Eiffel Tower इन दिनों चर्चा में है क्योंकि गुजरात के स्वामीनारायण संप्रदाय के एक प्रतिनिधिमंडल के भ्रमण के दौरान वहाँ के प्रबंधकों ने महिला स्टाफ़ को काम से हटा दिया था। इस Eiffel Tower को हिंदी मीडिया में एफिल टावर लिखा जा रहा है। लेकिन यह उसका सही उच्चारण नहीं है। क्या है Eiffel Tower का सही उच्चारण, यह जानने के लिए आगे पढ़ें।
पैरिस का Eiffel Tower इन दिनों चर्चा में है क्योंकि कुछ दिनों पहले जब गुजरात के स्वामीनारायण संप्रदाय का एक प्रतिनिधिमंडल वहाँ गया था तो वहाँ के महिला स्टाफ़कर्मियों को कुछ समय के लिए हटा दिया गया था। उन्हें हटाने का अनुरोध प्रतिनिधिमंडल की तरफ़ से ही किया गया था जो चाहता था कि दल के भ्रमण के दौरान उसका महिलाओं से आमना-सामना कम-से-कम हो। हैरत है कि प्रबंधकों ने इस आग्रह को मान लिया और महिला स्टाफ़कर्मियों को वहाँ से हटा दिया गया। इस भेदभाव से नाराज़ स्टाफ़ यूनियन ने इसके प्रतिवाद में हड़ताल कर दी और शहर के मेयर ने घटना की जाँच के आदेश दिए हैं।
इस ख़बर को प्रकाशित करते हुए सारे हिंदी मीडिया ने Eiffel Tower को एफ़िल टावर लिखा। अमर उजाला, नवभारत टाइम्स, जागरण और जनसत्ता में मुझे टावर की जगह टॉवर भी मिला।
लेकिन न एफ़िल सही है, न टॉवर।
सही क्या है, यह जानने के लिए हमें उस व्यक्ति के सरनेम का उच्चारण जानना होगा जिसपर Eiffel Tower का नाम रखा गया है। वह व्यक्ति है Alexandre Gustave Eiffel. Eiffel का अंग्रेज़ी उच्चारण है आइफ़ल और फ़्रेंच में उसे बोलते हैं एफ़ेल। यानी अगर अंग्रेज़ी उच्चारण के हिसाब से लिखा जाए तो होगा आइफ़ल टावर और फ़्रेंच उच्चारण के आधार पर लिखा जाए तो होगा एफ़ेल टावर।

आपने देखा, Eiffel Tower को एफ़िल टावर लिखना किसी भी हिसाब से सही नहीं है। लेकिन सारा हिंदी मीडिया – ख़ासकर डिजिटल मीडिया – बिना किसी जाँच-पड़ताल के यही लिखे जा रहा है। यहाँ तक कि बीबीसी हिंदी भी जिसे किसी ज़माने में नामों के शुद्ध उच्चारणों के लिए जाना जाता था।


नवभारत टाइम्स की कुछ पुरानी ख़बरों (2015-2020) में मुझे आइफ़ल टावर मिला। इसके प्रिंट संस्करण ने भी यह स्टोरी लिखते हुए आइफ़ल टावर ही लिखा है (देखें चित्र)।

