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54. चिट्ठी आई है, वतन से बेरंग/बैरंग चिट्ठी आई है

वॉट्सऐप और ईमेल के ज़माने में आपमें से कई पाठकों को मालूम नहीं होगा कि जिस डाक सामग्री पर पर्याप्त मूल्य के टिकट न लगे हों, उसे क्या कहते हैं। उसे कहते हैं बैरंग हालाँकि कुछ लोग बेरंग भी कहते हैं। बैरंग क्यों सही है और उसका क्या मतलब है, जानने की इच्छा हो तो आगे पढ़ें।

जब इस विषय पर मैंने फ़ेसबुक पर एक पोल किया तो 66% यानी दो-तिहाई ने कहा, बैरंग और 34% यानी एक-तिहाई ने बेरंग को सही माना।

यह तो मैंने ऊपर बता ही दिया कि यह शब्द डाक व्यवस्था से जुड़ा है। जब किसी डाक सामग्री पर पर्याप्त मूल्य का टिकट न लगा हो तो उस सामग्री पर पेनल्टी लगाकर सामग्री के प्राप्तकर्ता से वह रक़म वसूल की जाती है। अब यह उस सागग्री के प्राप्तकर्ता पर निर्भर करता है कि वह अधिक मूल्य चुकाकर उसे स्वीकार करे या न करे। यदि वह यह राशि देने से इनकार कर देता है तो वह डाक वापस लौट जाती है। इसी से एक मुहावरा भी बना है – बैरंग लौटना या वापस होना जिसका अर्थ है, निष्फल या बिना काम हुए तुरंत लौट आना।

मुझे नहीं मालूम, आज भी वह व्यवस्था जारी है या नहीं। लेकिन आज से 20-30 साल पहले तो ऐसा होता था और कई लोग रजिस्ट्री से चिट्ठी भेजने के बजाय उसे बेरंग/बैरंग भेज देते थे। इससे चिट्ठी प्राप्तकर्ता के हाथों में पहुँचने की पूरी संभावना होती थी और पेनल्टी मिलाकर भी जो राशि होती थी, वह रजिस्ट्री के ख़र्च से बहुत कम होती थी।

मैं जब किशोर था, तभी से सोचा करता था कि ऐसी चिट्ठियों को बेरंग/बैरंग क्यों कहते हैं। मुझे लगता था कि लिफ़ाफ़े पर टिकट नहीं लगे होने से उसको बेरंग कहा जाता है क्योंकि टिकट रंगीन होते हैं और टिकट न होने का अर्थ हुआ, चिट्ठी का बेरंग (बे+रंग) होना। फिर कभी पढ़ा कि यह शब्द अंग्रेज़ी के BEARING शब्द से बना है। कहाँ पढ़ा, याद नहीं लेकिन तब भी यह सवाल बना रहा कि BEARING का यहाँ क्या अर्थ हो सकता है। क्या BEARING LETTER का अर्थ यह था कि यह ख़त डाक राशि की बक़ाया राशि वहन (BEAR) कर रहा है; या फिर यह कि इस ख़त की डाक राशि प्राप्तकर्ता को वहन (BEAR) करनी होगी?

मैंने गूगल किया लेकिन यह पता नहीं चला कि BEARING शब्द का इस्तेमाल किस अर्थ में होता था। लेकिन शब्दकोश बताते हैं कि BEARING से ही बैरंग शब्द बना है (देखें शब्दकोश का चित्र)। लगता है कि बेअरिंग/बेयरिंग का बेअ/बेय बै बन गया और रिंग का रंग हो गया – शब्द बन गया बैरंग।

कुछ पाठकों को BEARING का उच्चारण बेअरिंग/बेयरिंग देखकर ताज्जुब हो रहा होगा क्योंकि हमारे स्कूलों में BEAR का उच्चारण बियर ही पढ़ाया जाता है। इस हिसाब से इसका उच्चारण बिअरिंग/बियरिंग होना चाहिए। मैं भी बाल्यावस्था में B-E-A-R से बियर ही जानता था। यह तो बाद में पता चला कि B-E-A-R का उच्चारण बेअर/बेयर होता है चाहे उसका अर्थ (संज्ञा के रूप में) भालू हो या (क्रिया के अर्थ में) वहन करना। इसीलिए TEDDY BEAR को टेडी बेअर/बेयर कहा जाएगा न कि टेडी बिअर/बियर। इसी तरह WEAR का उच्चारण भी वेअर/वेयर होगा, न कि विअर या वियर।

जाते-जाते एक आख़िरी पॉइंट। यह सवाल कुछ साथियों के दिमाग़ में आ रहा होगा कि BEARING का उच्चारण मैंने बेअरिंग और बेयरिंग दोनों क्यों दिया है। क्या इसी तरह WEAR, TEAR आदि के भी दो-दो उच्चारण होंगे – वेअर/वेयर, टिअर/टियर (आँसू), टेअर/टेयर (फाड़ना)? अगर हाँ तो इनमें सही क्या है? अ या य या दोनों?

शब्दकोशीय दृष्टि से देखें तो अ वाले उच्चारण ही सही हैं यानी BEAR=बेअर, WEAR=वेअर, TEAR=टिअर/टेअर लेकिन बोलने की दृष्टि से देखें तो हम हिंदुस्तानियों के मुँह से बेयर, वेयर और टियर या टेयर की ध्वनि ही निकलती है। ऐसा क्यों? ऐसा इसलिए कि जब दो स्वर आपस में मिलते हैं तो उनमें विकार आ जाता है। स्वर संधि के नियमों से हम जानते हैं कि जब इ/ई या ए/ऐ के बाद अ आता है तो उसका उच्चारण य् हो जाता है। जैसे अति+अधिक=अत्यधिक। ने+अन=नयन। अंग्रेज़ी शब्दों में इन नियमों का पूरी तरह पालन तो नहीं होता यानी टिअर (टि+अर) का (अत्यधिक के त्य की तरह) ट्यर या बेअर (बे+अर) का (नयन के नय की तरह) बयर तो नहीं हो जाता लेकिन अ की ध्वनि य में ज़रूर बदल जाती है, कम-से-कम हम हिंदुस्तानियों की ज़बान में।

यही कारण है कि शब्दकोश में INDIAN का उच्चारण इंडिअन लिखा होता है लेकिन हमारे मुँह से निकलता है इंडियन या इंड्यन।

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