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EC2 : कौन हैं अंग्रेज़ी के पाँच पांडव और छठा कुंतीपुत्र?

हिंदी में जो स्वर हैं, उनका एक जैसा उच्चारण होता है जैसे ‘आ’ का हमेशा ‘आ’ ही उच्चारण होगा चाहे वह ‘आम’ में हो या ‘भाषा’ में। लेकिन अंग्रेज़ी के एक ही स्वर का उच्चारण अलग-अलग जगह अलग-अलग हो सकता है। जैसे A का उच्चारण कहीं ए, कहीं ऐ, कहीं आ और कहीं अ होता है। परंतु इसके भी नियम हैं कि कहाँ उसका क्या उच्चारण होगा। आज की क्लास में हम अंग्रेज़ी के स्वरों के बारे में जानेंगे जिन्हें Vowels कहते हैं।

अपने स्कूली जीवन के एक अनुभव से यह क्लास शुरू करता हूँ। बात क्लास 9 की है। हमारे मैथ्स सर ने ज्यॉमिट्री से जुड़ा कोई आसान-सा सवाल पूछा। सवाल उनके लिए आसान था लेकिन हमारे लिए कठिन क्योंकि ज्यॉमिट्री हमारे पल्ले ही नहीं पड़ती थी। सारे के सारे छात्र रट जाते थे और अच्छे नंबर ले आते थे।

एक-एक कर सर ने सारे टॉपर्ज़ से वही सवाल पूछा और कोई उसका जवाब नहीं दे पाया। सर ने हताशा के मारे अपना सर पकड़ लिया लेकिन हमसे कुछ कहा नहीं। वह मायूस चेहरा लेकर चुपचाप क्लास से निकल गए। हम शर्मिंदा थे लेकिन क्या करते!

अगले दिन सर आए तो हम डर रहे थे कि पता नहीं, उनकी नाराज़गी ख़त्म हुई या नहीं। लेकिन यह क्या! वह तो मुस्कुरा रहे थे। उन्होंने ब्लैकबोर्ड पर एक डॉट लगाया और बताया, ‘यह है पॉइंट या बिंदु जिससे सारी ज्यॉमिट्री शुरू होती है।’ हम समझ गए कि वह शुरू से शुरू कर रहे हैं। पॉइंट, लाइन, ट्राइऐंगल, रेक्टैंगल, स्क्वेयर… हमें सबकुछ समझ में आ रहा था और अच्छा भी लग रहा था। अब क्लास 9 में पढ़ने वालों को क्लास 5-6 की चीज़ें पढ़ाई जाएँ तो वे तो आसानी से समझेंगे ही। हमने भी सबकुछ जल्दी ही सीख लिया। और आपको विश्वास नहीं होगा — पंद्रह दिन होते-होते हम क्लास 9 के सिलबस पर वापस आ गए।

मैं भी क्लास 9 में अपने उन सर से मिली उस अभूतपूर्व सीख को ध्यान में रखकर आपको भी बिल्कुल शुरू से अंग्रेज़ी उच्चारण की बातें सिखाने जा रहा हूँ। आपमें से बहुतों को यह बिल्कुल बेसिक लगेगा लेकिन मुझे तो सबको साथ लेकर चलना है। इसलिए जो नहीं जानते, वे इसे जानें। जो जानते हैं, वे इसे रिव़िश्ज़न के तौर पर लें।

वर्णमाला या ऐल्फ़बेट

कोई भी भाषा सीखने के लिए उसकी वर्णमाला जाननी ज़रूरी है। वर्णमाला यानी उस भाषा में इस्तेमाल होनेवाले वर्णों की सूची। वर्ण से बनते हैं शब्द और शब्द से वाक्य। शब्दों का अर्थ जानकर और वाक्यों में उनका सही क्रम में प्रयोग करके हम अपनी बात दूसरों को समझा सकते हैं। कोई भी भाषा सीखने का यही मक़सद होता है। 

इंग्लिश की वर्णमाला को ऐल्फ़बेट (Al.pha.bet) कहते हैं। इसमें 26 वर्ण या अक्षर हैं जिनमें से 5 व़ावल (Vow.el) हैं और 21 कॉन्सनंट (Con.so.nant) हैं। A, E, I, O और U ये पाँच व़ावल हैं। B, C, D, F, G, H, J, K, L, M, N, P, Q, R, S, T, V, W, X, Y और  Z कॉन्सनंट हैं। W और Y कभी-कभी व़ावल की तरह काम करते हैं और कभी कॉन्सनंट की तरह। इसलिए उन्हें सेमी-व़ावल भी कहते हैं। कॉन्सनंट आपस में मिलकर तब तक कोई स्वतंत्र रूप से बोले जा सकने वाला शब्द या शब्दांश नहीं बना सकते जब तक उनमें कोई व़ावल न हो। जैसे आप B और T को मिलाकर बनने वाले BT को बोलने की कोशिश कीजिए। कुछ ब्ट जैसा बनेगा जिसे बोलना बहुत कठिन है। लेकिन यदि उनके बीच A, E, I, O और U  और Y भी लगा देंगे तो बोलना आसान हो जाएगा। उदाहरण देखिए :

