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आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

113. शेर जहाँ हों ज़्यादा, है शेर-बाहुल्य या शेर-बहुल?

किसी जगह पर कोई जाति, कोई प्रजाति या कोई समुदाय अधिक संख्या में हो तो उसे बताने के लिए एक शब्द है। क्या है वह – बहुल या बाहुल्य? यही सवाल मैंने पिछले दिनों फ़ेसबुक पर पूछा। जवाब में 60% ने कहा – बहुल, 40% ने कहा – बाहुल्य। सही क्या है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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112. मेरे ‘महबूब’ क़यामत होगी, आज तेरे नाम पे चर्चा होगी

जिससे आप प्यार करते हैं, उसे महबूब कहेंगे या मेहबूब? जब मैंने इसके बारे में फ़ेसबुक पोल किया तो तीन-चौथाई ने महबूब को सही बताया। उनका जवाब सही है। लेकिन क्या वे बोलते समय भी महबूब ही बोलते हैं या उनके मुँह से मेहबूब निकलता है? आप हिंदी फ़िल्मों के वे गाने सुन लीजिए जिसमें महबूब या महबूबा का इस्तेमाल हुआ है, सबमें गायकों के मुँह से मेहबूब और मेहबूबा ही निकला है। और महबूब ही नहीं, ऐसे ढेर सारे शब्द हैं जिनमें शुरू का ‘अ’ बदल जाता है ‘ए’ में। कौनसे हैं वे शब्द और कब ऐसा होता है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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111. संगठन और संघटन, क्या सही, क्या ग़लत?

आप जानते होंगे कि हिंदी में कई शब्द ऐसे हैं जो संस्कृत से आए हैं। कुछ अपने शुद्ध रूप में तो कुछ अपना रूप बदलकर। जैसे ग्राम और गाँव, पत्र और पत्ता, दुग्ध और दूध। हिंदी में ये दोनों ही तरह के शब्द चलते हैं – शुद्ध यानी तत्सम और परिवर्तित यानी तद्भव। लेकिन एक शब्द ऐसा है जो देखने-पढ़ने से लगता है बिल्कुल संस्कृत शब्द जैसा मगर है नहीं। वह है संगठन। संगठन जैसा कोई शब्द संस्कृत में नहीं है और जो है या जिससे यह शब्द बना है, उसके बारे में 90% को मालूम ही नहीं। क्या है वह शब्द, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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110. जिसे नहीं कोई रोग, वह निरोग है या नीरोग?


जिसके पास धन न हो, उसे निर्धन कहते हैं, जिसे कोई लज्जा न हो, उसे निर्लज्ज कहते हैं, जिसके मन में ममता न हो, उसे निर्मम कहते हैं, जिसे कोई डर न हो, उसे निडर कहते हैं, तो जिसे कोई रोग न हो, उसे क्या कहेंगे – निरोग, नीरोग या निरोगी? जब इसके बारे में एक फ़ेसबुक पोल किया गया तो 80% ने निरोग के पक्ष में वोट दिया। क्या वे सही हैं? जानने के लिए आगे पढ़ें।

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109. मेरा सरनेम याद रखना, बप्पी ‘लहरी’ मत कहना

हिंदी फ़िल्म इंडस्ट्री में बप्पी दा का नाम उन लोगों में लिया जाता है जिन्होंने पश्चिमी धुनों का इस्तेमाल करके कई हिट गाने दिए। लेकिन मुश्किल यह है कि लोग बप्पी दा का नाम ठीक से नहीं जानते। हिंदी के रेडियो जॉकी और नामी साइटों के पत्रकार भी उनका सरनेम ग़लत लिखते हैं। आज की इस क्लास में हम यही जानेंगे कि क्या है बप्पी दा का सरनेम। रुचि हो तो पढ़ें।

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