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आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

92. लैला के आशिक़ का नाम मजनू था या मजनूँ?

लैला के आशिक़ को कौन नहीं जानता? हाँ, उसका असली नाम बहुत से लोग नहीं जानते होंगे। मगर जिस नाम से वह मशहूर है, उसके बारे में भी भ्रम है कि वह कैसे लिखा जाए – मजनू या मजनूँ। इस विषय में फ़ेसबुक पर हुए एक पोल में 62% ने कहा, मजनूँ, 38% ने कहा – मजनू। सही क्या है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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91. किताब का पहला पन्ना मुख्यपृष्ठ या मुखपृष्ठ?

किसी किताब के पहले पन्ने या आवरण को क्या कहते हैं – मुखपृष्ठ या मुख्यपृष्ठ? पहली नज़र में मुख्यपृष्ठ ही सही लगता है क्योंकि आवरण किसी भी किताब का मुख्य पन्ना होता है। लेकिन सही है मुखपृष्ठ। क्यों, यह जानने के लिए आगे पढ़ें।

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90. पाँचवाँ और सातवाँ के बीच छठवाँ क्यों नहीं होता?

क्या कभी आपने सोचा है कि जब पाँचवाँ, सातवाँ, आठवाँ आदि के अंत में ‘वाँ’ है तो चार और छह से बनने वाले क्रमसूचक शब्दों में ‘वाँ’ क्यों नहीं है? चौथा को हम चारवाँ और छठा को छहवाँ या छठवाँ क्यों नहीं बोलते? जानने के लिए आगे पढ़ें।

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89. गांगुली दा का नाम सौरव है या सौरभ?

पश्चिम बंगाल के मशहूर क्रिकेट खिलाड़ी जिन्हें लोग दादा कहकर भी बुलाते हैं, उनके नाम के बारे में बहुत भ्रम है। चूँकि उनके नाम की अंग्रेज़ी स्पेलिंग में ‘v’ है, इसलिए हिंदी में उन्हें सौरव लिखा जाता है। लेकिन उनका नाम सौरभ है। फिर अंग्रेज़ी नाम में Saurabh के बजाय Saurav क्यों है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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88. बेवक़ूफ़ को अगर बेव्क़ूफ़ न कहें तो क्या कहें?

बेवक़ूफ़ के दो उच्चारण हैं – बेऽवक़ूफ़ और बेव्क़ूफ़। इनमें से कौनसा उच्चारण ज़्यादा लोकप्रिय है, यह जानने के लिए जब एक फ़ेसबुक पोल किया गया तो 90% ने कहा कि वे बेऽवक़ूफ़ बोलते हैं हालाँकि एक वॉइस सर्वेक्षण से पता चला कि बेऽवक़ूफ़ बोलने वाले बहुत ही कम हैं – सिर्फ़ 20%। आख़िर फ़ेसबुक पोल और वॉइस सर्वे में इतना अंतर क्यों, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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