनी साइट पर अपलोड करने का काम इस साल 1 जनवरी से शुरू किया है ताकि वे क्लासें पढ़ने के लिए किसी को पैसे ख़र्च न करने पड़ें। लेकिन अपनी अन्य व्यस्तताओं के चलते वह काम धीमा चल रहा है। अब तक केवल दो क्लासें अपलोड हुई हैं जिनमें पहली क्लास बहुतों के काम की हो सकती है। इसमें मैंने बताया है कि कैसे A से एप्पल बताकर हमारे स्कूलों में अंग्रेज़ी शिक्षा की बुनियाद ही ग़लत रख दी जाती है। रुचि हो तो पढ़ सकते हैं।

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