दिलजीत दोसाँझ की फ़िल्म SATLUJ का नाम जागरण से लेकर हिंदुस्तान तक सारी प्रमुख हिंदी साइटें ‘सतलुज’ लिख रही हैं लेकिन एक नवभारत टाइम्स है जो अपनी हर ख़बर में इसे ‘सतलज’ लिख रहा है। आख़िर सही क्या है?
इस मूवी के नाम की अंग्रेज़ी स्पेलिंग (SATLUJ) को देखते हुए कोई भी यह कहेगा कि इसे सतलुज लिखा जाना चाहिए – SAT से सत, LUJ से लुज। हो सकता है कि इस अंग्रेज़ी स्पेलिंग को देखते हुए ही अधिकतर हिंदी साइटें इसे सतलुज लिख रही हैं (देखें चित्र)।

यह भी हो सकता है कि इन साइटों के उपसंपादकों/संवाददाताओं को पता हो कि पंजाब में इसे सतलुज (ਸਤਲੁਜ) ही बोला और लिखा जाता है।
लेकिन तब सवाल उठता है कि नवभारत टाइम्स की वेबसाइट अपनी हर ख़बर में इसे सतलज क्यों लिख रही है (देखें चित्र)।

इसका कारण यह है कि जिस नदी के नाम पर मूवी का नाम रखा गया है, उसे हिंदी में सतलज कहा और लिखा जाता है। यानी पंजाब में सतलुज लेकिन हिंदी प्रदेशों में सतलज (देखें चित्र)।

अब यह सतलुज नाम पंजाब से बाहर जाते ही सतलज कैसे हो गया, यह रिसर्च का विषय है। हिंदी के शब्दकोशों में इसका जवाब नहीं मिलता। परंतु अंग्रेज़ी के शब्दकोशों और नक़्शों में इसका जवाब मिल सकता है जहाँ इस नदी के नाम की स्पेलिंग दी हुई है SUTLEJ (देखें चित्र).

यानी मूवी बनाने वालों ने फ़िल्म का नाम स्थानीय उच्चारण के हिसाब से SATLUJ रखा परंतु नदी के नाम की मूल अंग्रेज़ी स्पेलिंग है SUTLEJ. अब जो नहीं जानता हो कि इस नदी को पंजाब में क्या कहते हैं, वह SUTLEJ को सतलेज या सतलज समझ सकता है।
एक वजह यह भी हो सकती है कि हिंदी प्रदेशों में भी पहले सतलुज बोला जाता रहा हो लेकिन लु का ‘उ’ धीरे-धीरे ग़ायब हो गया हो (जैसे बाहु>बाँह) और सतलज बन और चल गया हो।
वैसे सतलुज नाम भी अपने-आपमें किसी पहेली से कम नहीं है। कारण, हिंदी शब्दसागर के अनुसार यह बना है संस्कृत के शतद्रु से जिसका मतलब है सौ धाराओं वाली (देखें चित्र)।

अब शतद्रु से सतलुज कैसे बना होगा? शत का सत तो समझ में आता है मगर द्रु को लुज?
इसका संभावित कारण दिखता है विपर्यय में। भाषा विज्ञान में विपर्यय एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके चलते समय के साथ शब्दों की मात्राएँ या ध्वनियाँ इधर से उधर हो जाती हैं। जैसे बिंदु का बूँद, उँगली का अंगुली, लार का राल, ससुर का सूसर, लखनऊ का नखलऊ आदि।
हो सकता है, शतद्रु का द्रू पहले रुद् में बदला हो, फिर रुद लुज में। यानी ‘र’ का ‘ल’ और ‘द’ का ‘ज’ में परिवर्तन।
यह कोई अनोखी बात नहीं है। संस्कृत के हरिद्रा और पर्यंक हिंदी में हलदी और पलंग हो गए – ‘र’ की ध्वनि ‘ल’ में बदल गई। इसी तरह अद्य से आज, दीदी से जीजी बन गए – ‘द’ का ‘ज’ हो गया।
संभव है, शतद्रु भी इसी तरह पहले शतरुद और बाद में सतलुज हो गया हो।
चलिए, सतलुज और सतलज पर चर्चा तो हो गई मगर निष्कर्ष क्या निकला? निष्कर्ष यही कि यदि नदी का नाम हिंदी में लिखना हो तो सतलज लिखें लेकिन अगर मूवी का नाम लिखना हो तो सतलुज। इस हिसाब से बाक़ी साइटें सही हैं, नवभारत टाइम्स ग़लत।
