खोजी पत्रकार, ऐक्टिविस्ट और अब कॉक्रोच जनता पार्टी के मुख्य प्रवक्ता Saurav Das के मामले में हिंदी का मेनस्ट्रीम और सोशल मीडिया वही ग़लती कर रहा है जो उसने भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान Sourav Ganguly के मामले में की थी। क्या है वह ग़लती, जानने के लिए आगे पढ़ें।
सौरभ गांगुली का नाम रोमन में Sourav लिखा जाता है और हिंदी का मीडिया उसे शुरू से सौरव लिखता आया है। उसी तरह Saurav Das को भी सौरव दास लिखा जा रहा है जबकि उनका नाम भी सौरभ दास है, न कि सौरव दास।
आप जानना चाहते होंगे कि इन दोनों के नाम अगर सौरभ हैं तो अंतिम ‘भ’ के लिए V का प्रयोग क्यों किया जाता है, BH का क्यों नहीं। इसका कारण यह है कि दोनों बंगाली हैं और बांग्ला में ‘भ’ के लिए अक्सर V लिखा जाता है। कारण क्या है, यह मैं सौरभ गांगुली वाली शब्दचर्चा में बता चुका हूँ। एक वाक्य में दोहरा देता हूँ।
बांग्ला में V का उच्चारण ‘वी’ नहीं, ‘भी’ किया जाता है। वहाँ Virus को भाइरास और Vote को भोट बोलते हैं।
इसीलिए सौरभ (अर्थ सुगंध) को रोमन में लिखते समय Saurabh के बजाय Saurav या Sourav लिखते हैं। लेकिन बांग्ला में उसे सौरभ (সৌরভ) ही बोलते और लिखते हैं। बांग्ला के अख़बारों और वेबसाइटों में उसे सौरभ दास ही लिखा जा रहा है (देखें चित्र)।

आप इसे यूँ समझिए कि भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल का नाम रोमन में Ajit Doval लिखा जाता है लेकिन हिंदी मीडिया उनका नाम अजीत डोवाल नहीं, अजीत डोभाल लिखता है (देखें चित्र)।

फिर सौरभ गांगुली और सौरभ दास के मामले में ऐसी बेवकूफ़ी क्यों?
