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Mispronounced English Words

CP10: Suite का उच्चारण स्वीट है, न कि सूट

अंग्रेज़ी में Suite का मतलब होता है (साज-सज्जा युक्त) कमरों का सेट (विशेषतः होटल में)। भारत में कई लोग इसे सूट या स्यूट बोलते हैं। लेकिन इसका सही उच्चारण है स्वीट। वही उच्चारण जो Sweet का है।

इसी तरह के दो और शब्द हैं जिनकी स्पेलिंग अलग-अलग है, उच्चारण एक है। ये शब्द हैं Flower (फूल) और Flour (मैदा)। Flower का उच्चारण तो आप जानते ही होंगे। तो वैसा ही उच्चारण अब से Flour का भी करें।

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आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

193. ख़ुद की जान लेना ख़ुदकुशी है या ख़ुदकशी?

ख़ुदकुशी या ख़ुदकशी? यह सवाल थोड़ा मुश्किल है। मुश्किल इसलिए कि उसके दोनों रूप चलते हैं और एकाएक यह तय करना कठिन है कि कौनसा सही है और कौनसा ग़लत। मुश्किल इसलिए और बढ़ जाती है कि ख़ुद के बाद जो शब्द लगा है – कुशी या कशी – इसका अर्थ अधिकतर लोगों को नहीं मालूम होता। अगर मालूम हो तो यह बताना बहुत आसान है कि कौनसा शब्द सही है। आज की इस चर्चा में हम जानेंगे कशी और कुशी का अर्थ और पता लगाएँगे कि कौनसा शब्द सही है।

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Mispronounced English Words

CP9: Close कब है क्लोस और कब है क्लोज़?

Close के दो उच्चारण हैं। क्लोज़ और क्लोस। जब Close क्रिया (Verb) के रूप में इस्तेमाल होगा तो उच्चारण होगा क्लोज़। उदाहरण – Close (क्लोज़) the window। जब Close संज्ञा (Noun) या विशेषण (Adjective) के रूप में इस्तेमाल होगा तो उच्चारण होगा क्लोस। उदाहरण – We are close (क्लोस) to each-other.

S के उच्चारणों पर और विस्तार से जानने के लिए पढ़ें –

EC33 (जब S किसी कॉन्सनंट के बाद हो) 

EC 34 (जब S बहुवचन बनाने के लिए शब्द के अंत में आए) 

EC35 (जब S के बाद या दोनों तरफ़ व़ावल हों) 

EC36 (-sion का उच्चारण).

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Mispronounced English Words

CP8: Loose का उच्चारण लूस है, लूज़ नहीं

Loose (ढीला) और Lose (खोना, हारना) का कई लोग एक ही उच्चारण करते हैं – लूज़। लेकिन दोनों के उच्चारण में अंतर है। Lose का उच्चारण तो ‘लूज़’ है मगर Loose का सही उच्चारण ‘लूस’ है।

S के उच्चारणों पर और विस्तार से जानने के लिए पढ़ें –

EC33 (जब S किसी कॉन्सनंट के बाद हो)

EC 34 (जब S बहुवचन बनाने के लिए शब्द के अंत में आए)

EC35 (जब S के बाद या दोनों तरफ़ व़ावल हों)

EC36 (-sion का उच्चारण)

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एकला चलो

बिन बुलाया मेहमान जो जाने का दिन नहीं बताता

गौतम बुद्ध ने कहा था – दुख है। दुख का कारण है। दुख का कारण इच्छा है। तो क्या इसका मतलब यह है कि जब तक इच्छाएँ रहेंगी, तब तक दुख रहेगा? अगर हाँ तब तो दुख को समाप्त करने का या दुखों से मुक्ति का एक ही मार्ग दिखता है – इच्छाओं का नाश। मगर क्या इच्छाओं के नाश के बाद ज़िंदगी का कोई मक़सद बचता है? आख़िर इच्छाओं की पूर्ति ही तो हमें सुख भी देती है…

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