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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

161. आप दूसरों का ‘मखौल’ उड़ाते हैं या ‘माखौल’?

मज़ाक उड़ाने के अर्थ में मखौल और माखौल दोनों चलते हैं। लेकिन कौनसा ज़्यादा प्रचलित है, यह जानने के लिए जब हमने फ़ेसबुक पर पोल किया तो 70% से अधिक लोगों ने कहा – मखौल। क़रीब 30% के अनुसार सही है माखौल। दोनों में से सही क्या है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

मखौल और माखौल में सही क्या है, जानना आसान है क्योंकि शब्दकोशों में मखौल ही दिया हुआ है, माखौल किसी भी शब्दकोश में नहीं है। तो फिर माखौल शब्द इतना कैसे चल निकला कि आज दस में से तीन लोग उसे सही बता रहे है? यही नहीं, आजतक और ज़ी न्यूज़ जैसी वेबसाइटों के उपसंपादक भी मखौल के बजाय माखौल लिख रहे हैं (देखें चित्र)।

हिंदी की बड़ी वेबसाइटों में माखौल।

मैंने सोचा, कहीं ऐसा तो नहीं कि ‘आधीन’ व ‘तालाश’ की तरह कभी ‘माखौल’ भी प्रचलित रहा हो और धीरे-धीरे उसका प्रचलन कम होता गया हो। इसके लिए मैंने हिंदी शब्दसागर के शुरुआती (1925 और 1930) संस्करण देखे जिनकी पीडीएफ़ प्रतियाँ मेरे पास हैं। लेकिन वहाँ न तो मखौल था, न ही माखौल। हाँ, शब्दसागर के बाद के (1970) संस्करण में मुझे मखौल मिला। वहाँ माखौल नहीं है।

मैं अब तक समझता था कि मखौल अरबी-फ़ारसी परिवार का शब्द है लेकिन हिंदी शब्दसागर के अनुसार यह देशज शब्द है (देखें चित्र)। ऑक्सफ़र्ड का हिंदी-अंग्रेज़ी शब्दकोश इसे स्पेसिफ़िक तौर पर पंजाबी से आया बताता है और उसके अनुसार इसका अर्थ है – मज़ाक़ (देखें चित्र)। यानी हिंदी में भले ही मखौल खिल्ली का ही पर्याय लगता हो मगर पंजाबी में इसका अर्थ सामान्य हँसी-मज़ाक भी है।

हिंदी शब्दसागर मखौल को देशज बताता है।
ऑक्सफ़र्ड का शब्दकोश इसे पंजाबी से आया बताता है।

आपने देखा, मखौल और खिल्ली में कितना साम्य है। दोनों में ‘ख’ और ‘ल’ हैं और अर्थ और इस्तेमाल भी, कम-से-कम हिंदी में – एक-सा है। तो क्या खिल्ली मखौल का ही छोटा रूप है? पता नहीं। खिल्ली और खिलखिलाना में भी क्या कोई रिश्ता है? यह भी नहीं मालूम।

ऊपर मैंने तालाश शब्द लिखा है। आपमें से बहुतों को यह शब्द अजीब लग रहा होगा। मुझे भी लगा था जब मैंने यूट्यूब पर 1950-60 की किसी फ़िल्म में एक कलाकार को तालाश बोलते सुना। मन में द्वंद्व हुआ कि मैंने ग़लत सुना या उसने ग़लत बोला। मैंने रिवाइंड करके उस संवाद को फिर से सुना। वह बाक़ायदा तालाश ही बोल रहा था। मैंने सोचा, उस कलाकार का उर्दू का ज्ञान कम रहा होगा। लेकिन जब एक और फ़िल्म में मीना कुमारी के मुँह से तालाश शब्द सुना तो लगा कि मीना कुमारी ग़लत नहीं बोल सकतीं। आप जानते ही होंगे कि मीना कुमारी को साहित्य से गहरा लगाव था और वे ख़ुद भी एक शायरा थीं।

इसके बाद मैंने हिंदी और उर्दू के शब्दकोश तलाशे। हिंदी के कोशों में तो मुझे तालाश नहीं मिला लेकिन रेख़्ता के शब्दकोश में मिल गया (देखें चित्र)।

‘अ’ और ‘आ’ में कन्फ़्यूश्ज़न वाला एक और शब्द है – अनधिकृत और अनाधिकृत। सही क्या है, इसपर हम पहले चर्चा कर चुके हैं। अगर आप वह चर्चा मिस कर गए हों तो इस लिंक पर जाकर पढ़ सकते हैं।

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