BAT (बैट), BET (बेट), BIT (बिट), BOT (बॉट), BUT (बट) और BYTE (बाइट)।

व़ावल हिंदी में भी हैं जहाँ उन्हें स्वर कहा जाता है।  हिंदी में 12 स्वर हैं – अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ए , ऐ, ओ, औ, अं, अः जो 33 व्यंजनों (क से ज्ञ तक) के सहयोग से शब्द बनाते हैं। लेकिन हिंदी के स्वर और इंग्लिश के व़ावल में एक बहुत बड़ा फ़र्क़ यह है कि जहाँ हिंदी में अ का उच्चारण हर जगह अ ही होता है और इ का हमेशा इ, वहीं इंग्लिश में A का उच्चारण अलग-अलग शब्दों में अलग-अलग होता है।  Bat में a का उच्चारण ऐ (बैट)  है तो Bake में ए (बेक)। Ask में आ (आस्क) है तो Tall में ऑ (टॉल)। A.go में अ (अगो) है तो Man.age में इ (मैनिज)। यही हाल बाकी व़ावल का भी है। ये पाँच पांडव (A, E, I, O और U) और एक कर्ण (Y) कुल मिलाकर 20 से भी ज़्यादा ध्वनियाँ बनाते हैं।

ऐसे में मुश्किल यही है कि आख़िर कैसे जानें कि कौन से व़ावल का किस शब्द में क्या उच्चारण होगा? क्या इसके कोई नियम हैं? बिल्कुल हैं। ये नियम हर मामले में शत-प्रतिशत तो लागू नहीं होते लेकिन 80 से 90 प्रतिशत मामलों में इन नियमों का पालन होता है। आगे की क्लासों में हम इन्हीं नियमों के बारे में बात करेंगे। 

इस क्लास का सबक़

इंग्लिश में 26 लेटर होते हैं जिनमें 5 व़ावल और 21 कॉन्सनंट हैं। इन 5 व़ावल – A, E, I, O, U और एक सेमी-व़ावल Y के सहयोग से कॉन्सनंट शब्द या शब्दांश (Syl.la.ble)बनाते हैं। लेकिन इन साढ़े पाँच व़ावल से कुल मिलाकर 20 से भी अधिक तरह के उच्चारण होते हैं जिससे यह समझना मुश्किल हो जाता है कि कहाँ कौनसा उच्चारण होगा। लेकिन ऐसे नियम हैं जिनके आधार पर हम जान सकते हैं कि किस व़ावल का कहाँ क्या उच्चारण होगा। इनके बारे में हम आगे की क्लासों में एक-एक करके बात करेंगे।

अभ्यास

दो या तीन कॉन्सनंट उठाइए और उनके बीच व़ावल फ़िट करके देखिए, क्या-क्या शब्द बनते हैं। उनका उच्चारण कीजिए और फिर डिक्श्नरी से मिलाइए कि क्या आपने उनका सही उच्चारण किया है। मैं ख़ुद कुछ अक्षर समूह देता हूँ – (1) b, l, t (2)  b, r, d (3) c, r (4) c, c, k (5) w, n ।

चलते-चलते

हम हर कॉन्सनंट को किसी ख़ास ध्वनि से जोड़ते हैं। जैसे B से ब, D से ड। लेकिन कई कॉन्सनंट्स की एक से ज़्यादा ध्वनियाँ हैं। जैसे यह तो आप जानते ही होंगे कि C से स भी होता है (Cell=सेल) और क (Cut=कट) भी। इसी तरह G से ज भी बनता है (Gem=जेम) और ग भी (Gum=गम)। लेकिन आपको जानकर हैरत होगी कि D का उच्चारण कहीं-कहीं ज और ट तथा T का उच्चारण कहीं-कहीं ड और च भी होता है। इसी तरह S के भी स के अलावा और कई उच्चारण होते हैं – श, ज़ और श्ज़ भी। घबराइए नहीं, इन सबके नियम हैं जिनकी चर्चा आगे की क्लासों में की गई है।

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