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प्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक का नाम सत्यजित राय या रे?

बंगाल के विश्वप्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक और लेखक Satyajit Ray का नाम हिंदी अख़बारों और वेबसाइटों में चार तरह से लिखा जाता है। सत्यजित रे, सत्यजीत रे, सत्यजित राय और सत्यजीत राय। इनमें से सही क्या है?

यदि इन चार नामों की पड़ताल की जाए तो पता चलेगा कि उनके पहले नाम को कोई ‘सत्यजित’ लिख रहा है तो कोई ‘सत्यजीत’। इसी तरह सरनेम के तौर पर कोई ‘रे’ लिख रहा है तो कोई ‘राय’। 

नवभारत टाइम्स, अमर उजाला और वेबदुनिया सत्यजीरे लिख रहे हैं तो जागरण और जनसत्ता सत्यजिराय। न्यूज़ 18 नाम में सत्यजीत लिख रहा है और सरनेम में राय।’ 

आज हम जानेंगे कि उनके नाम और सरनेम की सही स्पेलिंग क्या है।

अब चूँकि मानिक दा ख़ुद तो रहे नहीं सो हम उनसे तो नहीं पूछ सकते कि आपके नाम और सरनेम का सही उच्चारण क्या है लेकिन वे जिस राज्य (यानी पश्चिम बंगाल) से थे और जिस भाषा (यानी बांग्ला) में उन्होंने सर्वाधिक काम किया, उससे पता चल सकता है कि वहाँ उनका पूरा नाम कैसे लिखा जाता है।

बांग्ला फ़िल्म मीडिया में उनका नाम ‘सत्यजित्’ और सरनेम ‘राय’ (সত্যজিৎ রায়) लिखा जाता है । उनके विकिपीडिया पेज पर भी ‘सत्यजित् राय’ ही है (देखें चित्र)। बांग्ला में आप जिस किसी भी व्यक्ति से बात करेंगे, वह सत्यजित् राय ही बोलेगा (देखें चित्र)। 

हिंदी और बांग्ला वेबसाइटों में Satyajit Ray का नाम अलग-अलग तरह से लिखा जा रहा है।

यानी सही नाम ‘सत्यजित्’ है, न कि ‘सत्यजीत’ और सरनेम ‘राय’ है, न कि ‘रे’। चूँकि हिंदी में अंतिम वर्ण के साथ हलचिह्न अब नहीं लगाया जाता सो सत्यजित् को सत्यजित लिखा जा सकता है। 

सत्यजित् का हिंदी में सत्यजीत कैसे हुआ, यह समझने के लिए आपको हिंदी का ट्रेंड समझना होगा। संस्कृत में जिन-जिन शब्दों के अंत में ‘जित्’ है, उसे हिंदी में ‘जीत’ कर दिया गया क्योंकि हिंदी में ‘जीत’ और ‘जीतना’ शब्द हैं। इसी कारण विश्वजित् का विश्वजीत, इंद्रजित् का इंद्रजीत और सत्यजित् का सत्यजीत हो गया। 

मगर ‘राय’ के ‘रे’ होने में हिंदी की नहीं, अंग्रेज़ी की भूमिका है। राय की अंग्रेज़ी स्पेलिंग RAY है। अंग्रेज़ी में किरण के लिए जो शब्द इस्तेमाल होता है, उसकी भी यही स्पेलिंग है और उसका उच्चारण ‘रे’ है। इसलिए देशी-विदेशी अंग्रेज़ी फ़िल्म जगत उसे ‘रे’ बोलने लगा। जब कुछ हिंदीभाषियों ने अंग्रेज़ी मीडिया या टीवी पर उनका नाम सत्यजित ‘रे’ सुना तो बिना यह जाँच किए हुए कि उनके सरनेम का असल उच्चारण क्या है, ‘रे’ ही लिखना शुरू कर दिया। 

सत्यजित ‘रे’ नाम का इतना असर हुआ कि बंगाल के एक पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धार्थ शंकर ‘राय’ को भी कई दिल्ली वाले सिद्धार्थ शंकर ‘रे’ बोलते थे। 

सत्यजित राय की बात चली तो उनकी एक कालजयी फ़िल्म की भी बात कर ली जाए जिसका नाम लोग ग़लत लिखते हैं। वह ‘पथेर पाँचाली’ है, ‘पाथेर पाँचाली/पांचाली’ नहीं जैसा कि लल्लनटॉप पर आप देख सकते हैं (देखें चित्र)।

‘पथेर पाँचाली’ का मतलब है ‘राह का गीत’।

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