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एकला चलो

‘वंदे मातरम’ का लेखक क्या अंग्रेज़ों का समर्थक था?

‘वंदे मातरम’ को राष्ट्रगीत का दर्जा प्राप्त है। पहले इसके शुरुआती दो पद ही राष्ट्रगान में शामिल थे। अब पूरा का पूरा वंदे मातरम इसमें शामिल कर दिया गया है। ये बाक़ी के जो हिस्से हैं, वे न केवल मुस्लिम विरोधी हैं, बल्कि पूरी की पूरी किताब जिसका यह अंश है, मुसलमानों के विरुद्ध और अंग्रेज़ों के समर्थन में है। क्या ऐसे गीत को राष्ट्रगान बनाना उचित है?

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क़त्ल करके मेरी आँखों में क्यों उमड़े आँसू?

… मैंने देखा – एक छोटी-सी चुहिया निष्प्राण उलटी पड़ी हुई थी। उसके छोटे-छोटे निष्क्रिय हाथ-पैर फैले हुए थे। मेरी आँखों में आँसू आ गए। दुनिया के युद्धग्रस्त इलाक़ों की ऐसी तमाम तस्वीरें मेरे सामने बिछ गईं जिनमें बमबारी का शिकार हुए छोटे-छोटे बच्चों के शव नज़र आते थे…

पिछले दिनों घर में चुपके से घुस आई एक चुहिया की जान लेने के बाद मन में जो ख़्याल उभरे, उन्हीं को एक लेख की शक्ल दे दी है। रुचि हो तो पढ़ें।

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क्या दारा सिंह को माफ़ी मिलनी चाहिए?

उड़ीसा में बीजेपी सरकार बनने के बाद सबसे नया काम यह हुआ है कि ग्रेअम स्टेन्स और उनके दो बच्चों को ज़िंदा जलाने वाले दारा सिंह ने अपनी उम्रक़ैद की सज़ा समाप्त करने की दर्ख़्वास्त दी है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में राज्य की बीजेपी सरकार से उसकी राय माँगी है जो निश्चित रूप से सकारात्मक होगी। राजनीतिक हत्यारों की सज़ामाफी के लिए इससे पहले भी सरकारी पहलें हो चुकी हैं। सवाल है – क्या ऐसे लोगों को माफ़ी दी जानी चाहिए?

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एकला चलो

बचपन का साथी था वो, हो जाता सच कहता जो…

ज्योतिष शास्त्र, अंक शास्त्र या ताश जैसे पत्तों के आधार पर क्या कोई भविष्यवाणी की जा सकती है? मैं जब ख़ुद से पूछता हूँ तो मेरा तार्किक दिमाग इस बात को मानने से इनकार कर देता है। लेकिन कुछ हैरतअंगेज़ भविष्यवाणियों का मैं स्वयं चश्मदीद गवाह रहा हूँ जो मेरी किशोरावस्था में एक मित्र ने की थीं। आज मैं आप सबके साथ उन अनुभवों को शेयर कर रहा हूँ।

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वर्ल्ड कप फ़ाइनल में भारत की हार से दुखी हैं… मगर क्यों?

वर्ल्ड कप क्रिकेट के फ़ाइनल में भारत की हार पर दुखी हैं? क्यों दुखी हैं? क्या इसलिए कि इस हार के कारण आपने ख़ुद पर गर्व करने का एक सुनहरा मौक़ा खो दिया? ‘ईस्ट ऑर वेस्ट, इंडिया इज़ द बेस्ट’ का नारा लगाने का अवसर गँवा दिया? लेकिन सच बताइए, अगर भारत जीत भी जाता तो क्या आपका कुछ हक़ था उस जीत पर इतराने का? आख़िर टीम के प्रदर्शन में आपका योगदान क्या होता है सिवाय तालियाँ बजाने के?

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