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आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

198. प्रतिष्ठित व्यक्ति – गणमान्य है या गण्यमान्य?

गणमान्य सही है या गण्यमान्य? इस विषय में हिंदी समाज में सालों से बहस चल रही है। कुछ लोग कहते हैं गण्यमान्य सही है क्योंकि शब्दकोशों में वही है। कुछ और लोग कहते हैं, गणमान्य सही है क्योंकि हिंदी में यही प्रचलित है। एक तीसरी श्रेणी के लोग दोनों का अलग-अलग अर्थ निकालकर दोनों को सही बताते हैं। आज की चर्चा में हम इसी पर बात करेंगे कि सही क्या है और क्यों है।

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197. गहरा दलदल या गहरी दलदल?

आप सोच रहे होंगे कि यह भी क्या सवाल हुआ! हर कोई ‘जानता’ है कि दलदल पुल्लिंग है। हमारे फ़ेसबुक पोल में भी 82% साथियों ने दलदल को पुल्लिंग बताया। लेकिन क्या वे सही हैं? आइए, जानते हैं कि प्रामाणिक शब्दकोश दलदल के बारे में क्या कहते हैं। 

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196. निर्दलीय का बहुवचन : निर्दलीयों या निर्दलियों?

जो उम्मीदवार, विधायक या सांसद किसी दल से जुड़ा हुआ न हो, उसे निर्दलीय कहते हैं। अब प्रश्न यही है कि इस निर्दलीय का बहुवचन क्या होगा – निर्दलीयों या निर्दलियों। कुछ लोग निर्दलीयों लिखते हैं, कुछ निर्दलियों। सही है ‘निर्दलीयों’ लेकिन कभी-कभी ‘निर्दलियों’ भी सही हो सकता है। कब और क्यों, यही जानेंगे आज की चर्चा में।

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195. बड़ों से क्या मिलता है – आशीर्वाद या आर्शीवाद?

यह प्रश्न मुझे स्कूल के ज़माने से ही परेशान किया करता था। मेरे पिताजी आशिर्वाद लिखते थे और माँ आर्शीवाद। कुछ बुजुर्गों की चिट्ठियों में आर्शिवाद भी मिलता था और कहीं-कहीं आशीर्वाद भी। ऐसे में यह समझना मुश्किल हो जाता था कि सही क्या है। तब हिंदी के शब्दकोश भी नहीं होते थे घर में। लेकिन आज यह जानना आसान है कि कौनसा शब्द सही है और क्यों। आज की चर्चा इसी शब्द पर। 

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194. जान जाती है… मगर प्राण? जाता है या जाते हैं?

कुछ दिन पहले मैंने एक मशहूर कवि के फ़ेसबुक पेज पर यह लिखा देखा – तुम्हें जाना हो तो/ उस तरह जाना/ जैसे गहरी नींद में/ देह से प्राण जाता है (देखें चित्र)। मुझे पढ़कर कुछ खटका। प्राण जाता है या प्राण जाते हैं? बाद में इसके बारे में फ़ेसबुक पर पोल भी किया जिसमें 95% ने कहा – प्राण जाते हैं। क्या वे सही हैं? अगर हाँ तो प्राण का इस्तेमाल बहुवचन जैसा क्यों किया जाता है? आज की चर्चा इसी पर।

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