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213. बोलने का ख़ास ढंग – लहजा या लहज़ा?

बोलने या शब्दों का उच्चारण करने के ख़ास ढंग को क्या कहते हैं? लहजा या लहज़ा? जब मैंने इस विषय में फ़ेसबुक पर एक पोल किया तो 60% से भी अधिक लोगों ने कहा – लहज़ा। लहजा के समर्थक क़रीब 40% थे जो अपने-आप में कम नहीं है। तो सही क्या है – लहजा या लहज़ा, इसी पर बात करेंगे आज की चर्चा में। रुचि हो तो पढ़ें।

हर व्यक्ति के बोलने या उच्चारण करने का एक ख़ास तरीक़ा होता है जिसके लिए उर्दू में एक बढ़िया शब्द है। वह शब्द लहजा या लहज़ा, इसपर अक्सर लोगों को भ्रम होता है। आज की इस चर्चा में हम इसी भ्रम का निवारण करेंगे।

जब मैंने इस शब्द पर पोल किया तो मुझे अनुमान था कि बहुमत लहज़ा के पक्ष में वोट करेगा। ऐसा इसलिए कि हमारे ज़ेहन में यह बस गया है कि अरबी-फ़ारसी परिवार का कोई शब्द है तो ज़्यादा संभावना इसी बात की है कि उसमें नुक़्ता होगा और इस कारण वे वहाँ भी नुक़्ता लगा देते हैं जहाँ नुक़्ता नहीं लगता। यह वैसा ही भ्रम है कि कई लोगों को संस्कृत के बारे में है कि उसके हलंत या विसर्ग वाले रूप ही सही होते हैं और इसी कारण जहाँ हल् चिह्न नहीं लगना चाहिए, वहाँ भी वे हल चिह्न लगा देते हैं जैसे कि ‘शत’ में। शत-शत नमन को वे शत्-शत् नमन लिख देते हैं।

जैसे ‘शत्-शत् नमन’ लिखना ग़लत है, वैसे ही बोलने के ढंग के लिए ‘लहज़ा’ लिखना ग़लत है।

सही शब्द है लहजा (देखें चित्र)। उर्दू कोश में उसे लह्जः लिखा गया है लेकिन हिंदी में हम लहजा ही लिखते-बोलते हैं।

लहज़ा भी एक शब्द है लेकिन उसका अर्थ है क्षण। जैसे एक लहज़े के लिए तो मैं बुत बन गया। इसका एक अर्थ नज़र भी है। मसलन उसने जिस लहज़े से मुझे देखा…

नीचे के चित्र में आप लहजा/लह्जः और लहज़ा/लह्जः के अर्थ में अंतर देखिए।

उर्दू के ऐसे कई शब्द हैं जिनमें लोग ग़लती से ‘ज’ का ‘ज़’ कर देते हैं। इनमें एक है जबरन जिसे कई लोग ज़बरन बोलते हैं। कारण शायद यह है कि जबरन से ही मिलते-जुलते अर्थ वाला शब्द है ज़बरदस्ती। चूँकि ज़बरदस्ती में ‘ज़’ है, सो जबरन को भी कुछ लोग ज़बरन कर देते हैं।

चलिए जबरन का ज़बरन हो जाना कोई बड़ी बात नहीं क्योंकि ज़बरन का कोई अर्थ नहीं होता। लेकिन अगर जलील को ज़लील या ज़लील को जलील कर दिया तो अर्थ का अनर्थ हो जाएगा क्योंकि जलील का अर्थ है पूज्य, महान और ज़लील का मतलब है तुच्छ, नीच।

इसलिए नुक़्ते का ख़्याल रखना ज़रूरी है।

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5 replies on “213. बोलने का ख़ास ढंग – लहजा या लहज़ा?”

शैलेंद्र जी का एक गाना है लड़कपन खेल में खोया जवानी नींद भर सोया बुढ़ापा देख कर रोया जवानी इसमें स्त्रीलिंग शब्द है फिर भी पुल्लिंग क्रिया का प्रयोग कैसे हुआ है

नमस्ते। आपके सवालों के जवाब दे दिए हैं। कृपया अपना मेलबॉक्स देखें।

बुढ़ापा पुल्लिंग शब्द है जब किसी स्त्री के लिए यह वाक्य प्रयोग करेंगे आपका बुढ़ापा आ गया या आ गई

नमस्ते। आपके सवालों के जवाब दे दिए हैं। कृपया अपना मेलबॉक्स देखें।

सर आपने भाषा में उलझे हुए व्यक्तियों की उन जनों को दूर करने के लिए जो प्रयास और किया है उसके लिए आपको कोटि-कोटि प्रणाम आप की जितनी भी प्रशंसा की जाए कम है

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