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हिंदी क्लास

क्लास 4 – तर्क से तार्किक, धर्म से धार्मिक तो अध्यात्म से…?

गाँधीजी को अधिकतर लोग धार्मिक मानते हैं लेकिन उनकी दिलचस्पी धर्म से अधिक अध्यात्म में थी। हम कह सकते हैं कि वे धार्मिक नहीं, आध्यात्मिक थे, और कई मामलों में तार्किक भी। जी नहीं, मैं आज गाँधीजी के विचारों पर कोई क्लास नहीं ले रहा। मैं केवल बता रहा हूँ कि जब तर्क, धर्म और अध्यात्म जैसे शब्दों के बाद ‘इक’ लगता है तो कैसे शब्द के आरंभ का ‘अ’ स्वर ‘आ’ में बदल जाता है। लेकिन कभी-कभी ऐसा नहीं भी होता। कब होता है, कब नहीं होता, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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क्लास 3 – मित्रो, क्या मोदी जी ग़लत बोलते हैं क्या?

जी नहीं, मेरा मक़सद प्रधानमंत्री के बयानों की आलोचना करना नहीं है, वह काम जिनको करना है, उनको करने दें। आज की मेरी क्लास तो केवल उन कुछ शब्दों पर है जो मोदी जी ही नहीं, देश के 99.99 प्रतिशत हिंदीभाषी ग़लत बोलते हैं – यहाँ तक कि बड़े-बड़े हिंदी अख़बारों-वेबसाइटों और टीवी चैनलों में बड़े-बड़े पदों पर बैठे लोग भी। क्या हैं वे शब्द, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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क्लास 2 – ‘कसमें’ में बिंदी तो ‘मुक़दमें’ में क्यों नहीं?

यह क्लास आपको बताएगी कि एकारांत यानी ‘ए’ से अंत होनेवाले शब्दों में कब बिंदी का प्रयोग होता है और कब नहीं। जैसे मुक़दमा का जब बहुवचन बनाते हैं तो वह मुक़दमे ही रहता है) लेकिन क़सम का बहुवचन बनाने पर क़समें हो जाता है। जानिए, इसका आसान-सा नियम।

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क्लास 1 – झंडा का झंडे होता है तो नेता का नेते क्यों नहीं?

आपने देखा होगा कि ‘आ’ से अंत होनेवाले शब्दों के बाद कारक चिह्न जैसे ने, को, का, पर, से आदि आते हैं तो शब्द के अंत में लगा आ, में बदल जाता है। जैसे घोड़े पर सवार, रास्ते में मिला, झंडे का रंग आदि। लेकिन सीमा पर लड़ाई में सीमा सीमे नहीं होता। देवता की पूजा में देवते की पूजा नहीं होता। कब आ का ए होता है और कब नहीं होता, यही जानेंगे हम इस क्लास में।

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