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आलिम सर की हिंदी क्लास शुद्ध-अशुद्ध

118. जो मृत जैसा हो, उसे मृतप्रायः कहेंगे या मृतप्राय?

प्रायः शब्द का उपयोग और अर्थ हम सब जानते हैं – अकसर, लगभग, समान। लेकिन जब यह शब्द किसी और शब्द के साथ जुड़कर आएगा तो क्या प्रायः लिखा जाएगा या प्राय? जो लगभग मरे जैसा हो, वह मृतप्रायः है या मृतप्राय? जो लुप्त होने के कगार पर हो, वह लुप्तप्रायः है या लुप्तप्राय? कष्ट से भरे जीवन के लिए कष्टप्रायः लिखेंगे या कष्टप्राय? जानने के लिए आगे पढ़ें।

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EC23 : Adjust में d है साइलंट, उच्चारण है अजस्ट

संजीव कुमार की एक फ़िल्म है ‘स्वर्ग-नरक’ जिसमें उन्होंने ऐसे भलेमानस का रोल किया था जो किसी से कोई बड़ा नोट लेते थे तो छुट्टे न होने के बहाना करते थे और कहते थे — ‘कोई बात नहीं, एडजऽस्ट कर लेंगे।’ उनके इस ‘एडजस्ट’ में दो गड़बड़ियाँ थीं। एक, यह उधार कभी ‘एडजस्ट’ होता नहीं था और दो, ‘एडजस्ट’ का उनका उच्चारण ग़लत था। क्या है Adjust और ऐसे ही और शब्दों का सही उच्चारण, जानने के लिए नीचे विडियो देखें या आगे पढ़ें।

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117. किसकी लौ में जलता है परवाना : शमा या शमाँ?

शेर-ओ-शायरी में यह शब्द बहुत आता है, ख़ासकर परवाने के साथ। लेकिन यह शब्द है क्या – शमा या शमाँ? जब मैंने फ़ेसबुक पर इसके बारे में एक पोल किया तो 90% ने कहा – शमा सही है। 10% का अंदाज़ा था कि शमाँ सही है। सही क्या है, ख़ासकर हिंदी में, यह हम आगे जानेंगे। साथ में यह भी जानेंगे कि उर्दू में इसका जो रूप है, वह इन दोनों से अलग है। न वह शमा है, न ही शमाँ। क्या है वह, जानने के लिए आगे पढ़ें।

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EC22: क़िस्सा चेमिस्ट्री पढ़ानेवाले कोपड़ा सर का

मेरे एक साथी थे सुभाष चोपड़ा। केमिस्ट्री पढ़ाते थे। एक दिन एक छात्र उनके पास आकर बोला, ‘सर, ये चेमिस्ट्री मुझे समझ में नहीं आती।’ चोपड़ा ने कहा, ‘कैसे समझ में आएगी जब तुम्हें अपने सब्जेक्ट का नाम भी बोलना नहीं आता? Ch का उच्चारण ‘च’ नहीं, ‘क’ होता है। चेमिस्ट्री नहीं, केमिस्ट्री।’ छात्र बोला, ‘मैं समझ गया कोपड़ा सर।’ हँसी आई? नहीं आई। आएगी भी कैसे! यह Ch का मामला ही ऐसा है कि अच्छे से अच्छे हँसमुख इंसान को भी रुला दे। लेकिन रोने से लाभ नहीं होगा। यह जानना होगा कि कहाँ Ch का उच्चारण क्या होता है।

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116. हरिण तो है एक जानवर, हिरण माने कुछ और?

शायद पहली या दूसरी क्लास की बात है –  मुझे Deer की स्पेलिंग और उसका अर्थ लिखने को कहा गया था। तब मैंने हरिण लिखा था (क्योंकि वागड़ी – जो मेरी मातृभाषा है – उसमें हरिण ही बोला जाता है) लेकिन मेरी टीचर या किसी सीनियर छात्र ने मुझे टोका था कि मैंने जो लिखा है, वह सही नहीं है। मुझे आज तक उलझन भरे वे पल याद हैं – हरिण ग़लत कैसे है? हम तो घर पर यही बोलते हैं। लेकिन मैं छोटा था। सवाल नहीं कर सकता था। मगर आज कर सकता हूँ – हरिण सही है या हिरन? जानने के लिए आगे पढ़ें।

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