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आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

31. ‘पशोपेश’ को लेकर किसी ‘पसोपेश’ या ‘पेशोपस’ में हैं?

दुविधा की स्थिति के लिए उर्दू का एक शब्द है जिसे पसोपेश भी लिखा जाता है और पशोपेश भी। सही है पसोपेश क्योंकि पस का मतलब है पीछे और पेश का मतलब है आगे। पसोपेश के अलावा एक और शब्द भी है – पेशोपस। क्या वह भी सही है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

पसोपेश और पशोपेश के सवाल पर हुए फ़ेसबुक पोल में 670 लोगों ने वोट किया और मुक़ाबला भी काफ़ी क़रीब का रहा। 55% ने कहा – पशोपेश, 55% के अनुसार सही है पसोपेश। इससे पहले जिस मंच पर यह सवाल पूछा था, वहाँ भी लगभग यही परिणाम आया था। 54% पशोपेश के समर्थक और 46% पसोपेश के। बहुमत दोनों ही मामलों में पशोपेश को ही सही मानता था।

सही शब्द क्या है, इसका पता लगाना आसान है अगर किसी को शब्दों के भीतर झाँकने की आदत हो। पसोपेश बना है पस-ओ-पेश से। पस का मतलब पीछे और पेश का मतलब आगे। सो पसोपेश का अर्थ हुआ आगे जाएँ या पीछे, यह न सूझना। दूसरे शब्दों में दुविधा की स्थिति।

उर्दू में बैकग्राउंड को कहते हैं पसमंज़र (पीछे का दृश्य)। इसी तरह पेशगी शब्द सुना होगा – जो रक़म आगे यानी पहले दे दी जाए या पेशक़दमी जिसका अर्थ है आगे बढ़ना। साहिर लुधियानवी का वह मशहूर गीत याद है न – चलो इक बार फिर से अजनबी बन जाएँ हम दोनों। उसके एक अंतरे में इस शब्द का इस्तेमाल है – तुम्हें भी कोई उलझन रोकती है पेशक़दमी से…

पिछले पोल के समय ही मुझे एक और शब्द का पता चला था – पेशोपस (पेश-ओ-पस)। इसका भी वही मतलब है जो पसोपेश का है; बस पेश पहले आ गया है और पस बाद में।

यह शब्द हिंदी में बहुत कॉमन नहीं है और शायद इसी अज्ञानता के चलते हिंदी पत्रकारिता की दो शख़्सियतों में इसपर भारी बहस छिड़ गई।

हुआ यूँ कि विख्यात संपादक-लेखक ओम थानवी ने कहीं पेशोपस लिख दिया था और आकाशवाणी में सह-निदेशक रह चुके लेखक-पत्रकार राजेंद्र उपाध्याय का कहना था कि उन्होंने ग़लत लिखा है। तब थानवी जी ने उन्हें बताया कि फ़ारसी में यही शब्द चलता है। उन्होंने यह भी बताया कि पस और पेश का क्या अर्थ है और समझाया कि जैसे रातदिन और दिनरात का एक ही अर्थ है, वैसे ही पसोपेश (पस-ओ-पेश) और पेशोपस (पेश-ओ-पस) का एक ही अर्थ है। आप यहाँ राजेंद्र उपाध्याय और थानवी जी का संवाद पढ़ सकते हैं।

क्या पसोपेश और पेशोपस की खिचड़ी ने ही पशोपेश शब्द को जन्म दिया या पेश में ‘श’ होने के कारण कुछ लोगों ने पस में भी ‘श’ कर दिया, कहना मुश्किल है। लेकिन यह कहने में कोई मुश्किल नहीं है कि आप पसोपेश भी बोल सकते हैं और पेशोपस भी, मगर पशोपेश तो शत-प्रतिशत ग़लत इस्तेमाल है।

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