Categories
आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

150. तीरों के बिछौने को क्या कहेंगे – शरशय्या या शरशैया?

बिस्तर के लिए हिंदी में एक शब्द है जो शय्या और शैया दोनों तरह से लिखा जाता है। जो शय्या को सही बताते हैं, वे कहते हैं कि यह शब्द संस्कृत से आया है और वहाँ यह इसी तरह लिखा जाता है। उधर जो शैया को सही बताते हैं, उनके अनुसार शय्या का उच्चारण शैया जैसा ही है। वे अपने मत के पक्ष में मैया, गैया, भैया और नैया का उदाहरण देते हैं। आख़िर किसके मत में है ज़्यादा दम, जानने के लिए आगे पढ़ें।

Categories
आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

149. बुड्ढा ‘गोभी’ लेकर आया या ‘गोबी’ लेकर?

फ़िल्म ‘संगम’ का एक गाना है – मैं का करूँ राम, मुझको बुड्ढा मिल गया। इसमें बुड्ढे के ‘गोभी’ लेकर आने की शिकायत है या ‘गोबी’ लेकर? घबराइए नहीं, मसला फ़िल्मी नहीं, इल्मी है। सवाल यह कि सही शब्द ‘गोभी’ है या ‘गोबी’? गो के बाद ‘भी’ या ‘बी’? दूसरा सवाल, गोभी से गोबी बना या गोबी से गोभी? और ये दोनों शब्द किससे बने? क्या अंग्रेज़ी शब्द – Cabbage – से या संस्कृत के कपिकम् से? जानने के लिए आगे पढ़ें।

Categories
आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

148. कपाल के बाद भाति है, भाँति है या भारती है?

बाबा रामदेव ने एक शब्द को बहुत ही प्रचलित कर दिया है जो कपाल से शुरू होता है मगर उसका पूरा और सही रूप क्या है, उसपर कुछ लोगों को भ्रम है। कुछ कपालभाँति कहते हैं, कुछ कपालभाति या कपालभाती। इसका एक और रूप भी लोकप्रिय है कपालभारती। इन चार नामों में सही क्या है और इस शब्द का मतलब क्या है, यह जानने में रुचि हो तो आगे पढ़ें।

Categories
English Class

EC1-EC80 : पूरी लिस्ट देखें, किस क्लास में क्या है?

इंग्लिश क्लास में कुल 80 क्लासें संकलित हैं जिनमें अंग्रेज़ी उच्चारण के नियमों को CVC और CVCe के बेसिक नियमों और स्ट्रेस और सिल्अबल के आधार पर समझाने की कोशिश की गई है। नीचे इन सारी क्लासों की सूची विषयवार ढंग से दी गई हैं। शीर्षक पर क्लिक या टैप करके आप संबंधित क्लास पढ़ सकते हैं। ये सारी क्लासें ‘आलिम सर की English Class‘ के नाम से पुस्तक रूप में भी उपलब्ध हैं जिसे आप प्रभात प्रकाशन की वेबसाइट से या और किसी ऑनलाइन साइट से भी ख़रीद सकते हैं।

Categories
English Class

EC80: जब Put की तरह Cut बोला जाता था – कुट

जाने कहाँ गए वो दिन, जैसा लिखो, वैसा पढ़ो, इंग्लिश बहुत आसान थी… फ़िल्म ’मेरा नाम जोकर’ की इस पैर्अडी से आप यह तो जान ही गए होंगे कि कभी ऐसा भी समय था जब इंग्लिश इतनी ’फन्नी’ नहीं थी और हिंदी की ही तरह उसे ‘जैसा लिखो, वैसा पढ़ो’ के नियम के तहत पढ़ा जा सकता था। वह समय था आज से 600 साल और उससे पहले का दौर। लेकिन उस समय कुछ ऐसा हुआ कि सारे व़ावल के उच्चारण एकाएक बदल गए। ऐसा क्यों हुआ और उससे अंग्रेज़ी शब्दों की स्पेलिंग और उच्चारण में क्या घालमेल हुआ,  यही जानेंगे हम आज की इस विदाई क्लास में।

Social media & sharing icons powered by UltimatelySocial