ब्रिटिश प्रधानंत्री KEIR STARMER का नाम हिंदी मीडिया में कई तरह से लिखा जा रहा है – कीर, किएर, कीएर, केअर और किअर। आज की चर्चा में यही बताया गया है कि उनके नाम का सही उच्चारण क्या है।
सालों पहले राजेश खन्ना की हिट फ़िल्म आई थी ‘कटी पतंग’ जिसके एक दृश्य में बिंदु एक गाने के दौरान आशा पारेख से पूछती हैं – तुम्हारा नाम क्या है? नीना, मीना, अंजू, मंजू… या मधु?
जब ब्रिटिश प्रधानमंत्री KEIR Starmer भारत आए और हिंदी मीडिया ने उनके नाम को अलग-अलग तरह से लिखा तो मेरा भी मन किया कि बिंदु की तरह इन संस्थानों के संपादकों से पूछूँ – जनाब, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री का नाम क्या है – कीर, किएर, कीएर, केअर… या किअर?
ये पाँच नाम वे हैं जो मुझे गूगल सर्च में मिले। हो सकता है, कोई छठा या सातवाँ रूप भी हो जो मुझसे मिस हो गया हो।
इन पाँच नामों में से सही क्या है, यही हम पता लगाएँगे आज की शब्दचर्चा 59 में। पहले यह जान लेते हैं कि स्टार्मर की यात्रा के दौरान कौनसा संस्थान क्या लिख रहा था।
- कीर – नवभारत टाइम्स, DD News, जागरण, दैनिक भास्कर, NDTV, ABP News, TV9 भारतवर्ष।
- किएर – आजतक, DW, अमर उजाला, बीबीसी हिंदी।
- कीएर – जागरण, अमर उजाला, बीबीसी हिंदी, आजतक।
- केअर – नवभारत टाइम्स, News18, दैनिक ट्रिब्यून, पंजाब केसरी, लोकमत।
- किअर – TV9 भारतवर्ष।
सही क्या है? वही जो ऊपर की सूची में सबसे अंत में है – किअर जिसका इस्तेमाल केवल TV9 भारतवर्ष ने किया, वह भी केवल दो स्टोरीज़ में जो स्टार्मर के भारत आने से पहले की हैं। जब वह भारत पहुँच गए तो TV9 भारतवर्ष भी बाक़ी मीडिया के रंग में रंग गया और कीर स्टार्मर लिखने लगा।
KEIR STARMER के नाम का सही उच्चारण खोजने में मुझे पाँच से दस मिनट का वक़्त लगा। सबसे पहले गूगल पर लिखा – What is the pronunciation of KEIR STARMER. पहला परिणाम गूगल AI का मिला। अंग्रेज़ी में लिखा था कि KEIR का उच्चारण वैसा ही है जैसा कि Cheer का होता है। इसका मतलब था कि KEIR का उच्चारण किअर होगा क्योंकि Cheer का उच्चारण चिअर होता है।
लेकिन मैं गूगल AI के परिणामों पर पूरा भरोसा नहीं करता। इसलिए KEIR के उच्चारण से जुड़े कुछ यूट्यूब विडियो भी सुने। वे भी किअर ही बता रहे थे। अंतिम पुष्टि मैंने BBC और CNN के विडियो से की।
क्या हमारे इतने बड़े-बड़े मीडिया संस्थानों में एक भी व्यक्ति नहीं है जो किसी विदेशी हस्ती के भारत आने से पहले पाँच या दस मिनट का समय लगाकर उसके नाम के सही उच्चारण का पता करे और पूरी टीम से शेयर करे?
क्यों ये संस्थान ख़ुद भी ग़लत लिख रहे हैं और लाखों-करोड़ों पाठकों को भी ग़लत सिखा रहे हैं?
