दुनिया के हर समाज में हमेशा से एक ऐसा वर्ग रहा है जो ख़ुद को ऊँचे कुल या वंश का मानता है। इस वर्ग को हिंदी में क्या कहा जाता है – ‘आभिजात्य’, ‘अभिजात्य’ या ‘अभिजात’? आज की चर्चा इस विषय पर है। रुचि हो तो पढ़ें।
दुनिया के हर समाज में हमेशा से एक ऐसा वर्ग रहा है जो ख़ुद को ऊँचे कुल या वंश का मानता है। इस वर्ग को हिंदी में क्या कहा जाता है – ‘आभिजात्य’, ‘अभिजात्य’ या ‘अभिजात’? आज की चर्चा इस विषय पर है। रुचि हो तो पढ़ें।
धुले हुए कपड़ों से सिलवटें (crease) हटाने के लिए हम एक औज़ार का इस्तेमाल करते हैं जिसे अंग्रेज़ी में iron कहते हैं। हिंदी में इसे तीन तरह से लिखा और बोला जाता है – इस्त्री, इस्तरी और इस्तिरी। इनमें से सही क्या है, आज इसी पर चर्चा करेंगे हम। रुचि हो तो पढ़ें।
जब किसी शब्द के बाद ‘इक’ प्रत्यय लगता है तो शुरुआती ‘अ’ का ‘आ’ हो जाता है (धर्म का धार्मिक), ‘इ’ या ‘ई’ का ‘ऐ’ हो जाता है (इतिहास का ऐतिहासिक), ‘उ’ या ‘ऊ’ को ‘औ’ हो जाता है (भूगोल का भौगोलिक)। यदि इस नियम को अणु पर लगाएँगे तो उससे क्या बनेगा – आणिक, आणविक या आण्विक? आज की चर्चा इसी पर है। रुचि हो तो पढ़ें।
कवि का स्त्रीलिंग शब्द क्या है? जब मैंने यह सवाल फ़ेसबुक पर पूछा तो 70-75% लोगों ने पूरे यक़ीन के साथ कहा – कवयित्री। शेष ने अन्य विकल्पों कवित्री, कवियत्री आदि को सही बताया। लेकिन क्या वाक़ई कवयित्री कवि का स्त्रीलिंग रूप है? जानने के लिए आगे पढ़ें।
क्या पत्नी और धर्मपत्नी के अर्थ में कोई अंतर है? क्या हर पत्नी को धर्मपत्नी कहा जा सकता है या केवल पहली पत्नी को जैसा कि दक्षस्मृति में लिखा हुआ है? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशने के लिए मैंने हिंदी और संस्कृत के शब्दकोशों और संस्कृत के ग्रंथों को टटोला। उनके आधार पर जो निष्कर्ष निकला है, वही पेश है आज की चर्चा में।