अंग्रेज़ी का एक शब्द है RENAISSANCE जिसका मतलब है पुनर्जन्म। इसका इस्तेमाल मुख्यतः यूरोपीय पुनर्जागरण काल (14वीं-16वीं शताब्दी) के लिए होता है।यह मूलतः फ़्रेंच शब्द है जिसे अंग्रेज़ी ने हूबहू अपनाया है। हिंदी में इसे रेनेसाँ लिखा जाता है। परंतु क्या यह Renaissance का सही उच्चारण है?
किशोरावस्था में जब मेरा RENAISSANCE से सामना हुआ तो मेरे मन में जिज्ञासा हुई कि इसकी हिंदी स्पेलिंग में ‘स’ ग़ायब क्यों है। मुझे लगा शायद Restaurant (रेस्तराँ), Precis (प्रेसी) और Ballet (बैले) की तरह इसमें भी अंतिम व्यंजन ध्वनि का उच्चारण नहीं होता होगा क्योंकि यह भी फ़्रांसीसी शब्द है।
लेकिन पिछले दिनों जब शब्दकोशों और इंटरनेट पर इसका उच्चारण देखा तो पता चला कि न केवल अंग्रेज़ी में बल्कि फ़्रेंच में भी इसकी अंतिम ध्वनि ‘स’ का उच्चारण होता है। यानी इसका अंग्रेज़ी उच्चारण जहाँ रिनेसंस और रिनेसांस है तो फ़्रेंच उच्चारण रनेसॉँस – अनुनासिक सॉ – है। चूँकि हिंदी में ऑ के साथ चंद्रबिंदु लगाने का प्रचलन/व्यवस्था नहीं है, इसलिए इसका निकटतम उच्चारण होगा रनेसाँस।
लेकिन हिंदी में तो रेनेसाँ ही लिखा जाता है यानी अंतिम ‘स‘ ग़ायब है। मैंने हमेशा हिंदी के लेखों में रेनेसाँ ही लिखा देखा है। इंटरनेट पर सर्च किया तो ‘हिंदी प्रिंट‘ और ‘जनचौक‘ में छपे दो हालिया लेखों में रेनेसाँ ही दिखा (देखें चित्र)।

तो आख़िर अंग्रेज़ी/फ़्रेंच के इस Renaissance शब्द की अंतिम ध्वनि ‘स’ हिंदी में ग़ायब क्यों हो गई? किसने ग़ायब की? क्यों ग़ायब की?
मेरी समझ से ऐसा फ़्रेंच के बारे में आधे-अधूरे ज्ञान के चलते हुआ। चूँकि कुछ फ़्रांसीसी शब्दों में अंतिम व्यंजन ध्वनि उच्चरित नहीं होती (कुछ उदाहरण मैंने ऊपर दिए, और भी हैं जैसे Coup=कू, Debut=डेब्यू, Buffet=बफ़े) इसलिए किसी विद्वान लेखक को लगा होगा कि Renaissance में भी c के ‘स’ का उच्चारण नहीं होता होगा।
मैं उस विद्वान को दोष नहीं देता। उन दिनों इंटरनेट नहीं था और विदेशी नामों के उच्चारणों का पता लगाने को कोई सुलभ तरीक़ा भी नहीं था इसलिए उनको दोषी नहीं ठहराया जा सकता। बल्कि Renaissance के मूल फ़्रेंच उच्चारण के अनुसार लिखने की उनकी प्रवृत्ति को सलाम ही किया जा सकता है।
लेकिन वह ग़लत थे। फ़्रेंच के बारे में उनकी जानकारी अधूरी थी। फ़्रेंच में शब्द या शब्दांश (syllable) की हर अंतिम व्यंजन ध्वनि ग़ायब नहीं होती। कुछ होती हैं, कुछ नहीं होतीं।
- पाँच ध्वनियाँ जो ग़ायब होती हैं – T P S X और Z.
- चार ध्वनियाँ जो ग़ायब नहीं होतीं – C R F और L.
कुछ उदाहरण देखें जहाँ शब्द/शब्दांश के अंत में मौजूद T P S X और Z का उच्चारण नहीं हो रहा।
- Rapport=रापॉर
- Coup=कू
- Debris=डेब्री
- Faux=फ़ो
- Rendezvous=रॉँदेवू
लेकिन शब्द/शब्दांश के अंत में मौजूद C R F और L का उच्चारण होता है।
- Fiancé =फ़िऑँसे
- Amour=अमूर
- Chef=शेफ़
- Journal=जूर्नल
ऊपर आपने Fiancé देखा। उसके अंत में भी ce है। अगर आप Fiancé से Renaissance की तुलना करेंगे तो सबकुछ साफ़ हो जाएगा। जैसे Fiancé में ‘स’ का उच्चारण हो रहा है, उसी नियम से Renaissance में भी ‘स’ का उच्चारण होगा। अंतर केवल अंतिम e का है। Fiancé के अंत में é है जिसका उच्चारण ‘ए’ होता है और Renaissance के अंत में केवल e है जो साइलंट रहता है।
जाते-जाते बताना चाहूँगा कि हिंदी में भले ही अधिकतर लेखक रेनेसाँ को ही सही मान रहे हों और वह लिख भी रहे हों लेकिन अज्ञेय और निर्मल वर्मा जैसे कई प्रतिष्ठित और जानकार लेखक अपनी रचनाओं में रिनेसाँस या रनेसाँस का ही प्रयोग करते हैं। गूगल AI ने इसके बारे में जो जानकारी दी है, वह आप नीचे दिए गए चित्र में देख सकते हैं।

