Categories
आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

44. धुआँ पिया (धूमपान) या धुएँ जैसा (धूम्रपान) कुछ लिया?

धूम्रपान सही है या धूमपान? अधिकतर लोग कहेंगे – धूम्रपान। शायद आप भी। हमारे फ़ेसबुक पोल में भी यही नतीजा आया जब 88% के विशाल बहुमत ने कहा – धूम्रपान। धूमपान के समर्थक केवल 12% थे। सही क्या है, यह जानने के लिए आगे पढ़ें।

धूम्रपान और धूमपान में कौनसा सही है, यह सवाल मुझे बचपन से परेशान करता रहा है। कारण यह कि कोलकाता (तब कलकत्ता) में मेरे घर के पास ही बीड़ी-सिगरेट की एक दुकान थी जिसके बोर्ड पर उसका बांग्ला में नाम लिखा रहता था – धूमपान। हिंदी में मैं धूम्रपान पढ़ा करता था। इसलिए समझ नहीं पाता था कि सही क्या है। तब पता करने का कोई ज़रिया भी नहीं था।

हिंदी और बांग्ला दोनों भाषाएँ संस्कृत से निकली हैं, इसलिए यह तो समझ में आ रहा था कि धूम्र और धूम दोनों का स्रोत संस्कृत ही है। हाँ, लग यह रहा था कि इनमें से एक तत्सम है और दूसरा तद्भव। चूँकि ग्राम-गाँव, भ्रमर-भँवरा और आम्र-आम आदि के उदाहरण याद थे, सो उस समय अंदाज़ा यही लगाया कि कठिन-सा दिखने वाला धूम्र संस्कृत का होगा और थोड़ा आसान नज़र आने वाला धूम उसी का बदला हुआ रूप यानी तद्भव होगा। निष्कर्ष यह निकाला कि हिंदी में तत्सम रूप धूम्रपान और बांग्ला में तद्भव रूप धूमपान चलता होगा।

यह तो बहुत बाद में जाकर पता चला कि धूम्र और धूम दोनों तत्सम हैं। तो क्या इसका मतलब यह कि धूम्रपान और धूमपान दोनों सही हैं?

नहीं। धूम्र और धूम दोनों संस्कृत के हैं लेकिन दोनों के अर्थ अलग-अलग हैं। धूम संज्ञा है और उसी का अर्थ है धुआँ। धूम्र का अर्थ धुआँ नहीं है; वह विशेषण है और उसका अर्थ है धुएँ के रंग का, धुएँ जैसा, धूसर (देखें चित्र)।

ऐसे में SMOKING का हिंदी अनुवाद धूमपान (धुएँ का पान) ही हो सकता है, धूम्रपान (धुएँ जैसे का पान) नहीं। उसी तरह जैसे पानी पीने की क्रिया को जलपान (जल का पान) ही कहेंगे, जलीयपान (पानी जैसे का पान) नहीं। ज़हर पीने की क्रिया को भी विषपान ही कहेंगे विषैलापान (विष जैसे का पान) नहीं कहेंगे। संस्कृत में भी धूमपानम् शब्द ही है, धूम्रपानम् नहीं है (देखें चित्र)।

हिंदी शब्दसागर में धूम्र को संज्ञा भी बताया गया है लेकिन संज्ञा के तौर पर धूम्र का अर्थ कहीं भी धुआँ नहीं है (देखें चित्र)।

जहाँ तक धूमपान/धूम्रपान का संबंध है, हिंदी शब्दसागर में संस्कृत की तरह धूमपान ही है।

ज्ञानमंडल में धूम्रपान है लेकिन उसे असाधु (विकृत) बताया गया है और धूमपान की ओर निर्देशित किया गया है।

अब इसका क्या अर्थ निकला? यही कि संस्कृत के हिसाब से धूमपान सही है और धूम्रपान ग़लत।

लेकिन हिंदी वालों ने न जाने क्या सोचकर धूमपान की जगह धूम्रपान को अपना लिया जबकि बाक़ी मामलों में धूम ही रहने दिया जैसे धूमकेतु या धूमिल। अब भाषामित्र योगेंद्रनाथ मिश्र तो कहेंगे, ‘जो चला, सो भला’। उनका कहना सही भी है क्योंकि अगर आप किसी अख़बार या वेबसाइट में काम कर रहे हैं और यह पोस्ट पढ़ने के बाद अगर स्मोकिंग के अर्थ में धूमपान लिखना शुरू कर दें तो आपका बॉस आपको ही डाँट लगाएगा कि इतना भी पता नहीं कि हिंदी में धूमपान नहीं, धूम्रपान होता है। आप उन्हें लाख शब्दकोश दिखा दें, वह मानेगा नहीं।

मगर मेरा काम तो सच बताना है। सच यही है कि संस्कृत में धूम्र का अर्थ धुआँ नहीं है। धुएँ के लिए जो शब्द है, वह है धूम। इस हिसाब से धूमपान ही सही शब्द है।

(Visited 240 times, 1 visits today)
पसंद आया हो तो हमें फ़ॉलो और शेयर करें

अपनी टिप्पणी लिखें

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial