रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम, ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम, सबको (….) दे भगवान। यहाँ ख़ाली जगह पर क्या है? सन्मति या सम्मति? या कुछ और? आज यही जानने की कोशिश करेंगे हम। रुचि हो तो पढ़ें।
आलिम सर की हिंदी क्लास यानी हिंदी शब्दों और व्याकरण से जुड़ी दुविधाओं का आसान भाषा में समाधान।
रघुपति राघव राजा राम, पतित पावन सीताराम, ईश्वर-अल्लाह तेरो नाम, सबको (….) दे भगवान। यहाँ ख़ाली जगह पर क्या है? सन्मति या सम्मति? या कुछ और? आज यही जानने की कोशिश करेंगे हम। रुचि हो तो पढ़ें।
कुछ लोग मुक़दमा बोलते हैं तो कुछ मुक़द्दमा। इसी तरह कुछ लोगों को रद बोलना सही लगता है तो कुछ को रद्द। हद और हद्द के मामले में भी यही दुविधा है। इन सिंगल और डबल ‘द’ की समस्या सभी के सामने आती है। आज हम इसी पर चर्चा करेंगे कि इन तमाम शब्दों में कौनसा रूप सही है। रुचि हो तो पढ़ें।
दो पक्षों द्वारा अपनी-अपनी दिशा में रस्सा खींचने के खेल को क्या कहते हैं? जब मैंने यह सवाल फ़ेसबुक पर रखा तो 59% ने कहा – रस्साकशी जबकि 39% ने रस्साकसी के पक्ष में वोट दिया। 2% ऐसे भी थे जिन्हें रस्साकस्सी सही लगता था। आख़िर सही क्या है और क्यों है, जानने के लिए आगे पढ़ें।
नोकझोंक लिखना सही है या नोंकझोंक? यानी झोंक की तरह नोक के नो पर बिंदी लगेगी या नहीं? मैंने यह सवाल दो अलग-अलग मंचों पर पूछा और दोनों पर एक जैसी राय मिली। क़रीब तीन-चौथाई या उसे भी ज़्यादा लोगों ने कहा – नोकझोंक सही है। शेष का मानना था कि नोंकझोंक लिखना चाहिए। क्या सही है और क्यों सही है, आज की चर्चा इसी पर। रुचि हो तो पढ़ें।
पोशाक के अर्थ में वेश भी लिखा जाता है और वेष भी। लेकिन सही कौनसा है? वेश या वेष? या दोनों सही हैं? चूँकि ये दोनों शब्द संस्कृत के शब्द हैं, इसलिए उसी भाषा के माध्यम से जानते हैं कि पोशाक के तौर पर वहाँ कौनसा शब्द इस्तेमाल होता है। रुचि हो तो पढ़ें।