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आलिम सर की हिंदी क्लास शब्द पहेली

57. आप इस वाइरस का ‘सत्यानाश’ चाहते हैं या ‘सत्यानास’?

अगर श्राप देने से किसी का बुरा होता तो आज की तारीख़ में सबसे ज़्यादा श्राप करोनावाइरस को ही लगता। सभी यही कहते – करोनावाइरस, तेरा ‘सत्यानाश’ हो। रुकिए, सत्यानाश कहते या सत्यानास? सत्यानाश क्योंकि लगता तो यही है कि सत्यानास सत्यानाश का ही बिगड़ा हुआ रूप है जैसे शेर का सेर, आशीष का आसीस। लेकिन सच्चाई क्या है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

सत्यानाश और सत्यानास के सवाल पर जब फ़ेसबुक पर पोल किया तो 87% के विशाल बहुमत ने सत्यानाश को सही बताया और बहुत कम – 13% – ने सत्यानास को।

जबसे मुझे शब्दों की पहेलियाँ बूझने का शौक़ चर्राया, तभी से सत्यानास/सत्यानाश शब्द मुझे परेशान करता आया है। मैं समझ नहीं पा रहा था कि सर्वनाश के अर्थ वाले इस शब्द में सत्या या सत्य का क्या तात्पर्य है। क्या सत्यानास/सत्यानाश का अर्थ यह है कि किसी का सत्य यानी सच में नाश हो जाए? बात कुछ जम नहीं रही थी लेकिन उन दिनों कुछ उपाय भी नहीं था पता लगाने का।

जो मेरी दुविधा थी, वही दुविधा कोशकारों की भी रही होगी। मैं कोई अंदाज़ा लगा पाऊँ, उतना क़ाबिल हूँ नहीं। लेकिन उन विद्वानों ने अंदाज़ा लगाया कि सत्यानास दरअसल सत्तानाश का अपभ्रंश है (देखें चित्र)।

सत्ता का अर्थ हम शक्ति या ताक़त समझते हैं जैसे सत्ता की लड़ाई या सत्ताधारी दल। सत्ता का यह अर्थ भी सही है मगर इसका एक और अर्थ है और वह है अस्तित्व। सत्तानाश का अर्थ है किसी के अस्तित्व का नाश। जब आप किसी के अस्तित्व का नाश चाहते हैं तो आप कहना चाहेंगे, फलाँ का सत्तानाश (सत्ता=अस्तित्व का नाश) हो। आगे चलकर सत्तानाश का सत्यानास/सत्यानाश हो गया, ऐसा कोशकारों का मत है।

वैसे आपको बता दूँ कि संस्कृत के शब्दकोशों में मुझे सत्तानाश जैसा कोई शब्द नहीं मिला। यानी सत्यानास/सत्यानाश सत्तानाश से बना है, यह कोशकारों की दूर की कौड़ी भी हो सकती है। अगर इस शब्द (सत्तानाश) का कभी-कहीं पूर्व में प्रयोग हुआ हो तो उसका ज़िक्र न तो कोश में है, न मेरी जानकारी में है।

चलिए, यह विवाद छोड़ते हैं कि सत्यानास/सत्यानाश कैसे बना, किस शब्द से बना क्योंकि किसी के बाप-दादे या लकड़दादे क्या थे, कितने योग्य-अयोग्य थे या कैसे चरित्र के थे, उससे हमें कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता – हमें फ़र्क़ इससे पड़ता है कि हमारे सामने जो व्यक्ति खड़ा है, वह कौन है और उसकी योग्यता या चरित्र कैसा है। उसी तरह सत्यानास/सत्यानाश चाहे जिससे बना हो, आज उसका जो अर्थ है, वह हम सब जानते हैं। इसलिए जो एकमात्र सवाल अब हमारे सामने बचता है, वह यह कि सत्यानाश से सत्यानास बना या सत्यानास से सत्यानाश? अर्थात मूल शब्द कौनसा है।

नागरी प्रचारिणी सभा के हिंदी शब्दसागर तथा ज्ञानमंडल और प्लैट्स जैसे प्रामाणिक कोशों में सत्यानास ही मिलता है। वहाँ सत्यानाश नहीं है (देखें चित्र)।

तो फिर यह सत्यानाश कहाँ से आया? मुझे लगता है इसके पीछे वही कारण है जो कैलास के कैलाश बनने के पीछे है। आम तौर पर हम देखते हैं कि संस्कृत के ‘श’ युक्त शब्दों का जब हिंदी में प्रवेश हुआ तो उन शब्दों में मौजूद ‘श’ का रूप बदलकर ‘स’ हुआ है – श्वास का साँस, शब्द का सबद, श्रावण का सावन आदि। इसलिए हिंदी के कुछ पढ़े-लिखे लोगों को लगा होगा कि सत्यानास सत्यानाश का ही विकृत रूप है। अब पढ़े-लिखे लोग अनपढ़ों की भाषा क्यों बोलें? इसलिए उन्होंने सत्यानाश बोलना-लिखना शुरू कर दिया। राजपाल के शब्दकोश में सत्यानाश को ही सही बताया गया है। वहाँ सत्यानास खोजने पर हमें सत्यानाश देखने का निर्देश दिया जाता है (देखें ऊपर का चित्र)।

नास और नाश के चक्कर में उलझे दो और शब्द याद आ रहे हैं। एक है नाशपाती जो नासपाती भी बोला जाता है। दूसरा है नासपीटा जो नाशपीटा नहीं बोला जाता। नासपीटा नाश और पीटने से बना है और जिसका अर्थ है (किसी का) नाश हो जाए। आश्चर्य यह है कि यह शब्द न शब्दसागर में है, न राजपाल में। इंटरनेट पर पुस्तक.ऑर्ग पर नासपीटा का अर्थ मिला जिसके अनुसार यह एक अपशब्द है जो ब्रज प्रदेश में विशेष प्रचलित है।

अब अंतिम प्रश्न। अगर सत्यानास मूल शब्द है और सत्यानाश नहीं तो क्या इस कारण सत्यानाश ग़लत हो गया? ध्यान दीजिए कि हमारे पोल में 87% ने उसको सही बताया है यानी इतनी बड़ी तादाद में लोग उसका इस्तेमाल करते हैं।

इसका जवाब हमें ऐसे ही और शब्दों के कल और आज के रूपों में मिलेगा। पहले वापिस बोला जाता था, अब वापस ही बोला जाता है। तो क्या हम वापिस को सही और वापस को ग़लत बताते हैं? इसी तरह पहले बहिन बोला जाता है, आज सभी बहन बोलते हैं। तो क्या बहन ग़लत और बहिन ही शुद्ध है?

यानी आप सत्यानाश बोलते और लिखते हों तो बोलते-लिखते रहें। आज के पोस्ट का मक़सद आपकी किसी ग़लती को सुधारना नहीं है। उद्देश्य केवल यह बताना है कि सत्यानास ग़लत नहीं है, बल्कि मेरी समझ से वही मूल शब्द है। ठीक वैसे ही जैसे नासपीटा ही मूल शब्द है।

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