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260. चुनिंदा के लिए क्या सही – चयनित या चयित?

चुनिंदा यानी चुना हुआ (selected) के लिए हिंदी में क्या लिखना सही है? चयनित, चयनीत या चयित? जब यह सवाल फ़ेसबुक पर पूछा गया तो सारे लोगों ने ग़लत विकल्प चुने। सही विकल्प के पक्ष में एक भी वोट नहीं पड़ा। इसका कारण शायद यह था कि जो सही विकल्प था, वह प्रचलित नहीं है और जो प्रचलित है, वह सही नहीं है। क्या है सही शब्द, यदि आप जानना चाहते हैं तो पढ़ें यह शब्दचर्चा।

आज की चर्चा का विषय है – चुने हुए के अर्थ में क्या लिखा जाना चाहिए? चयनित, चयनीत या चयित? जब इस सवाल पर फ़ेसबुक पर एक पोल किया गया तो 88% ने चयनित को सही बताया जबकि 9% ने चयनीत को। शेष 3% के अनुसार दोनों सही हैं। तीसरे विकल्प चयित के पक्ष में एक भी वोट नहीं पड़ा। हालाँकि व्याकरण और शब्दकोशों के हिसाब से देखें तो सही शब्द है चयित (देखें चित्र)।

Chayit in Hindi Dictionaries for Selected
हिंदी शब्दसागर में और राजपाल के कोश में चयित है, चयनित नहीं है।

सरकारी क़ागज़ों और दस्तावेज़ों में भी चयित ही लिखा जाता है (देखें चित्र)।

चयित क्यों सही है, इसका कारण और संबंधित नियम मैं आगे बताऊँगा। लेकिन पहले मैं कुछ शब्दों की लिस्ट आपके सामने रखता हूँ। यह लिस्ट देखकर आप बिना नियम जाने ख़ुद ही निष्कर्ष निकाल लेंगे कि क्या सही है और क्या ग़लत।

  • समर्थन > समर्थित (समर्थन – न + इत) न कि समर्थनित।
  • संकलन > संकलित (संकलन – न + इत) न कि संकलनित।
  • समर्पण > समर्पित (समर्पण – ण + इत) न कि समर्पणित।
  • उत्पादन > उत्पादित (उत्पादन – न + इत) न कि उत्पादनित।
  • अर्जन > अर्जित (अर्जन – न + इत) न कि अर्जनित।
  • प्रचलन > प्रचलित (प्रचलन – न + इत) न कि प्रचलनित।
  • दलन > दलित (दलन – न + इत) न कि दलनित।
  • पालन > पालित (पालन – न + इत) न कि पालनित।
  • कथन > कथित (कथन – न + इत) न कि कथनित।

आपने देखा कि ये सारे शब्द ऐसे हैं जिनके अंत में ‘न’ या ‘ण’ है और जब उन पीछे ‘इत’ लगता है तो ‘इत’ लगने से पहले ‘न’ ग़ायब हो जाता है। यानी शब्द से ‘न’ हटाने के बाद ही ‘इत’ लगता है।

अब यही फ़ॉर्म्युला चयन पर लगाकर देखें और उसमें भी अंतिम ‘न’ को हटाकर ‘इत’ जोड़ें – चयन – न + इत। क्या बनेगा – चयनित या चयित? निश्चित रूप से चयित।

यदि चयित आपको अजीब लग रहा है तो एक बार रचित पर ग़ौर फ़रमाएँ। रचना से रचनित नहीं होता, रचित ही होता है।

चयन से चयनित क्यों नहीं होगा, इसे एक और तरीक़े से समझा जा सकता है। लेकिन उसके लिए संस्कृत व्याकरण के दो प्रत्यय और उनके नियम समझने होंगे।

मैं ख़ुद संस्कृत में सिफ़र हूँ इसलिए इन दोनों नियमों को समझने के लिए मैंने इंटरनेट को खँगाला और पाया कि संस्कृत में दो तरह के प्रत्यय हैं जिनके कारण किसी शब्द के अंत में ‘इत’ आता है। एक क्त‘ प्रत्यय जिसका प्रयोग भूतकालिक शब्द और विशेषण बनाने में होता है जैसे पठित, लिखित, उपार्जित। इन शब्दों का प्रयोग हम हिंदी में भी करते हैं लेकिन केवल विशेषण के रूप में।

दूसरा इतच्‘ प्रत्यय जिससे केवल विशेषण बनते हैं जैसे फल से फलित, पुष्प से पु्ष्पित, हर्ष से हर्षित आदि।

इन दोनों ही तरह के शब्दों के अंत में ‘इत’ होता है लेकिन दोनों में दो बहुत ही महत्पवूर्ण अंतर हैं। पहला निर्माण प्रक्रिया में, दूसरा अर्थ में।

‘क्त’ प्रत्यय – यह धातु के अंत में लगता है और इसका अर्थ होता है किया गया/हुआ कोई काम। जैसे पठित (पठ्+इत) अंश यानी ‘पढ़ा गया’ अंश, लिखित (लिख्+इत) उपन्यास का मतलब ‘लिखा हुआ’ उपन्यास, अर्जित (अर्ज्+इत) संपदा का मतलब ‘अर्जन की गई’ संपदा।

‘इतच्’ प्रत्यययह (धातु के बजाय) सीधे शब्द के अंत में लगता है और इससे जो शब्द बनते हैं, उनका अर्थ होता है युक्त, सहित। जैसे हर्षित (हर्ष+इत) मन का मतलब ‘हर्ष से युक्त’ मन, पुष्पित (पुष्प+इत) वन यानी ‘पुष्पों से युक्त’ वन, गर्वित (गर्व+इत) राष्ट्र यानी ‘गर्व से भरा हुआ’ राष्ट्र।

अब हम पता करेंगे कि जब हम चयन में ‘इत’ लगाकर विशेषण बनाते हैं तो हमारा आशय क्या होता है। क्या हम कहना चाहते हैं – ‘चयन से युक्त‘ कहानियाँ या हम कहना चाहते हैं – ‘चयन की हुई/गई‘ कहानियाँ?

अगर हमारा आशय है चयन से युक्त कहानियाँ तो चयनित (चयन+इत) कहानियाँ होगा। यदि हमारा आशय है चयन की हुई/गई कहानियाँ तो हमें ‘चि’ धातु (मतलब है बटोरना) के साथ ‘क्त’ प्रत्यय लगाना होगा। नतीजतन चि+इत (यण संधि के नियमानुसार) हो जाएगा चय्+इत और बनेगा चयित।

आप ख़ुद इस प्रश्न का जवाब सोचें, मूल प्रश्न का उत्तर आपको मिल जाएगा कि क्यों चयन से चयनित नहीं, चयित ही बनना चाहिए।

चयनित की तरह एक और शब्द है जो हिंदी में बहुत प्रचलित है लेकिन व्याकरण और शब्दकोशों की दृष्टि से ग़लत है। वह शब्द है आरोपी। आरोपी जिस अर्थ में इस्तेमाल होता है, उसके लिए सही शब्द कुछ और है। क्या है वह शब्द और क्यों आरोपी ग़लत है, यह जानने के लिए पढ़ें यह शब्दचर्चा।

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