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आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

168. गुल माने फूल, गुल माने गुलाब या गुल माने दोनों?

‘फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन’ में गुल का मतलब साफ़ है – फूल। लेकिन गुलक़ंद में गुल का मतलब क्या है – क्या कोई भी फूल या केवल गुलाब? और गुलाब में जो गुल है, उसका अर्थ क्या है? फिर एक शब्द है बिजली गुल होना। यहाँ गुल का क्या अर्थ है? और शोरग़ुल? आज की क्लास इसी गुल और ग़ुल शब्दों पर। रुचि हो तो पढ़ें।

जब मैंने फ़ेसबुक पर गुल के अर्थ के बारे में पोल किया 70% के विशाल बहुमत ने फूल के पक्ष में वोट किया। गुलाब के पक्ष में राय देने वालों की तादाद बहुत ही कम रही – 5%। लेकिन दोनों को सही बताने वालों की संख्या भी ठीकठाक रही – 25%।

गुल का अर्थ फूल बताने वालों की संख्या ज़्यादा होने का कारण फ़िल्मी गाने और ग़ज़लें हैं जिनमें गुल शब्द का इस्तेमाल हुआ है। जैसे 1. खिलते हैं गुल यहाँ,  2. एक था गुल और एक थी बुलबुल, 3. देखा एक ख़्वाब तो ये सिलसिले हुए, दूर तक निगाहों में हैं गुल खिले हुए आदि। कई लोगों ने तबस्सुम के मशहूर टीवी कार्यक्रम ‘फूल खिले हैं गुलशन-गुलशन’ का हवाला भी दिया जिससे यह स्पष्ट होता है कि गुल का अर्थ फूल ही है।

लेकिन गुल का अर्थ फूल ही नहीं होता, गुलाब भी होता है। गुल के दोनों अर्थ हैं – फूल और गुलाब (देखें चित्र)।

हिंदी शब्दसागर में गुल का अर्थ.

यानी गुल जातिवाचक संज्ञा भी है और व्यक्तिवाचक संज्ञा भी। गुलकंद में गुल का अर्थ गुलाब ही है। बल्कि गुलाब भी जो गुल है, वह भी rose के लिए ही है। गुल (Rose) और आब (Water) से मिलकर बना गुलाब। यानी गुलाब का मूल अर्थ Rose नहीं, Rosewater है। लेकिन जैसा कि कोशकार प्लैट्स कहते हैं, भारत में Rose के लिए गुल के बजाय गुलाब ही ज़्यादा चलने लगा (देखें चित्र)। इसी से बना गुलाबी शब्द जो उस फूल के हल्के लाल रंग का परिचायक है।

प्लैट्स के उर्दू शब्दकोश में गुलाब की व्युत्पत्ति और अर्थ।

गुल का एक और अर्थ है दीपक का जला हुआ काला हिस्सा। इसीलिए चिराग़ बुझने पर कहते हैं – चिराग़ गुल हो गया। चिराग़ की जगह बाद में बिजली ने ले ली लेकिन इस्तेमाल वही बना रहा और आज भी बिजली के चले जाने पर हम कहते हैं – बिजली गुल हो गई। गालों के गड्ढे को भी गुल कहते हैं।

गुल से मिलता-जुलता शब्द है ग़ुल जिसमें नुक़्ता लगा हुआ है। यह फ़ारसी शब्द है और ग़ुलग़ुल का छोटा रूप है। इसका अर्थ है शोर, कोलाहल। उदाहरण – वहाँ बहुत शोर-ग़ुल हो रहा था। इसी से बना है ग़ुल-गपाड़ा।

राजपाल के हिंदी शब्दकोश में ग़ुल का अर्थ

गुल की ही तरह का एक शब्द है बू। इसके दोनों अर्थ हैं। सामान्य अर्थ में कोई भी गंध भी और विशेष अर्थ में दुर्गंध। इसपर हम पहले चर्चा कर चुके हैं। चाहें तो पढ़ सकते हैं। लिंक नीचे दिया हुआ है।

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