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आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

74. कभी-कभी मेरे दिल में क्या आता है – ख़्याल या ख़याल?

कभी-कभी मेरे दिल में ख़याल आता है… कि सही शब्द ख़्याल है या ख़याल। फ़िल्मी गीतों में अधिकतर ख़याल है लेकिन बोलचाल में ख़्याल चलता है। जब इस शब्द पर फ़ेसबुक पर पोल किया तो मुक़ाबला अच्छा रहा। ख़्याल के पक्षधर 56-44 यानी केवल 12% के अंतर से आगे रहे।

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73. मेरे दर्द की कुछ कर दवा, मरहम लगा, मलहम लगा

मरहम सही है या मलहम? इस सवाल पर फ़ेसबुक पर हुए एक पोल में मुक़ाबला बहुत क़रीबी रहा और मरहम के समर्थक 4% के अंतर से बाज़ी मार गए। लेकिन बहुमत का समर्थन होने से ही कोई विकल्प सही नहीं हो जाता। सवाल अब भी है कि क्या मरहम सही है और अगर हाँ तो क्या मलहम ग़लत है?

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72. ‘एक बार फिर’ सोचकर बताइए, पुनश्चः या पुनश्च?

आज हम चर्चा करेंगे उस शब्द की जो किसी लेख या पत्र में अपनी बात ख़त्म करने के बाद फिर से कुछ कहने के लिए इस्तेमाल होता है। वह क्या है – पुनश्च या पुनश्चः? इस विषय पर फ़ेसबुक पर हुए पोल में 64% यानी क़रीब दो-तिहाई से कुछ कम ने कहा – पुनश्च, 36% यानी एक-तिहाई से कुछ ज़्यादा के अनुसार सही शब्द है पुनश्चः।

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71. आरोपी – जो आरोप लगाए या जिसपर आरोप लगे?

हिंदी में एक शब्द है आरोपी जिसका बहुत ग़लत प्रयोग होता है। इस शब्द पर हुए फ़ेसबुक पोल में 86% के विशाल बहुमत ने कहा, आरोपी का अर्थ है – वह जिसपर आरोप लगा हो। 14% के मामूली अल्पमत ने इसके उलट कहा कि आरोपी उसको कहते हैं जिसने आरोप लगाया हो। सही क्या है और क्यों है, यह हम आगे जानेंगे।

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70. ‘छुपाना’ भी नहीं आता… या ‘छिपाना’ भी नहीं आता?

कुछ शब्दों के दो-दो रूप चलते हैं। ऐसा ही एक शब्द है – छुपना-छुपाना और छिपना-छिपाना। जब इन शब्दों पर फ़ेसबुक पोल किया गया तो मुक़ाबला बहुत क़रीबी रहा। 53% ने कहा – छुपाना। 47% का कहना था – छिपाना। सही क्या है, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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