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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

33. शब्द था तिथिवार, बन गया क्या – त्योहार या त्यौहार?

कुछ शब्द होते हैं जिनके दो-दो रूप चलते हैं। ऐसा ही एक शब्द है त्योहार जिसे त्यौहार भी लिखा जाता है। ऐसे में कई बार मन में सवाल उठता है कि त्योहार लिखें या त्यौहार। आज की क्लास में इसी सवाल का जवाब देने की कोशिश की है।

जब यह जानने के लिए फ़ेसबुक पर पोल किया गया कि त्योहार और त्यौहार में से कौनसा ज़्यादा प्रचलित है तो पता चला कि त्यौहार के समर्थक कुछ ज़्यादा हैं – 59%। त्योहार के पक्षधर भी बहुत कम नहीं थे – 41% थे। इससे पहले एक और मंच पर यह पोल किया था, वहाँ मुक़ाबला बहुत क़रीबी था – 50.3 (त्यौहार) बनाम 49.7 (त्योहार) (देखें चित्र)।

सही क्या है? शब्दकोशों में दोनों हैं मगर सभी में ज़ोर त्योहार पर है। त्यौहार की प्रविष्टि पर जाने पर लिखा मिलता है – देखें त्योहार (देखें चित्र)।

संभवतः पहले त्योहार ही चलता था, बाद में कुछ इलाक़ों में त्यौहार भी बोला और लिखा जाने लगा। चूँकि लिखा हुआ शब्द पूरे देश में जाता है इसलिए समय के साथ-साथ त्यौहार भी प्रचलन में आ गया।

लेकिन हिंदी व्याकरण और भाषा विज्ञान के अच्छे जानकार योगेंद्रनाथ मिश्र का विपरीत मत है। उनके अनुसार पहले त्यौहार ही चलता होगा, बोलने में भी और लिखने में भी क्योंकि त्यौहार का ‘औ’ गले से उच्चरित होने वाला स्वर है जिसके उच्चारण में अन्य स्वरों की तुलना में अधिक बल लगता है।

वे कहते हैं, ‘औ की तुलना में ओ बोलना आसान है। हम बोलने (उच्चारण) में सरलता प्रेमी हैं। इस कारण औ स्वर ओ में बदल गया होगा। यानी त्यौहार बोलने में त्योहार हो गया होगा। फिर लोग उच्चारण के आधार पर लिखने लगे होंगे। इस तरह त्यौहार शब्द बोलने में भी और लिखने में भी त्योहार हो गया होगा।’

योगेंद्रनाथ जी के मुताबिक़ चूँकि लिखने और बोलने में त्योहार और त्यौहार, दोनों चलते हैं इसलिए एक को सही और दूसरे को ग़लत कहने का हमारे पास कोई आधार नहीं है। वे दोनों को सही ठहराते हैं।

दोनों को सही ठहराने का एक कारण यह भी है कि यह शब्द कैसे बना यानी इसका मूल शब्द क्या है, इसके बारे में हमारे पास कोई ठोस जानकारी नहीं है।

शब्दकोशों के अनुसार यह तिथिवार (तिथि+वार) का संकुचित/परिवर्तित रूप है (देखें चित्र)।

सुनने में तो विचित्र लगता है कि तिथिवार कैसे त्यौहार/त्योहार में बदला होगा लेकिन इस विषय पर एक मित्र से चर्चा में पता चला कि यह शब्द हिंदी में भी कभी चलता था और उसके पिता अक्सर त्योहार/त्यौहार के अर्थ में तिथिवार शब्द का प्रयोग करते थे।

गुजराती में भी त्योहार के लिए तहेवार शब्द चलता है, वह तिथिवार का ही घिसा हुआ रूप लगता है।

अब अगर मान भी लें कि त्योहार/त्यौहार तिथिवार से बना है तो ‘तिथि’ का रूप बिगड़कर ‘त्यो’ बना या ‘त्यौ’, यह कैसे जाना जाए? इसलिए दोनों को सही ठहराने के अलावा हमारे पास कोई चारा नहीं है।

त्योहार/त्यौहार की ही तरह त्योरी/त्यौरी, ब्योरा/ब्यौरा और तोलना/तौलना शब्दों पर भी दुविधा होती है। तीनों शब्दों के दोनों रूप सही हैं मगर शब्दकोश पहले दोनों मामलों में ओकार रूप को प्राथमिकता देते हैं (त्योरा और ब्योरा) जबकि तोलना/तौलना के मामले में तौलना को वरीयता देते हैं।

इन शब्दों के दो-दो रूप क्यों प्रचलित हैं, इसका एक कारण अलग-अलग इलाक़ों में लोगों के बोलने का अलग-अलग तरीक़ा भी हो सकता है। जैसे मध्य प्रदेश और राजस्थान के कुछ इलाक़ों में ऐ का उच्चारण ए की तरह किया जाता है – पैसा को पेसा, थैले को थेला, बैग को बेग बोला जाता है। हो सकता है, यही वजह रही हो कि कुछ इलाक़ों में त्योरी, ब्योरा और तोलना चल गया हो और बाक़ी इलाक़ों में त्यौरी, ब्यौरा और तौलना।

त्योहार/त्यौहार की बात चली तो दिवाली की याद आनी ही है। लेकिन ज़रा ठहरिए – दिवाली या दीवाली? जानने के लिए यहाँ क्लिक/टैप करें।

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